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चैती छठ : आस्था की अंजुरी से दिया अर्घ

Updated at : 14 Apr 2024 11:39 PM (IST)
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चैती छठ : आस्था की अंजुरी से दिया अर्घ

चैती छठ के तीसरे दिन रविवार को राजधानी पटना सहित आसपास के इलाके में गंगा नदी से लेकर विभिन्न तालाबों और घर की छतों पर लाखों चैती छठ व्रतियों ने पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ दिया और और परिवार के लिए सुख-समृद्धि और पुत्र के दीर्घायु होने की कामना की

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संवाददाता, पटना लोक आस्था और सू्र्य उपासना के पर्व चैती छठ के तीसरे दिन रविवार को राजधानी पटना सहित आसपास के इलाके में गंगा नदी से लेकर विभिन्न तालाबों और घर की छतों पर लाखों चैती छठ व्रतियों ने पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ दिया और और परिवार के लिए सुख-समृद्धि और पुत्र के दीर्घायु होने की कामना की. वहीं सांध्य अर्घ को लेकर पटना के गंगा घाटों पर व्रतियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही. गंगा घाट से लेकर शहर के विभिन्न तालाबों पर लोगों ने भगवान भास्कर को अर्घ दिया. शहर में केलवा जे फरेला घवद से…, ओह पर सुगा मेड़राय…, आदित लिहो मोर अरगिया.., कांच ही बास के बहंगिया बहंगी लचकत जाये जैसे लोकप्रिय छठ लोक गीतों से पूरा माहौल छठमय हो गया. गंगा घाटों और तालाबों पर पहुंचने का सिलसिला दोपहर तीन बजे से शुरू हो गया था. व्रती और उनके परिजनों ने अस्ताचलगामी सूर्य को शाम 6.19 मिनट से अर्घ्य देना शुरू कर दिया और फिर देर शाम तक लोग अपने घरों को लौटते रहे. सोमवार की सुबह व्रती उगते सूर्य को अर्घ अर्पित करेंगे और पारण के साथ महापर्व पूरा हो जायेगा. वहीं जिला प्रशासन की ओर से व्रतियों की सुविधा के लिए घाटों तक पहुंच पथ और चेंजिंग रूम तैयार किया गया. उगते सूर्य को अर्घ देने के साथ होगा व्रत का समापन : इसके पहले व्रतियों ने शनिवार की शाम खरना के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो गया था. पर्व के चौथे और अंतिम दिन यानी सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ देने के साथ ही चैती छठ व्रतियों का व्रत संपन्न हो जायेगा. इसके बाद व्रती अन्न-जल ग्रहण कर पारण करेंगे. उषा अर्घ के लिए सुबह 5.40 मिनट के बाद सूर्योदय का समय है. उदीयमान सूर्य को अर्घ देने से यश, बल व बुद्धि : ज्योतिषी राकेश झा के मुताबिक जल में रक्त चंदन, लाल फूल, इत्र के साथ ताम्रपात्र में आरोग्य के देवता उदीयमान सूर्य को अर्घ देने से आयु, विद्या, यश और बल की प्राप्ति होती है. स्थिर व महालक्ष्मी की प्राप्ति के लिए सूर्य को दूध का अर्घ देना चाहिए. कलयुग के प्रत्यक्ष देवता सूर्य को जल में गुड़ मिला कर अर्घ देने से पुत्र और सौभाग्य का वरदान व कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं. घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम : चैती छठ पर्व को लेकर पटना के घाटों पर सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गयी है. इस बीच गंगा नदी, तालाब और छतों पर छठ पूजा के पारंपरिक गीत गूंजते रहे.

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