Bihar Election 2025: ‘महिला रोजगार योजना’ पर सियासी जंग, राजद ने EC में पहुंचाई शिकायत, जदयू ने किया पलटवार

Updated at : 02 Nov 2025 8:27 AM (IST)
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Bihar Election 2025: ‘महिला रोजगार योजना’ पर सियासी जंग, राजद ने EC में पहुंचाई शिकायत, जदयू ने किया पलटवार

Manoj Jha and Sanjay Jha in political battle over 'Women's Employment Scheme'

Bihar Election 2025: बिहार में एक ओर सर्द हवाएं चल रही हैं, तो दूसरी ओर राजनीति का पारा तेजी से चढ़ा है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना अब सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं रही . यह बिहार विधानसभा चुनाव के बीच सत्ता और विपक्ष के बीच ‘सियासी हथियार’ बन चुकी है. आचार संहिता के बीच महिलाओं को जारी किए गए दस-दस हजार पर आरजेडी और जेडीयू के बीच गर्म हुई राजनीति. चुनाव आयोग तक पहुंची शिकायत, सियासत में महिला सशक्तिकरण बना नया रणक्षेत्र.

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Bihar Election 2025: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि भेजे जाने को लेकर सियासत गर्म है. राजद ने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करते हुए इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया है, जबकि जदयू ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल कहा है. एक तरफ मनोज झा का पत्र है, तो दूसरी तरफ संजय झा का पलटवार , दोनों दल अब महिलाओं के मुद्दे पर एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं.

राजद की शिकायत: “चुनाव से ठीक पहले पैसा क्यों?”

राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद प्रो. मनोज झा ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिये जाने पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि बिहार में 6 अक्टूबर से आचार संहिता लागू है, ऐसे में सरकारी योजना के तहत महिलाओं के खातों में धनराशि भेजना चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है.

राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि “दस लाख से अधिक महिलाओं के खातों में 17, 24 और 31 अक्टूबर को राशि भेजी गयी और अब 7 नवंबर को अगली किश्त जारी की जानी है. यह सब कुछ दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले हो रहा है, जो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है.”

पार्टी ने चुनाव आयोग से इस पर तत्काल रोक लगाने और जवाब मांगने की मांग की है.

जदयू का पलटवार: “राजद को महिलाओं की तरक्की से चिढ़”

राजद के आरोपों पर जदयू ने तीखा पलटवार किया है. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा,

“नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं. अब जब मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से 1.5 करोड़ महिलाओं को स्वरोजगार का मौका मिला है, तो राजद को परेशानी हो रही है.”

उन्होंने कहा कि लालू यादव ने अपने परिवार की महिलाओं को आगे बढ़ाने के अलावा कभी बिहार की माताओं-बहनों के लिए कुछ नहीं किया. “आज जब राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की ठोस पहल हो रही है, तब राजद उसे रोकना चाहती है. यही उनका असली महिला विरोधी चेहरा है,” संजय झा ने लिखा.

क्या है मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना?

राज्य सरकार ने इस वर्ष ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों की महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर देना है. अब तक 1 करोड़ 51 लाख महिलाओं के खातों में 10 हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जा चुकी है.

सरकार का दावा है कि दिसंबर तक शेष पात्र महिलाओं को भी यह राशि मिल जाएगी. योजना के तहत यह राशि अनुदान के रूप में दी जा रही है, जिसे लौटाना नहीं है.

महिलाएं इस राशि से किराना, फल-सब्जी, स्टेशनरी, ब्यूटी पार्लर या सिलाई-कढ़ाई जैसे छोटे व्यवसाय शुरू कर सकती हैं. पहले चरण की राशि का सही उपयोग करने पर दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी.

कौन हैं पात्र महिलाएं?

इस योजना में 18 से 60 वर्ष तक की महिलाएं आवेदन कर सकती हैं. आवेदिका या उसके पति आयकरदाता नहीं होने चाहिए और न ही किसी सरकारी सेवा (नियमित या संविदा) में कार्यरत. ग्रामीण क्षेत्रों में यह आवेदन ‘जीविका समूहों’ के माध्यम से किया जा सकता है.
सरकार ने कहा है कि योजना की कोई अंतिम तिथि नहीं है , जब तक सभी पात्र महिलाएं इसका लाभ नहीं ले लेतीं, यह योजना जारी रहेगी.

सियासत का महिला चेहरा

बिहार की राजनीति में महिलाएं लंबे समय से एक निर्णायक वर्ग रही हैं. शराबबंदी से लेकर साइकिल योजना तक, हर बड़ी नीति में उनका असर दिखता है. ऐसे में चुनाव से ऐन पहले इस योजना पर शुरू हुई बहस केवल “योजना बनाम आचार संहिता” की नहीं, बल्कि “महिला मतदाता बनाम राजनीतिक हित” की जंग बन चुकी है.

राजद इस मुद्दे को “शासन द्वारा वोट बैंक पर असर डालने की कोशिश” बता रही है, जबकि जदयू इसे “महिलाओं की आर्थिक आज़ादी का विस्तार” कह रही है. चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर अब सबकी नजरें टिकी हैं — क्या वह इस योजना पर रोक लगाएगा, या इसे नियमित सरकारी प्रक्रिया मानेगा?

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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