Lalu Family News: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने आत्ममंथन की कोशिश शुरू की है. शुक्रवार को हुई पहली समीक्षा बैठक इसी कड़ी का हिस्सा थी. बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने की. उनके सरकारी आवास पर सांसदों और कोर कमेटी के सदस्यों की मौजूदगी रही. एजेंडा साफ था- चुनावी हार के कारण तलाशना, संगठन की कमजोरियां समझना और बजट सत्र के लिए रणनीति बनाना.
लेकिन यह बैठक जितनी संगठनात्मक रही, उससे ज्यादा चर्चा में रहा लालू परिवार का अंदरूनी टकराव. समीक्षा के बीच राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का सोशल मीडिया पोस्ट सामने आया. इस पोस्ट ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया.
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा?
रोहिणी ने बिना नाम लिए तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि सिर्फ समीक्षा का दिखावा काफी नहीं है. असली जरूरत आत्ममंथन की है. जिम्मेदारी लेने की है. उन्होंने तेजस्वी के आसपास मौजूद कुछ लोगों को “गिद्ध” बताया. साफ कहा कि जब तक ऐसे लोगों को हटाया नहीं जाएगा, तब तक कोई भी समीक्षा बेकार है. पोस्ट के अंत में उनका वाक्य- “पब्लिक सब जानती है.” ये कई सवाल खड़े कर गया.
तेज प्रताप के भोज में भी नहीं पहुंचे थे तेजस्वी
यह बयान अचानक नहीं आया. पिछले कुछ समय से लालू परिवार में मतभेद के संकेत लगातार मिल रहे हैं. 14 जनवरी को तेज प्रताप यादव ने दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया. इसमें लालू यादव पहुंचे. तेज प्रताप ने तेजस्वी और राबड़ी देवी को भी न्योता दिया था. लेकिन तेजस्वी इस कार्यक्रम में नहीं आए.
इस पर तेज प्रताप ने सार्वजनिक तौर पर तंज कसा. बोले, “तेजस्वी छोटे भाई हैं, देर से उठते हैं. रात 9 बजे तक इंतजार करूंगा.” तेजस्वी फिर भी नहीं पहुंचे. इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं कि लालू परिवार अब दो खेमों में बंटता दिख रहा है.
लालू यादव परिवार को जोड़ने की कर रहे हैं कोशिश
एक तरफ लालू यादव परिवार को जोड़कर रखने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी तरफ बेटे-बेटी और बेटों के बीच असहजता खुलकर सामने आ रही है. तेज प्रताप पहले भी तेजस्वी के करीबी संजय यादव पर हमला बोलते रहे हैं. रोहिणी भी उन्हीं लोगों को निशाने पर ले रही हैं, जिन्हें वह पार्टी की गिरावट का जिम्मेदार मानती हैं.
बिहार चुनाव में हार के बाद रोहिणी ने क्या कहा था?
चुनाव हार के बाद रोहिणी ने यह भी कहा था कि पार्टी और परिवार दोनों में उनके साथ अन्याय हुआ है. उनका आरोप है कि लालू यादव की राजनीतिक विरासत को कुछ लोग कमजोर कर रहे हैं. ये आरोप सीधे तेजस्वी के नेतृत्व और उनकी टीम पर सवाल खड़े करते हैं.
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह विवाद अब निजी नहीं रहा. इसका असर राजद की राजनीति पर पड़ सकता है. लालू परिवार की एकता हमेशा पार्टी की ताकत रही है. अगर यही एकता कमजोर हुई, तो राजद के लिए आने वाला समय और मुश्किल हो सकता है.
तेजस्वी के सामने दोहरी चुनौती
आज तेजस्वी यादव के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ पार्टी को दोबारा मजबूत करना. दूसरी तरफ परिवार के भीतर उठ रहे सवालों का जवाब देना. आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि राजद इस संकट से निकलती है या और उलझती चली जाती है.

