Digital Creators of Bihar: रील का सही इस्तेमाल कोई इनसे सीखे, 60 सेकंड में ‘कैरियर गाइड’ बन बदल रहे लाखों छात्रों की तकदीर
Published by : हिमांशु देव Updated At : 09 Jun 2026 10:53 AM
Digital Creators of Bihar: राज्य में सोशल मीडिया अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा का बड़ा जरिया बन चुका है. पटना में रह रहे पांच प्रमुख क्रिएटर इंस्टाग्राम रील्स व यूट्यूब शॉर्ट्स के जरिए 60 सेकंड में सरकारी नौकरी, रिजल्ट और स्कॉलरशिप की सटीक जानकारी देकर लाखों छात्रों की तकदीर बदल रहे हैं.
Digital Creators of Bihar: आज का दौर डिजिटल क्रांति का है, जहां सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य को संवारने का एक बड़ा जरिया बन चुका है. बिहार के डिजिटल क्रिएटर्स इस बदलाव के सबसे बड़े सारथी बनकर उभरे हैं. वे इंस्टाग्राम रील्स व यूट्यूब शॉर्ट्स के माध्यम से लाखों छात्र-छात्राओं तक शिक्षा, सरकारी नौकरी, स्कॉलरशिप, एडमिट कार्ड, रिजल्ट आदि से जुड़ी सटीक जानकारियां पहुंचा रहे हैं. प्रामाणिक वेबसाइटों के साथ-साथ प्रभात खबर सहित अन्य अखबारों की खबरों पर रिसर्च कर तैयार की जाने वाली इनकी 60 सेकंड की रील्स आज गांव-गांव के युवाओं के लिए ‘कैरियरगाइड’ साबित हो रही हैं. पेश है ऐसे डिजिटल सारथी पर कवर स्टोरी..
20 लाख से अधिक युवाओं को अजीत दे रहे रोजगार की चाबी
शिवहर जिले के अटकोनी गांव से निकले अजीत कुमार आज राज्य के लाखों छात्र-छात्राओं के लिए कैरियर गाइड बन चुके हैं. बीसीए की पढ़ाई करने वाले अजीत ने साल 2019 में जब सोशल मीडिया पर शिक्षा और नौकरी से जुड़ी जानकारियां साझा करना शुरू किया था, तब मकसद सिर्फ एक था ‘गांव के बच्चों का फॉर्म जानकारी के अभाव में न छूटे’. अपनी इसी जिद के दम पर आज वे यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे तमाम प्लेटफॉर्म्स पर 20 लाख यानी 2 मिलियन से अधिक युवाओं का भरोसा जीत चुके हैं.
अजीत की रील्स की सबसे बड़ीयूएसपी है खबरों की विश्वसनीयता. वे बताते हैं कि 60 सेकंड के शॉर्ट्स के लिए वे प्रामाणिक वेबसाइटों के साथ-साथ हर सुबह प्रभात खबर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों की खबरों को खंगालते हैं. खबरों को आसान भाषा में ढालकर वे ऐसी रील बनाते हैं, जिसे देखकर हाल ही में बिहार के रोजगार मेले में हजारों छात्र पहुंचे और उन्हें नौकरियां मिलीं. कई छात्रों को स्कॉलरशिप और सही समय पर एडमिशन दिलाने में उनकी रील्स मददगार बनी हैं. सोशल मीडिया को सिर्फ मनोरंजन का साधन मानने वाले युवाओं को अजीत सलाह देते हैं कि इसका इस्तेमाल सीखने और करियर बनाने के लिए करें. आज अजीत न सिर्फ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर गांव में अपना पक्का घर बना चुके हैं, बल्कि डिजिटल साक्षरता की एक नई इबारत भी लिख रहे हैं.
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यूट्यूब चैनल डिलीट हुआ, तो इंस्टाग्राम पर राज गौरव बने 5 लाख युवाओं के बने सारथी
भागलपुर जिले के जमालपुर के रहने वाले राज गौरव सिंह आज कई छात्र-छात्राओं के लिए डिजिटल सारथी बन चुके हैं. वर्ष 2024 में एमसीए की डिग्री लेने वाले राज गौरव की डिजिटल यात्रा चुनौतियों से भरी रही है. साल 2015 में उन्होंने यूट्यूब से शुरुआत की थी, लेकिन कड़ी मेहनत के बाद उनका चैनल डिलीट हो गया. इस बड़े झटके के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और सरकारी इन्फॉर्मेशन नाम से नए सफर की शुरुआत की. आज सिर्फ इंस्टाग्राम पर ही उनके 5 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं.
राज गौरव बताते हैं कि जब वे खुद छात्र थे, तब उन्होंने देखा कि सही समय पर सटीक जानकारी न मिलने के कारण कई प्रतिभावान युवाओं के फॉर्म छूट जाते थे. इसी कमी को दूर करने के लिए उन्होंने प्रामाणिक सरकारी वेबसाइटों, प्रेस रिलीज व विश्वसनीय अखबारों की खबरों पर रिसर्च कर 60 सेकंड की रील्स बनाना शुरू किया. उनकी आसान भाषा के कारण हजारों छात्रों के फॉर्म छूटने से बचे हैं और कइयों को नौकरियां मिली हैं. वे कहते हैं कि माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान और छात्रों का भरोसा ही आज उनकी सबसे बड़ी पूंजी है.
Instagram: @sarkariinformation
‘जिला दर्शन’ सीरीज से बीपीएससी की राह आसान बना रहे जसवंत
बीपीएससी जैसी प्रतिष्ठित व कठिन परीक्षाओं में से एक की तैयारी अब सिर्फ मोटी किताबों और महंगी कोचिंग तक सीमित नहीं रही. पिछले 6 वर्षों से ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम से बीपीएससी के अभ्यर्थियों को तराश रहे शिक्षक जसवंत कुमार ने सोशल मीडिया के भटकाव को ही पढ़ाई का सबसे बड़ा हथियार बना दिया है. वे रील्स व शॉर्ट्स के माध्यम से प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मेंटर बनकर उभरे हैं.
जसवंत बताते हैं कि बीपीएससी का पाठ्यक्रम बेहद विस्तृत है, जिसके लिए फाउंडेशन तो जरूरी है ही, लेकिन 60 सेकंड की रील्स के जरिए करंट अफेयर्स व महत्वपूर्ण फैक्ट्स को छात्रों के दिमाग में बिठाना काफी आसान हो जाता है. इसके लिए उन्होंने रील्स पर ‘जिलादर्शन’ सीरीज शुरू की है, जिसमें मात्र 2 मिनट के भीतर बिहार के किसी भी जिले का पूरा इतिहास, भूगोल व महत्वपूर्ण बदलाव छात्रों के सामने आ जाते हैं. यह आर्थिक रूप से कमजोर व दूर-दराज के गांवों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के लिए वरदान साबित हो रही है, जो बिना किसी महंगे सब्सक्रिप्शन या फीस के सीधे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पा रहे हैं. शिक्षक जसवंत युवाओं से कहते हैं कि वे केवल काम के और प्रामाणिक डिजिटल चैनलों को ही फॉलो करें, ताकि रील देखने का उनका समय बर्बाद होने के बजाय सफलता का जरिया बन सके.
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गांव के लाल की डिजिटल पाठशाला से जुड़े हैं 12 लाख छात्र
गोपालगंज जिले के कहला बरौली से निकले उमेश पंडित स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद साल 2015 में सोशल मीडिया पर कदम रखा था. अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने महसूस किया कि ग्रामीण इलाकों के छात्र अक्सर सही जानकारी के अभाव में सरकारी नौकरी और स्कॉलरशिप जैसे बड़े अवसरों से चूक जाते हैं. इसी कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने मोबाइल को ही शिक्षा का हथियार बनाया.
आज उमेश यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर 12 लाख से अधिक युवाओं का भरोसा जीत चुके हैं. वे बताते हैं कि 60 सेकंड की एक रील के पीछे घंटों की रिसर्च होती है ताकि छात्रों को सरल भाषा में सटीक जानकारी मिल सके. उमेश की सबसे बड़ी उपलब्धि वह पल है, जब किसी छात्र का मैसेज आता है कि उनके वीडियो की वजह से किसी का फॉर्म छूटने से बच गया या उसे नौकरी मिल गई. उनका सपना एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना है जहां हर छात्र को सरकारी योजनाओं और शिक्षा से जुड़ी हर जानकारी एक ही जगह मिल सके.
Instagram: @umesh_talks2
राहुल राज बने 13 लाख छात्रों के कैरियर गाइड
सीतामढ़ी जिले के राहुल राज आज बिहार के लाखों छात्र-छात्राओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुके हैं. ऑनलाइन अपडेट एसटीएम के जरिए राहुल राज शिक्षा व रोजगार की जानकारियों को घर-घर पहुंचा रहे हैं. वर्ष 2019 में जब उन्होंने इस सफर की शुरुआत की थी, तब उनका एकमात्र उद्देश्य छात्रों को उस भटकाव से बचाना था जिसका सामना उन्होंने खुद अपने छात्र जीवन में किया था. सही और समय पर जानकारी न मिल पाने की पीड़ा को राहुल ने समझा और इसे ही अपना मिशन बना लिया.
आज यूट्यूब पर 13 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स व इंस्टाग्राम पर करीब 1.60 लाख फॉलोअर्स राहुल के भरोसे का प्रमाण हैं. वे केवल फॉर्म भरने का तरीका ही नहीं बताते, बल्कि सरकारी नौकरी के नोटिफिकेशन, सिलेबस और तैयारी की रणनीति भी साझा करते हैं. वे कहते हैं कि हजारों छात्रों के कमेंट्स ‘आपकी रील देखकर आज मैं सरकारी नौकरी में हूं.., उनके लिए सबसे बड़ी कमाई है.
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लेखक के बारे में
By हिमांशु देव
सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.
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