Bihar News: मोतिहारी में आवारा कुत्तों का आतंक—आधा दर्जन से अधिक बच्चों को काट कर किया लहूलुहान, खौफ में लोग

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Bihar News: बीते दिनों दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों के नियंत्रण के लिए निर्देश दिए हैं—मोतिहारी में आवारा कुत्तों के आतंक से शहरवासी परेशान हैं. आधा दर्जन से अधिक बच्चों पर हमला हुआ है, लेकिन जिला प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई न के बराबर है. लोग सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.
Bihar News: मोतिहारी के मीना बाजार और दम समाज चौक में आवारा कुत्तों के लगातार हमलों ने शहरवासी दहशत में डाल दिया है. आधा दर्जन से अधिक मासूम बच्चे घायल हो चुके हैं—लेकिन जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर सुनवाई ना होने से लोग बढ़ते संकट के बीच अकेले महसूस कर रहे हैं. ऐसे में संसद और सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में जारी निर्देशों की जमीन पर लागू होने की मांग जोर पकड़ रही है.
मोतिहारी में आवारा कुत्तों का आतंक
मोतिहारी शहर के दो प्रमुख इलाकों—मीना बाजार और दम समाज चौक—में हालिया दिनों में आवारा कुत्तों ने आधा दर्जन से अधिक नन्हे बच्चों पर हमला किया है. चोटिल बच्चों को मोतिहारी सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां रात भर उनका इलाज चलता रहा. मोहम्मद शोएब, जो अपने बच्चे को अस्पताल में लेकर आए थे, कहते हैं कि “ये डरावनी तस्वीर हमें सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं प्रशासन की उदासीनता एक बड़े हादसे को न्योता तो नहीं दे रही?”
प्रशासन की बेरूखी और जनमानस का असंतोष
स्थानीय लोग शिकायत करते हैं कि जिला प्रशासन और नगर निगम इस समस्या से निपटने में पूरी तरह असफल रहे हैं. शबनम अख्तर का कहना है कि, “मेरा पोता घायल हो गया, उसकी जान कभी भी जा सकती थी—लेकिन तत्काल व्यवस्था न होने से तकलीफ आगे बढ़ गई.” लोग अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को मोतिहारी में लागू करने की मांग तेज कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट का रुख: दिल्ली में संतुलित समाधान
बीते दिनों ही, दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आवारा कुत्तों पर नीति बदली—पहले कुत्तों को शेलर्ट्स में भेजने की सख्त याचिका थी, लेकिन अब उन्होंने ज्यादा संतुलित रास्ता अपनाया है जिसमें:
स्टेरिलाइजेशन (निषेचन) एवं टीकाकरण के बाद कुत्तों को वापस उनके इलाके में छोड़ा जाए, सिवाय उन्हीं के जो रैबीज या आक्रामक दिखते हों.
फीडिंग जोन (निश्चित स्थान) बनाए जाएँ, जहाँ कुत्तों को खाना दिया जा सके—सड़क पर भोजन देना गैरकानूनी घोषित है.
हर राज्य में ABC (Animal Birth Control) नियमों का सख्ती से पालन हो और एक राष्ट्रीय नीति बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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