Bihar Election 2025: विकास कुमार, भभुआ: जंगल-पहाड़ और सरहदों के बीच बसा कैमूर का चैनपुर विधान सभा क्षेत्र कभी नक्सलियों का आंगन बना था, लेकिन अब मंत्री पद के लिये सबसे भाग्यशाली सीट माना जा रहा है. इसलिये इस क्षेत्र में पार्टी के टिकट को लेकर भी कई दावेदार सामने आ जाते हैं. यह विधानसभा कभी नक्सलियों का गढ़ था. मावोवादियों के इस गढ़ में चुनाव कराना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती थी. कभी नक्सली आंगन में फूलने फलने वाले चैनपुर विधान सभा में अब लोक तंत्र की खुश्बू की महक मिलने लगी है.
मंत्री पद के लिए लक्की सीट बना चैनपुर विधानसभा
कैमूर का यह एकलौता विधान सभा क्षेत्र है, जहां से अलग अलग पाटियों के चार मंत्री बनाये गये. कैमूर जिले की चैनपुर विधानसभा सीट भौगोलिक और राजनीतिक दोनों लिहाज से बेहद खास है. क्योंकि चैनपुर विधानसभा उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है, इसके साथ ही अधौरा-चैनपुर प्रखंड के पहाड़ी इलाकों वाले वनवासियों के कई गांव और पहाड़ की तराई का मैदानी क्षेत्र आने से यहां की सामाजिक बनावट और चुनावी माहौल का ताना बाना हमेशा से थोड़ा अलग रहा है. वर्तमान में चैनपुर विधान सभा क्षेत्र से भाजपा से राजद में गये बृज किशोर बिद, बसपा से जदयू में गये मो. जमा खां, बसपा के धीरज सिंह तथा जनसुराज से हेमंत चौबे चुनाव मैदान में है.
कैमूर की चारों सीटों में चैनपुर विधानसभा भाग्यशाली
कैमूर जिले की चारों विधानसभा सीटों में चैनपुर सबसे भाग्यशाली माना जाता है. अब तक यहां से चार विधायक मंत्री पद तक पहुंच चुके हैं. जिसमें भाजपा के लाल मुनी चौबे, राजद के महाबली सिंह, भाजपा के बृज किशोर बिंद और बसपा से जदयू में गये मोहम्मद जमां खां नाम शामिल हैं. बीएचयू के छात्रसंघ के नेता लालमुनी चौबे पहली बार 1972 में जनसंघ पार्टी के भगवा ध्वज को लहरा कर विधायक बने थे. वे चार बार विधायक चुने गये और बिहार सरकार में मंत्री भी बने रहे. हालांकि चार बार इस विधान सभा से चुनाव जीतने वालों में काराकाट लोक सभा के पूर्व सांसद महाबली सिंह का भी नाम है. जो दो बार बहुजन समाज पार्टी और दो बार राजद के टिकट के पर चुनाव जीते थे और मंत्री बनाये गये.
लालू-राबडी की सरकार में जगदानंद सिंह बनें थे मंत्री
भाजपा के पूर्व विधायक बृज किशोर बिंद 2009, उप चुनाव 2010 तथा 2015 का चुनाव जीत कर तीकड़ी लगाये और इनको भी सरकार में मंत्री बनाया गया. मंत्री पद के लिये सबसे तेज छलांग लगाने वालों में चैनपुर विधान सभा से बसपा के विधायक बने मो. जमा खां का नाम आता है, जो अपने पहले उड़ान में जदयू में शामिल होकर मंत्री पद पा गये. हालांकि जिले से किसी एक विधायक को अधिक बार मंत्री बनने की गणना में रामगढ़ विधान सभा क्षेत्र के राजद नेता जगदानंद सिंह का नाम है. जो लालू प्रसाद और राबडी देवी की सरकार में 15 वर्षों तक लगातार मंत्री बने रहे.
चैनपुर विधान सभा में कोई भी एक दल नहीं बना सका दबदबा
चैनपुर विधान सभा में अब तक कोई भी एक दल अपना दबदबा नहीं बना सका है. कभी कांग्रेस ने मजबूती दिखाई, तो बाद में राजद और बसपा ने भी तीन-तीन बार जीत हासिल कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. यहां तक कि जनसंघ, भाजपा और जनता पार्टी भी इस सीट पर जीत का स्वाद चख चुकी हैं. यही कारण है कि आज भी सभी बड़ी पार्टियां चैनपुर को ‘लकी सीट’ मानकर अपने कब्जे में करने की कोशिश में जुटी रहती हैं. चैनपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल लगभग 3 लाख 28 हजार से अधिक मतदाता हैं. इनमें ओबीसी वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और दलित मतदाताओं के साथ साथ जीत हार में पहाड़ के मतदताओं की भूमिका निर्णायक भूमिका मानी जाती है. ब्राह्मण, राजपूत, राजभर, मुस्लिम, कुर्मी-कोइरी और बिंद जाति की जनसंख्या भी चुनावी संतुलन तय करने में अहम भूमिका निभाती है.
चैनपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
- 2020 का विधानसभा चुनाव परिणाम
| कुल मतदाताओं की संख्या | 303576 |
| कुल पोल वोट | 253712 |
| मत प्रतिशत | 67.85% |
| विजेता | मोहम्मद जमा खान |
| पार्टी | BSP |
| कुल प्राप्त मत | 95245 |
| मत प्रतिशत | 46.24% |
| उपविजेता | ब्रिजकिशोर बिंद |
| पार्टी | बीजेपी |
| कुल प्राप्त मत | 70951 |
| मत प्रतिशत | 34.45% |
| तीसरा स्थान | नीरज पांडेय |
| पार्टी | निर्दलीय |
| कुल प्राप्त मत | 13119 |
| मत प्रतिशत | 6.37% |
| चौथा स्थान | प्रकाश कुमार सिंह |
| पार्टी | कांग्रेस |
| कुल प्राप्त मत | 7231 (मत प्रतिशत – 3.51%) |
चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से अब तक निर्वाचित विधायकों की सूची
| वर्ष | निर्वाचित विधायक का नाम | पार्टी का नाम |
| 1952 | गुप्त नाथ सिंह | INC |
| 1967 | मंगल चरण सिंह | INC |
| 1969 | बद्री सिंह | प्रजा सोशलिस्ट पार्टी |
| 1972 | लाल मुनी चौबे | भारतीय जनसंघ |
| 1977 | लाल मुनी चौबे | जनता पार्टी |
| 1980 | लाल मुनी चौबे | BJP |
| 1985 | परवेज एहसान खान | INC |
| 1990 | लाल मुन्नी चौबे | BJP |
| 1995 | महाबली सिंह | बीएसपी |
| 2000 | महाबली सिंह | बीएसपी ( जीत के बाद राजद में शामिल हुए) |
| 2005(फरवरी) | महाबली सिंह | राजद |
| 2005(अक्तूबर) | महाबली सिंह | राजद |
| 2009 (उप चुनाव) | बृजकिशोर बिंद | बीजेपी |
| 2010 | ब्रिज किशोर बिंद | बीजेपी |
| 2015 | ब्रिज किशोर बिंद | बीजेपी |
| 2020 | मोहम्मद जमा खान | बीएसपी ( जीत के बाद जदयू में शामिल हुए) |
- चैनपुर विधानसभा से सबसे कम हार जीत का अंतर 2015 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला, जहां भाजपा के बृजकिशोर बिंद ने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद जमा खान को कड़े मुकाबले में मात्र 671 मतों से पराजित किया.
- चैनपुर विधानसभा में सबसे ज्यादा अंतर से हार जीत का आंकड़ा भी मोहम्मद जमा खान और बृजकिशोर बिंद के बीच ही देखने को मिला. 2020 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद जमा खान ने भाजपा के बृजकिशोर बिंद को 24294 मतों से पराजित किया था.
2000 से 2020 तक के चैनपुर विधानसभा का चुनाव परिणाम
| महाबली सिंह (बीएसपी) | 27077 |
| किशोर प्रसाद | 21975 |
| हार जीत का अंतर | 5102 |
| 2005 | फरवरी |
| महाबली सिंह (राजद) | 39988 |
| ब्रजकिशोर बिंद (बीएसपी) | 37762 |
| हार जीत का अंतर | 2226 |
| 2005 | अक्टूबर |
| महाबली सिंह (राजद) | 34655 |
| बृजकिशोर बिंद (बीजेपी) | 32739 |
| हार जीत का अंतर | 1916 |
| 2010 | अक्टूबर |
| ब्रजकिशोर बिंद (बीजेपी) | 46510 |
| डॉ.अजय आलोक (बीएसपी) | 32930 |
| हार जीत का अंतर | 13580 |
| 2015 | नवंबर |
| बृज किशोर बिंद (बीजेपी) | 58913 |
| मोहम्मद जमा खान (बीएसपी) | 58242 |
| हरजीत का अंतर | 671 |
| 2020 | नवंबर |
| मोहम्मद जमा खान (बीएसपी) | 95245 |
| बृज किशोर बिंद (बीजेपी) | 70951 |
| हर जीत का अंतर | 24294 |

