Bihar Jawan Attack: सारण के छोटू शर्मा तीन माह पहले बने थे दूल्हा, अब लौटेगा पार्थिव शरीर

Bihar Jawan Martyred in Srinagar Attack
Bihar Jawan Attack : सारण का एक और लाल देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया. श्रीनगर में तैनात आर्मी जवान छोटू शर्मा की शहादत की खबर ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है. शादी के महज तीन महीने बाद ही यह दुखद घटना घट गई, जिसने परिवार और पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया.
Bihar Jawan Attack: बिहार के सारण जिले का जवान छोटू शर्मा श्रीनगर में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गया. सेना के अधिकारियों ने परिजनों को बताया कि उनके सिर में गोली लगी थी, हालांकि इसकी वजह को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
शनिवार देर शाम यह सूचना गांव पहुंची और पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. शहीद का पार्थिव शरीर आज शाम उनके पैतृक गांव बेला शर्मा टोला लाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा.
शादी के अगले दिन मिली ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की खबर
शादी के बाद छोटू को वैवाहिक अवकाश मिला था. परिजनों के अनुसार, शादी के अगले ही दिन उन्हें “ऑपरेशन सिंदूर” में लौटने का आदेश मिला और वे तुरंत ड्यूटी पर चले गए. उस दिन के बाद से परिवार उन्हें देखने के लिए तरसता रहा और अब उनकी यादें ही सहारा बन गई हैं.
ग्रामीण यह कह रहे हैं कि किस्मत ने शादी के तीन महीने बाद ही उन्हें विधवा बना दिया. छोटू की मां कामिनी देवी की आंखों से आंसू थम नहीं रहे. वह कहती हैं—“अब मेरा सहारा छिन गया.”
2017 में सेना में हुआ था भर्ती
सारण जिले के दरियापुर थाना क्षेत्र के बेला शर्मा टोला गांव के रहने वाले छोटू शर्मा की उम्र महज 27 वर्ष थी. इस साल 9 मई को उनकी शादी सुष्मिता से हुई थी. अभी पत्नी ससुराल में थीं और उन्हें इस दुखद समाचार की जानकारी नहीं दी गई है.
छोटू की जिंदगी जिम्मेदारियों से भरी रही थी. पिता की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. चार बहनों में सबसे छोटा भाई होने के बावजूद उन्होंने घर की आर्थिक हालत सुधारी. सेना में भर्ती होने के बाद उनकी कमाई से घर चलने लगा और परिवार को स्थिरता मिली. शादी के बाद परिवार ने पहली बार चैन की सांस ली थी, लेकिन शहादत की खबर ने सबकुछ बदल दिया.
छोटू 2017 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे. प्रशिक्षण के बाद उन्हें सियाचिन जैसे कठिन मोर्चों पर तैनाती मिली, जहां उन्होंने देश की सेवा की. वर्तमान में वे श्रीनगर में तैनात थे. गांव के युवाओं के लिए छोटू हमेशा प्रेरणा बने रहे. कहा जाता है कि उन्होंने गांव में रहकर ही तैयारी की और सेना में भर्ती हुए. उनकी लगन और मेहनत ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई थी.
देश पहले, परिवार बाद में
शनिवार देर शाम सेना के अधिकारियों ने परिवार को छोटू की शहादत की खबर दी. गांव के लोगों को जैसे ही यह जानकारी मिली, चारों ओर सन्नाटा पसर गया. लोग घरों से बाहर निकल आए और शहीद के परिवार को ढांढस बंधाने लगे. गांव के बुजुर्गों ने कहा कि छोटू की शहादत पर गर्व है, लेकिन उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो पाएगी.
आज शाम जब पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा तो हजारों की भीड़ उमड़ने की संभावना है. प्रशासन की ओर से शहीद को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी. लोग तिरंगे में लिपटे अपने बेटे को कंधा देने के लिए तैयार हैं. यह दृश्य हर आंख को नम कर देगा.
शहीद छोटू के परिजन बताते हैं कि वह हमेशा कहता था—“देश पहले, परिवार बाद में.” उसकी यह सोच आज हकीकत बन गई है. हालांकि, गांव के लोग इस बात से दुखी हैं कि छोटू अपने विवाह के बाद पत्नी को खुशियां नहीं दे सका.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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