लोकतांत्रिक संस्थाओं एवं व्यवस्थाओं को बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी

Updated at : 21 Jan 2025 1:28 AM (IST)
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लोकतांत्रिक संस्थाओं एवं व्यवस्थाओं को बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने लगभग तीन साल के लंबे विमर्श और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सहमति-असहमति के बीच ऐसा संविधान बनाया है, जो हमारे लोकतंत्र को चलाने के साथ ही दुनिया की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का भी मार्गदर्शन कर रहा है.

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संवाददाता, पटना

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने लगभग तीन साल के लंबे विमर्श और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सहमति-असहमति के बीच ऐसा संविधान बनाया है, जो हमारे लोकतंत्र को चलाने के साथ ही दुनिया की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का भी मार्गदर्शन कर रहा है. हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि उच्च कोटि की परंपराएं स्थापित करते हुए सहमति-असहमति के बीच अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत करें. 85वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में श्री बिरला ने कहा कि पीठासीन पदाधिकारी के तौर पर हमारे समक्ष जिम्मेदारियां और चुनौतियां भी हैं. वर्तमान परिप्रेक्ष्य की चुनौतियों के बीच हमें अपने शब्दों की गरिमा और शुचिता बरकरार रखते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को बरकरार रखना होगा.

पंचायत से संसद तक लोकतांत्रिक संस्थाओं के अंदर हो सार्थक चर्चा

ओम बिरला ने पंचायत से लेकर संसद तक सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं के अंदर उपयोगी और सार्थक चर्चा होने पर बल दिया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के सभी स्थलों पर महत्वपूर्ण चर्चा होगी तो उसके बेहतर परिणाम आयेंगे. शासन में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रशासन भी ईमानदार होगा.

बिहार के अतीत से मिलती है प्रेरणा

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि बिहार हम सबके लिए प्रेरणा की धरती रही है. बुद्ध का करुणा व शांति का संदेश, महावीर के अहिंसा का सिद्धांत, सम्राट अशोक का नैतिक मूल्य और चंपारण से गांधी के अहिंसा का संदेश देने वाले इस बिहार का अतीत काफी गौरवशाली और प्रेरणादायी रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार की इस धरती से डॉ राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर, डॉ जाकिर हुसैन, अनुग्रह नारायण सिंह, राम मनोहर लोहिया और बाबू वीर कुंवर सिंह जैसे महापुरुष निकले, जिन्होंने देश को नयी दिशा दी.

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संविधान प्राणहीन मशीन, ईमानदार संचालन की जरूरत : हरिवंश

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने सम्मेलन के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों को मजबूत रखने के लिए बहुमूल्य सुझाव मिलने की उम्मीद जतायी. उन्होंने कहा कि संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद ने संविधान बनने के बाद कहा था कि संविधान एक मशीन की तरह प्राणहीन चीज है. जो लोग इसका संचालन करते हैं, उससे इसमें ताकत आती है. भारत को ऐसे ईमानदार लोगों की जरूरत है जो देश को आगे ले जा सके. श्री हरिवंश ने कहा कि देशभर से आये पीठासीन अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि दुनिया में जब भी लोकतांत्रिक मूल्यों की चर्चा होती है, बिहार का नाम पहले आता है. यह धरती सभ्यता और संस्कृति का पालना रही है. स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के इतिहास में बिहार का बड़ा नाम रहा है. उन्होंने बिहार को देश-दुनिया के लिए दर्शनीय बनाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को श्रेय देते हुए कहा कि उनकी रहनुमाई में ऐतिहासिक काम हुए हैं. भूमि सुधार कानून यहीं से पास हुआ. 2006 में बिहार पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना. बच्चियों के लिए साइकिल-पोशाक योजना दी. इससे सोशियो इंडिकेटर में सुधार हुआ.

सदन को आम लोगों से जोड़ने पर काम हो : सम्राट

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सम्मेलन के माध्यम से सदनों को आम जनता से जोड़ने पर बल दिया. उन्होंने कहा कि इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए कि विधेयक के स्वरूप को किस मैकेनिज्म से लाएं कि इसे आम लोगों को भी जोड़ा जा सके. साथ ही सदन की समितियों की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के तरीके को भी और बेहतर कैसे किया जा सकता है? श्री चौधरी ने कहा कि बिहार नालंदा और विक्रमशिला के रूप में प्राचीन ज्ञान की धरती रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्स्थापित कर दिया है, अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी साल विक्रमशिला विवि को पुनर्स्थापित करने का काम करेंगे. इसके लिए राज्य सरकार ने जमीन दे दी है. उन्होंने कहा कि बिहार पूरे देश में एक मजदूर के तौर पर राष्ट्र निर्माता का काम करता है. देश के निर्माण में उच्च पदों से लेकर निचले स्तर पर इसकी भूमिका है. उपमुख्यमंत्री ने 2047 तक भारत को श्रेष्ठ बनाने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य के तहत सभी पीठासीन अधिकारियों को सोचने की अपील की.

बिहार के वैशाली से ही दुनिया को मिला लोकतंत्र : अवधेश

बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि बिहार की धरती वैशाली से ही दुनिया को लोकतंत्र मिला है. सभी राज्यों के लोगों के आने से बिहार की यह धरती और हम गौरवान्वित हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा युद्ध नहीं बुद्ध की चर्चा करते हैं. वे बुद्ध और महावीर भी यहीं से निकले. इसको याद कर हम अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं.

जागरूक रहेंगे तो संवैधानिक मूल्यों की पहचान बरकरार रहेगी : श्रवण

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि राज्य विधानमंडलों के पास संविधान के संरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. विधायी संस्थाएं जागरूक रहेंगी तो निश्चित रूप से संवैधानिक मूल्यों की पहचान बरकरार रहेगी. उन्होंने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार मिल कर कल्याणकारी कार्यों को कर रही है. बिहार में गरीबों के विकास और उनको मुख्यधारा में शामिल करने के लिए नीतीश सरकार सात निश्चय योजना लेकर आयी. इसके माध्यम से हर घर को बिजली, नल-जल की उपलब्धता, गलियों का पक्कीकरण, सभी बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने का काम सुनिश्चित किया गया. महिलाओं को विशेष अवसर देने के लिए उनको अलग से आरक्षण दिया गया. उन्होंने कहा कि 2025 भाईचारा का वर्ष हो, यही शुभकामना है.

यह सम्मेलन संसदीय कार्य प्रणाली को अधिक प्रभावशाली बनाने पर चर्चा का माध्यम : नंदकिशोर

स्वागत भाषण देते हुए बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने कहा कि यह तीसरा अवसर है, जब बिहार इस कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है. सबसे पहले 1964 में, फिर 1982 में और अब लगभग 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सभी राज्यों के पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन बिहार विधानसभा के प्रांगण में हो रहा है. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके सहयोग व मार्गदर्शन के बिना यह कार्यक्रम इस तरीके से आयोजित नहीं हो पाता. उन्होंने कहा कि बिहार की धरती को भारत के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक धरोहर का केंद्र माना जाता है. यहां राज्यपाल के रूप में रहे डॉ जाकिर हुसैन और रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए. बिहार विधानमंडल के इस प्रांगण में पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, रामनाथ कोविंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन हो चुका है. उन्होंने कहा कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन में विधानसभाओं और विधान परिषदों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह सम्मेलन न केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच है, बल्कि एक अवसर भी है कि हम अपने अनुभव को साझा करें और संसदीय कार्य प्रणाली को और अधिक प्रभावशाली बनाने के उपायों पर चर्चा करें.

धन्यवाद ज्ञापन विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने किया.

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