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दुर्गा पूजा : बंगाली अखाड़ा : 133 वर्षों की परंपरा, आस्था और आजादी की विरासत

Updated at : 25 Aug 2025 12:03 AM (IST)
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दुर्गा पूजा : बंगाली अखाड़ा : 133 वर्षों की परंपरा, आस्था और आजादी की विरासत

लंगरटोली स्थित बंगाली अखाड़ा (शुरोद्यान पूजा अनुष्ठान समिति ) न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि आजादी की लड़ाई में भी इसका योगदान रहा है.

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-हर वर्ग के लोग मां दुर्गा के दरबार में माथा टेकते हैं

-क्रांतिकारियों की व्यायामशाला से शुरू हुई अद्भुत यात्रा

सुबोध कुमार नंदन, पटना

लंगरटोली स्थित बंगाली अखाड़ा (शुरोद्यान पूजा अनुष्ठान समिति ) न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि आजादी की लड़ाई में भी इसका योगदान रहा है. ब्रिटिश शासन के दौरान 1874 में क्रांतिकारियों ने अपने स्वास्थ्य और शारीरिक सामर्थ्य को बनाये रखने के लिए यहां कठोर व्यायाम और खेलकूद की शुरुआत की. इसी उद्देश्य से सूरोदय एथलेटिक क्लब की स्थापना हुई.

1893 में शुरू हुई दुर्गा पूजा की परंपरा

साल 1893 में यहां मां दुर्गा की पूजा आरंभ हुई. यह विश्वास था कि मां दुर्गा ही असुर शक्तियों को परास्त कर अपने भक्तों की रक्षा करती हैं. तभी से यह परंपरा निरंतर जारी है और आज 133वें वर्ष की पूजा की तैयारी की जा रही है. इस दौरान पूरे देश-विदेश से हजारों-लाखों श्रद्धालु पटना पहुंचते हैं. जाति, धर्म, संप्रदाय से परे हर वर्ग के लोग मां दुर्गा के दरबार में माथा टेकते हैं और स्वेच्छा से दान करते हैं.

मूर्तिकारों की विरासत कायम

विशेष बात यह है कि 1893 में जिस कलाकार परिवार ने पहली प्रतिमा बनायी थी, उसी वंश के लोग आज भी प्रतिमा निर्माण की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. न सिर्फ शैली, बल्कि मूर्ति बनाने की पारंपरिक विधि भी वही है, जो 1893 में अपनायी गयी थी.

शुरोद्यान पूजा अनुष्ठान समिति के सदस्य

सभापति : निशिथ कुमार बोस, सचिव व संपादक : जयदीप मुखर्जी और कोषाध्यक्ष संदीप ब्रह्मचारी, वरीय उपाध्यक्ष समीर राय

कब होगी कौन सी पूजा

27 सितंबर (शनिवार)सायं : देवी प्रतिमा का आगमन एवं स्वागत

रात्रि : कलश स्थापना की तैयारी28 सितंबर (रविवार -षष्ठी)

प्रातः 9:00 बजे -देवी प्रतिमा का आह्वान व षष्ठी पूजा29 सितंबर (सोमवार -सप्तमी)

प्रातः 8:45 बजे -नवपत्रिका प्रवेश एवं स्थापनाशाम में – महासप्तमी पूजा प्रारंभ

30 सितंबर (मंगलवार-अष्टमी एवं संधि पूजा)प्रातः 8:45 बजे -महाअष्टमी पूजा आरंभ

संधि पूजा : दोपहर 1:30 बजे से 2:30 बजे तककुमारिका पूजा एवं पुष्पांजलि

1 अक्तूबर (बुधवार -महानवमी)प्रातः 8:45 बजे -महानवमी पूजा आरंभ

पुष्पांजलि एवं भोग2 अक्तूबर (गुरुवार – विजयादशमी)

प्रातः 9:45 बजे- दशमी पूजा एवं देवी विसर्जन

कलश विसर्जन एवं सिंदूर खेला

विशेष आकर्षण

प्रतिदिन सुबह 8:00 बजे से 10:00 बजे तक चंडी पाठ व पुष्पांजलि.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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