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अंग्रेजी सीखने में बिहार की बेटियां आगे, सीवान में सभी वर्गों की लड़कियां प्रशिक्षण लेने में अव्वल

संसाधन विभाग की ओर से कुशल युवा कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसमें राज्य भर की लड़कियां अंग्रेजी व कंप्यूटर का प्रशिक्षण लेने में लड़कों से बेहतर है. विभाग की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य वर्ग की लड़कियों को देखें, तो 18 जिलों में लड़कों से अधिक लड़कियों ने प्रशिक्षण हासिल किया है.

By Prabhat Khabar Digital Desk
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बेटियां
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फाइल

पटना. राज्य सरकार लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है. लड़की स्कूल तक पहुंचे, इसके लिए मुख्यमंत्री साइकिल योजना भी चलायी जा रही है. वहीं,श्रम संसाधन विभाग की ओर से कुशल युवा कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसमें राज्य भर की लड़कियां अंग्रेजी व कंप्यूटर का प्रशिक्षण लेने में लड़कों से बेहतर है. विभाग की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य वर्ग की लड़कियों को देखें, तो 18 जिलों में लड़कों से अधिक लड़कियों ने प्रशिक्षण हासिल किया है.

11 जिलों में लड़के आगे

वहीं, पिछड़ा, अति पिछड़ा, एससी एवं एसटी समुदाय में भी लड़कियां प्रशिक्षण लेने में नौ जिलों में लड़कों से आगे हैं. साथ ही 11 जिलों में लड़के आगे हैं. वहीं, सीवान ऐसा जिला है, जहां हर समुदाय की लड़कियां प्रशिक्षण लेने में लड़कों से आगे हैं. इस योजना के तहत अब तक 10 लाख युवाओं ने प्रशिक्षण लिया है.

पिछड़ा वर्ग में भी लड़कियां दे रही हैं लड़कों को टक्कर

विभाग के मुताबिक, जहां पिछड़ा समुदाय में रोहतास में लड़कों ने 14,129 लड़कों ने प्रशिक्षण लिया, तो लड़कियों की संख्या 14,171 है. इसी तरह सीवान में लड़कों की संख्या 14,306 है और लड़कियों की संख्या 16, 861 है. अति पिछड़ा वर्ग में औरंगाबाद में 4033 लड़के और 4054 लड़कियों ने प्रशिक्षण लिया. गया में 5307 लड़कों की तुलना में 5339 लड़कियां, किशनगंज में 875 लड़कों की तुलना में 1168 लड़कियां और नवादा में 4188 लड़कों की तुलना में 4192 लड़कियों ने प्रशिक्षण लिया. एससी श्रेणी में सीवान में 3082 की तुलना में 2971 लड़कियों ने प्रशिक्षण हासिल किया, जबकि एसटी समुदाय में पश्चिम चंपारण में 1897 लड़कों की तुलना में 2878 लड़कियां और सीवान में 1407 की तुलना में 1840 लड़कियों ने प्रशिक्षण हासिल किया.

सामान्य श्रेणी में सबसे अधिक लड़कियां

विभाग के मुताबिक, सामान्य श्रेणी में सबसे अधिक लड़कियां अंग्रेजी व संवाद कौशल का प्रशिक्षण ले रही हैं. अररिया में 981 लड़के और 1138 लड़कियां, औरंगाबाद में 3151 लड़के और 3564 लड़कियां, बेगूसराय में 1042 लड़के और 1602 लड़कियां, बक्सर में 4053 लड़कों की तुलना में 4959 लड़कियां, गया में 3268 लड़कों की तुलना में 4146 लड़कियां, गोपालगंज में 3202 लड़कों की तुलना में 4872 लड़कियां, जहानाबाद में 1247 लड़कों की तुलना में 1559 लड़कियां, कैमूर में 1820 लड़कों की तुलना में 2451 लड़कियां और किशनगंज में 2063 लड़कों की तुलना में 3058 लड़कियों ने प्रशिक्षण लिया है.

लखीसराय में 1547 लड़कों की तुलना में 2355 लड़कियां आगे

वहीं लखीसराय में 1547 लड़कों की तुलना में 2355 लड़कियां, मुजफ्फरपुर में 5718 लड़कों की तुलना में 6098 लड़कियां, नालंदा में 2852 लड़कों की तुलना में 3557 लड़कियां, नवादा में 2765 लड़कों की तुलना में 3791 लड़कियां, पूर्वी चंपारण में 6497 लड़कों की तुलना में 6945 लड़कियां, रोहतास में 4255 लड़कों की तुलना में 4713 लड़कियां, समस्तीपुर में 5847 लड़कों की तुलना में 6471 लड़कियां, सारण में 8230 लड़कों की तुलना में 10,478 लड़कियां, शेखपुरा में 2121 लड़कों की तुलना में 2649 लड़कियां, सीतामढ़ी में 3664 लड़कों की तुलना में 4394 लड़कियां, सीवान में 4487 लड़कों की तुलना में 7361 लड़कियां, वैशाली में 4074 लड़कों की तुलना में 4221 लड़कियां और अरवल में 717 लड़कों की तुलना में 787 लड़कियों ने प्रशिक्षण हासिल किया.

ऐसे हो रहा कौशल प्रशिक्षण

कुशल युवा कार्यक्रम 240 घंटे का होता है. इसमें हिंदी, अंग्रेजी और संवाद कौशल का 80 घंटे, बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान का 120 घंटे और व्यवहार कौशल का 40 घंटे का प्रशिक्षण होता है.

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