Chandan Mishra Patna: एक साल में 6 मर्डर, ऐलान करके हत्या करता था चंदन मिश्रा, जानें पूरी कुंडली
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 18 Jul 2025 4:04 PM
सफेद कमीज में शूटर बादशाह, लाल टीशर्ट में चंदन मिश्रा (File)
Chandan Mishra Patna: पटना के पारस अस्पताल में दिनदहाड़े बक्सर के कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई. वारदात को अंजाम देने वाले पांच हमलावर चंदन के पुराने साथी शेरू गैंग से जुड़े थे. यह मर्डर बिहार प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है. आइये जानते हैं कुख्यात चंदन मिश्रा की पूरी कहानी...
Chandan Mishra Patna: राजधानी पटना के पारस अस्पताल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पांच हमलावर दिनदहाड़े अस्पताल में दाखिल हुए. वो सीधे दूसरी मंजिल पर बने कमरे नंबर 209 का गए. यहां भर्ती मरीज चंदन मिश्रा पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं और बेहद इत्मिनान से फरार हो गए. यह कोई आम वारदात नहीं थी, जिसे मारा गया वो बक्सर का कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा था. इस पर दर्जनों हत्याओं के आरोप हैं और जिसे कोर्ट उम्रकैद की सजा सुना चुकी थी.
जांच के दौरान जो खुलासा हुआ उसने इस मर्डर केस को और चौंकाने वाला बना दिया. यह हत्या किसी गैंगवार या अंजान दुश्मनी का मामला नहीं था, बल्कि इसे अंजाम दिया गया था चंदन के ही पुराने साथी शेरू के इशारे पर जो कभी उसका सबसे करीबी था.
कैसे हुई थी दोस्ती की शुरुआत
बक्सर जिले के सेमरी बड़ा गांव का रहने वाला शेरू का असली नाम ओंकार नाथ सिंह है. शेरू और चंदन मिश्रा एक समय में अच्छे दोस्त थे. दोनों का मेल क्रिकेट के मैदान में हुआ था और यही दोस्ती आगे चलकर खूनी रिश्ते में बदल गई. साल 2009 में क्रिकेट खेलते वक्त जब अनिल सिंह नामक युवक से विवाद हुआ तो दोनों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी. दोनों नाबालिग थे इस वजह से जल्द ही बाल सुधार गृह से बाहर आ गए.
बाहर आते ही बने संगठित अपराधी
रिहाई के बाद दोनों ने मिलकर अपना गैंग तैयार किया. फिर रंगदारी और हत्या का सिलसिला शुरू हुआ. अपराध की दुनिया में पैसे के साथ-साथ ताकत भी बढ़ती गई. नए लड़के जुड़ते गए. हथियार जमा होते गए. देखते ही देखते बक्सर और आसपास के इलाकों में इनका आतंक स्थापित हो गया.
2011 में छह मर्डर
साल 2011 दोनों अपराधियों के लिए सबसे खूनी साल रहा. मार्च से अगस्त के बीच में इनके गैंग ने छह बड़ी हत्याएं कीं. इनमें मोहम्मद नौशाद, भरत राय, जेल क्लर्क हैदर अली, शिवजी खरवार, मोहम्मद निजामुद्दीन और चूना व्यापारी राजेंद्र केसरी शामिल थे.
दोस्ती में दरार की शुरुआत कैसे हुई
चूना व्यापारी राजेंद्र केसरी ने रंगदारी देने से इनकार किया तो 21 अगस्त 2011 को उसकी हत्या कर दी गई. हत्या से एक दिन पहले ही चंदन मिश्रा ने धमकी दी थी कि वह उसे जान से मार देगा और उसने ऐसा ही किया. इस हत्याकांड ने चंदन और शेरू के रिश्तों में दरार डाल दी. पैसों के बंटवारे और जातिगत समीकरणों के कारण दोनों के रास्ते अलग हो गए. इसके बाद दोनों ने अपने-अपने अलग गैंग बना लिया.
गिरफ्तारी और सजा के बाद भी जारी रहा आतंक
राजेंद्र केसरी की हत्या के बाद दोनों अपराधी कोलकाता भाग गए. यहां दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद दोनों को बक्सर पुलिस ने कोर्ट में पेश किया. इसके बाद उन्हें पहले भागलपुर और फिर पटना के बेऊर जेल में शिफ्ट किया गया. जेल में रहकर भी उनका अपराधी नेटवर्क चालू रहा. केसरी मर्डर केस में कोर्ट ने शेरू को फांसी और चंदन को उम्रकैद की सजा सुनाई. हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने शेरू की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया.
चंदन मिश्रा ने कोर्ट में भी पुलिस का हथियार छीनकर फायरिंग कर दी थी और फरार हो गया था. बाद में आरा पुलिस ने उसे फिर पकड़ा था.
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चंदन अस्पताल में मारा गया
चंदन मिश्रा पाइल्स के इलाज के लिए कोर्ट से पैरोल पर बाहर आया था. उसकी पेरोल 18 जुलाई को खत्म होने वाली थी. लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले यानी 17 जुलाई को अस्पताल में उसे गोलियों से भून दिया गया. शेरू गैंग के पांच लोग अस्पताल में घुसे और फिल्मी अंदाज में उसकी हत्या करके फरार हो गए.
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पुलिस के बयान पर सवाल
इस वारदात ने बिहार की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है. बता दें कि घटना से ठीक एक दिन पहले को बिहार पुलिस ने शूटर सेल के गठन की घोषणा की थी, ताकि संगठित अपराध पर लगाम लगाई जा सके. लेकिन 24 घंटे भी नहीं बीते और राजधानी के हाई-सेक्योरिटी अस्पताल में चंदन की हत्या हो गई. इस पर जब एडीजी से सवाल किया गया तो उन्होंने बयान दिया, “बिहार में मई, जून और जुलाई में तो हत्याएं होती ही हैं.”
एनडीए में शामिल चिराग पासवान ने एडीजी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा, “बिहार पुलिस के ADG हेडक्वार्टर कुंदन कृष्णन का बयान अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है. हमारे अन्नदाता किसानों को अपरोक्ष रूप से हत्यारा बताना न सिर्फ उनके मान-सम्मान का अपमान है बल्कि उनके त्याग और परिश्रम का भी अनादर है. अपराधियों पर शिकंजा कसने के बजाय बिहार पुलिस का ध्यान बेवजह के बयानों पर ज्यादा है, जो बेहद चिंताजनक है. प्रशासन को अपनी प्राथमिकता स्पष्ट करनी चाहिए.”
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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