Bihar News: पेंशन भुगतान आदेश जारी होने के बाद अब नहीं जुड़ेगा आश्रितों का नाम, महालेखाकार ने जताई आपत्ति

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Bihar News: पेंशन मामलों में लापरवाही पर महालेखाकार कार्यालय ने आपत्ति जताई है. वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि पेंशन का स्वीकृत्यादेश देने से पहले सभी निर्धारित प्रावधानों का पूरी तरह जांच परख कर लें.

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कैलाशपति मिश्र/ Bihar News: पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) जारी होने के बाद उसमें अन्य आश्रितों का नाम अब नहीं जुड़ेगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि पीपीओ जारी होने के बाद उसमें अन्य आश्रितों का नाम जोड़ने संबंधी अनुरोधों पर विशेष कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है. दरसअल पेंशन मामलों में लापरवाही पर महालेखाकार कार्यालय ने आपत्ति जताई है. निर्धारित शर्तों को पूरा किये बिना ही पारिवारिक पेंशन का स्वीकृत्यादेश जारी करने के मामलों पर चिंता व्यक्त किया है. इसके बाद वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि पेंशन का स्वीकृत्यादेश देने से पहले सभी निर्धारित प्रावधानों का पूरी तरह अनुपालन करने के लिए कहा है.

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जानें जरुरी बातें

वित्त विभाग के सचिव (संसाधन) जय सिंह ने स्पष्ट किया है कि पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) जारी होने के बाद उसमें अन्य आश्रित का नाम जोड़ने के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करने के बाद ही इस पर कोई आदेश जारी करें. यदि संबंधित पेंशनर या उनके जीवनसाथी के निधन के पश्चात कोई संतान पेंशन का दावा प्रस्तुत करती है, तो उस दावे की कानूनी समीक्षा अनिवार्य करनी चाहिये. दावा प्रासंगिक दस्तावेज और प्रावधानों के अनुसार सही होने पर ही उसे महालेखाकार को भेजने की जरूरत है.

आजीवन पारिवारिक पेंशन का प्रावधान

पारिवारिक पेंशन के संदर्भ में वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अविवाहित, परित्यक्ता एवं विधवा आश्रित पुत्रियों को 25 वर्ष की आयु के बाद भी पेंशन की सुविधा प्राप्त है. इसी प्रकार, जीविकोपार्जन में असमर्थ दिव्यांग संतानों को आजीवन पारिवारिक पेंशन का प्रावधान पहले से लागू है. इन मामलों में शर्त है कि संतान, पेंशनर या उनके जीवनसाथी के जीवनकाल में उन पर निर्भर रही हो.

पीपीओ में नाम जोड़ने को लेकर उठती हैं समस्याएं

विभाग ने यह भी बताया कि कई मामलों में पीपीओ निर्गत होने के बाद पेंशनर या उनके जीवनसाथी द्वारा अपने पात्र संतान का नाम जोड़ने का अनुरोध किया जाता है, जिससे प्रक्रियात्मक विलंब और भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है. स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में ऐसे मामलों में कार्यालय स्तर पर निर्णय लेने में कठिनाई होती है, और अंततः वित्त विभाग से परामर्श मांगा जाता है.वित्त विभाग ने ऐसे मामलों में समय पर आवश्यक दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने की अपील की है, ताकि पेंशन संबंधी दावों में पारदर्शिता बनी रहे और पात्र लाभार्थियों को समय पर लाभ मिल सके.

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