20 नवंबर को मौन उपवास रखेंगे प्रशांत किशोर, बिहार चुनाव में जमानत जब्त होने के बाद क्या-क्या बोले पीके

Published by :Paritosh Shahi
Updated at :18 Nov 2025 2:34 PM
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Prashant-Kishor

प्रशांत किशोर

Bihar Politcs: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज के 95 प्रतिशत से अधिक उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. पीके के तमाम दावे फुस्स साबित हुए. नतीजे आने के बाद उन्होंने पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे बिहार छोड़ने वाले नहीं हैं.

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Bihar Politcs: प्रशांत किशोर जब बिहार विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे तब उन्होंने कहा था कि हमारी पार्टी अगर 140 सीट पाएगी तो मैं इसे व्यक्तिगत हार मानूंगा. उन्होंने दावा किया था कि जदयू के 25 से ज्यादा विधायक नहीं बनेंगे. ऐसा होने पर उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने की बात कही थी. 14 नवंबर को जब रिजल्ट आया तो उनकी पार्टी का हश्र काफी बुरा हुआ और उनके एक भी उम्मीदवार नहीं जीत पाए और 85 सीटों से साथ जदयू ने शानदार कमबैक किया. रिजल्ट आने के 4 दिन बाद प्रशांत किशोर मीडिया के सामने आये और कहा कि वे बिहार छोड़ के कहीं नहीं जा रहे हैं.

जनता के बीच में ढंग से नहीं रख पाए बात ‎

‎पटना में पीके ने कहा कि हम लोगों ने अपनी बात ठीक ढंग से जनता को नहीं बताई. उस कारण शायद जनता ने वोट नहीं दिया. खुद पर इसकी जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने कहा कि वे जिस विश्वास की उम्मीद कर रहे थे, वह विश्वास नहीं जीत पाए. ‎

‎उन्होंने कहा कि यह आत्मचिंतन का समय है. एनडीए को जीत के लिए बधाई देते हुए पीके कहा कि अब यह उनकी जिम्मेदारी है कि जिन बातों को लेकर वे सत्ता में आये हैं, उस पर वह काम करें.

एक दिन का मौन उपवास रखेंगे पीके ‎

प्रशांत किशोर ने कहा कि जिन बातों को लेकर वह जनता के बीच पहुंचे थे और उनको एक सपना दिखाया था, उसे वे पूरा नहीं कर सके. जनता ने उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया. इसके प्रायश्चित के तौर पर वे 20 नवंबर को भितिहरवा आश्रम में एक दिन का मौन सामूहिक उपवास रखेंगे. ‎

‎उन्होंने कहा कि गलती हम लोगों से हुई होगी, लेकिन गुनाह नहीं किया है. वोट नहीं मिलना गुनाह नहीं है. आज झटका लगा है लेकिन उन गलतियों को सुधार कर हमलोग फिर से खड़े होंगे. प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज की बिहार सुधारने की जो जिद है, वह पूरे किए बिना छोड़ने वाले नहीं हैं. पीछे हटने का सवाल ही नहीं है.

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हम किसी तरह का परिवर्तन नहीं ला सके

प्रशांत किशोर ने कहा, “हमने ईमानदार प्रयास किया है और उसमें बिल्कुल सफलता नहीं मिली. इसे स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है. व्यवस्था परिवर्तन की बात छोड़िए, हम सत्ता परिवर्तन भी नहीं करा सके. लेकिन बिहार की राजनीति बदलने में हमारी भूमिका जरूर बनी है. हमारी कोशिशों में, हमारी सोच में, समझाने में कमी रही होगी जिसके कारण जनता ने हमें नहीं चुना. अगर जनता ने हम पर भरोसा नहीं जताया, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी है. मैं ये जिम्मेदारी 100% अपने ऊपर लेता हूं कि जिस प्रयास के लिए हम जुड़े थे जिस प्रयास को करना चाहते थे उसपर जनता का विश्वास नहीं जीत पाया.”

पीके ने बताया- NDA को क्यों मिला वोट ‎

पीके ने आगे कहा कि चुनाव के समय सरकार ने करीब 40 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया है. इतना बड़ा बहुमत मिलने का एक कारण यह भी है. बिहार के हर विधानसभा में 60 से 62 हजार महिलाओं को 10 हजार रुपये दिए गए. आने वाले छह महीने में इन्हें दो लाख रुपए दिए जाएंगे. ‎

प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार अगले छह महीने में इन महिलाओं को दो लाख रुपये दे, जिससे बिहार में पलायन रुक सके. ‎जिन महिलाओं को यह दो लाख रुपये की राशि नहीं मिलेगी, वह जन सुराज के नेता और कार्यकर्ता से संपर्क करें और वे उसकी मदद करेंगे. ‎

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लेखक के बारे में

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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