अगले साल होगी चकबंदी, नवंबर तक 7587 गांवों में होगी बंदोबस्ती
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 01 Jun 2024 1:20 AM
बिहार में अगले साल चकबंदी होगी. विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त के बाद चकबंदी का कार्य शुरू होगा. चौथे कृषि रोड मैप में इसकी रूपरेखा तैयार कर दी गयी है.
10 हजार कर्मियों को चुनाव के बाद मिलेगा नियुक्ति पत्र मनोज कुमार, पटना बिहार में अगले साल चकबंदी होगी. विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त के बाद चकबंदी का कार्य शुरू होगा. चौथे कृषि रोड मैप में इसकी रूपरेखा तैयार कर दी गयी है. चकबंदी का कार्य शुरू करने के लिए फसलों की उत्पादकता बढ़ाने का हवाला दिया गया है. चकबंदी कार्य के लिए अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित 104 ग्रामों की सूची चकबंदी निदेशालय को उपलब्ध करा दी गयी है. चकबंदी से पूर्व सभी अंचलों में विशेष सर्वेक्षण व बंदोबस्त कार्य पूर्ण किया जायेगा. वर्ष 2024 में इस कार्य को पूर्ण कर लिया जायेगा. इसके लिए कार्ययोजना तैयार की गयी है. नवंबर माह में 7587 ग्राम में विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त का कार्य पूर्ण कर लिया जायेगा. इस साल नियुक्त होंगे 10 हजार कर्मी इस साल विशेष सर्वेक्षण व बंदोबस्त कार्य के लिए विभिन्न पदों पर 10101 कर्मियों की बहाली कर ली गयी है. इस साल इन कर्मियों को नियुक्त कर लिया जायेगा. चुनाव परिणाम के बाद सभी कर्मियों को नियुक्ति पत्र मिलना शुरू हो जायेगा. इसके साथ ही इस साल विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त संचालित सभी जिलों में बंदोबस्त पदाधिकारी-प्रभारी पदाधिकारी तथा नियमित सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के पदों पर नियमित पदस्थापन कार्य पूर्ण कर लिया जायेगा. इस साल विशेष सर्वेक्षण व बंदोबस्त कार्य के लिए बजट के अनुसार राशि उपलब्ध करायी जायेगी. 38 जिलों में पूरी हुई हवाई फोटोग्राफी विशेष सर्वेक्षण व बंदोबस्त कार्यक्रम के तहत हवाई फोटोग्राफी का कार्य विभिन्न एजेंसियों की ओर से कराया जा रहा है. कृ़षि रोड मैप की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के सभी 38 जिलों में कार्य को पूर्ण कर लिया गया है.इससे चकबंदी के काम में सहूलियत होगी. इंटीग्रेटेड लैंड्स रिकॉर्ड का होगा प्रबंधन इंटीग्रेटेड लैंड रिकॉर्डस मैनेजमेंट सिस्टम का प्रबंधन निबंधन विभाग के स्कोर के तर्ज पर किया जायेगा. बिहार लैंड रिकॉर्डस मैनेजमेंट सोसायटी के माध्यम से इस कार्य को पूरा किये जाने का प्रस्ताव है. इस कार्य के लिए चौथे कृषि रोड में सोसायटी का गठन किया जायेगा. इसके लिए एक सॉफ्टवेयर डेवलप किया जायेगा. सॉफ्टवेयर डेवलप होने के बाद इसके रख-रखाव पर हर साल खर्च की जरूरत होगी. इस साल इस पर तीन करोड़ 24 लाख रुपये खर्च किये जायेंगे.
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