पटना के मत्स्य कार्यालय में मरी मिली पांच टन मछलियां, बड़ी लापरवाही आयी सामने

Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 23 Jul 2020 8:22 AM

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पटना के विद्यापति मार्ग में जिला मत्स्य कार्यालय में बने फिशकोफेड के कर्मचारी नहीं थे और, परिसर में बने तालाब में 7.5 लाख रुपये कीमत की पांच टन मछलियां मर गयीं.

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पटना : विद्यापति मार्ग में जिला मत्स्य कार्यालय में बने फिशकोफेड के कर्मचारी नहीं थे और, परिसर में बने तालाब में 7.5 लाख रुपये कीमत की पांच टन मछलियां मर गयीं. बताया जाता है कि तालाब की देख-रेख के साथ ही सारी जिम्मेदारी फिशकोफेड की है. इधर, तालाब से जब दुर्गंध आने लगी और आसपास के लोग परेशान होने लगे, तो मछलियों के मरने की बात सामने आयी. इसके बाद आनन-फानन में तालाब की साफ-सफाई के साथ मरी हुई मछलियों को हटाने का काम शुरू किया गया. इस संबंध में फिशकोफेड नयी दिल्ली के निदेशक ऋषिकेश कश्यप निषाद ने बताया कि यह तालाब आजादी से पहले का है.

सका विभाग की तरफ से समय-समय पर जीर्णोद्धार नहीं किया गया, जिसकी वजह से तालाब में कीचड़ व काई जमा हो गयी. इसके कारण तालाब का ऑक्सीजन लेवल घट गया और वहां मछलियां सुरक्षित नहीं रह पायीं और मर गयीं. उन्होंने कहा कि सफाई नहीं होने के कारण तालाब का ऑर्गेनिक लोड बढ़ जाता है. यह तालाब अब मछली उत्पादन के उपयुक्त नहीं है और सरकार को इसका जीर्णोद्धार कराना चाहिए.

कार्रवाई की मांग : इस तालाब की निगरानी के लिए फिशकोफेड के अधिकारी राजीव कुमार को जिम्मेदारी दी गयी थी, लेकिन उन्होंने सही ढंग से अपनी भूमिका नहीं निभायी और मछलियां मर कर जल के सतह पर आ गयीं. उन्होंने बताया कि फिशकोफेड के एमडी को कार्रवाई के लिए लिखा गया है. उन्होंने भी फिशकोफेड बिहार से रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट के बाद तालाब प्रभारी पर कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने बताया कि मरी हुई मछलियों को छान कर मिट्टी में गाड़ दिया गया है और तालाब की सफाई करायी गयी है.

तालाब जीर्णोद्धार नहीं होने से मरीं मछलियां

फिश्कोफेड, नयी दिल्ली के निदेशक ऋषिकेश कश्यप निषाद ने कहा राज्य में तालाबों का जीर्णोद्धार नहीं किया जाने से हजारों की संख्या में मछलियां मरी. विद्यापति मार्ग स्थित मत्स्य विभाग के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यहां तालाब आजादी से पहले के हैं. इसका विभाग की तरफ से समय पर जीर्णोद्धार नहीं किया गया. इसकी वजह से तालाब में कीचड़ व काई जम गया. इसकी वजह से तालाब का ऑक्सीजन लेवल घट गया. वहां मछलियां सुरक्षित नहीं रह पायी.

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