ePaper

1979 में बने कानून का कड़ाई से पालन नहीं होने से श्रमिकों को हुई परेशानी, नया कानून बनाने की आवश्यकता : सुशील मोदी

Updated at : 28 May 2020 5:49 PM (IST)
विज्ञापन
1979 में बने कानून का कड़ाई से पालन नहीं होने से श्रमिकों को हुई परेशानी, नया कानून बनाने की आवश्यकता : सुशील मोदी

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार को कहा कि 40 साल पुराने कानून के स्थान पर बदले संदर्भ में प्रवासी श्रमिकों के लिए नया कानून बनाने की जरूरत है. कोरोना संकट के मद्देनजर लाॅकडाउन के दौरान अगर ‘अन्तरराज्यीय प्रवासी मजदूर एक्ट-1979’ का कड़ाई से पालन किया गया होता तो देश के एक से दूसरे राज्यों में पलायन करने वाले करोड़ों श्रमिकों को फजीहत का सामना नहीं करना पड़ता.

विज्ञापन

पटना : बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार को कहा कि 40 साल पुराने कानून के स्थान पर बदले संदर्भ में प्रवासी श्रमिकों के लिए नया कानून बनाने की जरूरत है. कोरोना संकट के मद्देनजर लाॅकडाउन के दौरान अगर ‘अन्तरराज्यीय प्रवासी मजदूर एक्ट-1979’ का कड़ाई से पालन किया गया होता तो देश के एक से दूसरे राज्यों में पलायन करने वाले करोड़ों श्रमिकों को फजीहत का सामना नहीं करना पड़ता.

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 1979 के एक्ट के अनुसार प्रवासी मजूदरों को घर आने-जाने के लिए रेल किराया देने, अस्वस्थ होने पर इलाज, दवा का खर्च वहन करने, एक व्यक्ति के लिए 6.5 वर्ग मीटर क्षेत्र में आवास की व्यवस्था करने, पेयजल, शौचालय, स्नानागार और जाड़े में गर्म कपड़ा आदि देने तथा विवाद की स्थिति में नियोक्ताओं को दंडित करने का प्रावधान है. इसके साथ ही कानून का पालन कराने के लिए संबंधित राज्यों में इंस्पेक्टर नियुक्त किया जाना है.

सुशील मोदी ने कहा कि श्रमिकों को नये सिरे से परिभाषित करने के साथ उन्हें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा स्कीम (ईएसआईएस), लेबर सेस तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा का कवर व सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ‘वन नेशन, वन राशनकार्ड’ के तर्ज पर देने का प्रावधान होना चाहिए. राष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी श्रमिकों का डाटा बेस तैयार कर प्रत्येक को यूनिक पहचान संख्या देने की भी जरूरत है.

बिहार के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान कानून में कंट्रैक्टर के माध्यम से एक साथ गये लोगों को ही प्रवासी मजदूर माना गया है, जबकि आज लाखों लोग बिना किसी कंट्रैक्टर के भी अकेले अन्य राज्यों में मजदूरी के लिए जाते हैं. अगर नियोक्ताओं व उद्योगपतियों द्वारा कानून का कड़ाई से पालन किया गया होता तो देश के करोड़ों मजदूरों को दुर्दशाग्रस्त होकर पलायन नहीं करना पड़ता. ऐसे में समय की मांग है कि चार दशक पुराने कानून को नये सिरे से अधिनियमित कर उसे कड़ाई से पालन कराया जाये.

Also Read: जहर देकर महिला की हत्या, शव को जलाने की कोशिश, पति और भैंसुर गिरफ्तार

विज्ञापन
Samir Kumar

लेखक के बारे में

By Samir Kumar

More than 15 years of professional experience in the field of media industry after M.A. in Journalism From MCRPV Noida in 2005

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन