Bihar Bhumi: पुश्तैनी जमीन की खरीद-फरोख्त में अब जमाबंदी जरूरी नहीं, नियम हटने से म्यूटेशन भी आसानी से होगा

Published by :Paritosh Shahi
Updated at :25 Nov 2025 5:48 PM
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Bihar-Bhumi

सांकेतिक फोटो

Bihar Bhumi: सुप्रीम कोर्ट ने जमीन रजिस्ट्री में विक्रेता के नाम पर जमाबंदी या होल्डिंग नंबर की अनिवार्यता खत्म कर दी है. इस फैसले से रजिस्ट्री प्रक्रिया आसान हो गयी है और रजिस्ट्रेशन अधिकारी अब केवल जमाबंदी के अभाव में रजिस्ट्री को खारिज नहीं कर सकेंगे. इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.

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Bihar Bhumi: सुप्रीम कोर्ट ने जमीन की रजिस्ट्री में विक्रेता के नाम से जमाबंदी नियमावली पर पटना हाइकोर्ट के आदेश को पिछले दिनों खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस नये आदेश के बाद अब जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए विक्रेता के नाम पर जमाबंदी या होल्डिंग नंबर की बाध्यता समाप्त हो गयी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंजीकरण अधिकारी को विक्रेता से स्वामित्व का प्रमाण मांगने का कोई अधिकार नहीं है, जिससे पूरी प्रक्रिया सरल और तेज हो गयी है. इस फैसले से पंजीकरण अधिकारी केवल जमाबंदी के अभाव में पंजीकरण को खारिज नहीं कर सकते, जिससे मनमानी और संभावित धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा.

पहली बार 10 अक्टूबर 2019 को लागू हुआ था नियम

जमीन रजिस्ट्री में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए राज्य सरकार ने पहली बार 10 अक्टूबर 2019 को नियम लागू किया था. तब इसके खिलाफ कई याचिकाएं हाइकोर्ट में दायर की गयी थीं. कोर्ट ने 15 दिनों के भीतर ही 25 अक्टूबर को सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है. तब से चल रही मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने नौ फरवरी 2024 को सरकार के फैसले को सही करार देते हुए इसे लागू करने का आदेश दिया.

इसके बाद सरकार ने 22 फरवरी 2024 को पत्र जारी कर जमीन बिक्री में जमाबंदी को लागू किया. सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संपत्ति के लेन-देन को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ी राहत दी है. कोर्ट का यह फैसला संपत्ति के लेन-देन को सरल बनाता है, खासकर उन मामलों में जहां म्यूटेशन की प्रक्रिया पुराने सर्वेक्षणों या प्रशासनिक देरी के कारण अटकी हुई थी.

कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए विक्रेता के नाम पर जमाबंदी या होल्डिंग नंबर का होना अब अनिवार्य नहीं है. यह निर्णय लाखों लोगों को प्रभावित करेगा, खासकर उन्हें जिनकी संपत्ति का म्यूटेशन पुराने रिकॉर्ड या लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते लंबित था.

वैशाली में 15 लाख जमाबंदी पंजी हुई थी वितरित

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाइकोर्ट के उस पूर्व के फैसले को पलट दिया है, जिसने जमाबंदी को रजिस्ट्री के लिए आवश्यक शर्त बना दिया था. मालूम हो कि वैशाली जिला 15 लाख से अधिक जमाबंदी के साथ बिहार में शीर्ष जिलों में से एक रहा है, जिसने डिजिटलीकरण और ऑनलाइन जमाबंदी के मामले में पटना को भी पीछे छोड़ दिया था. राजस्व महा-अभियान के तहत वैशाली में 15 लाख 4 हजार 383 जमाबंदी पंजी वितरित की गयी है.

रैयत से लेकर प्राॅपर्टी डीलर सभी खुश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रैयत से लेकर प्राॅपर्टी डीलर काफी खुश हैं. हाइकोर्ट द्वारा बिहार सरकार के जमाबंदी कानून को वैध बताते हुए इस लागू करने के आदेश जारी होने पर कई महीनों तक जमीन की रजिस्ट्री महीनों तक नहीं हुई थी. सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जैसे ही रास्ता साफ हुआ लोग रजिस्ट्री कराने में जुट गये थे.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तिथि से पूर्व रैयतों व प्रॉपर्टी डीलर से धड़ल्ले से जमीन खरीद-बिक्री की गयी थी. एक महीने तक रजिस्ट्री कार्यालय में रात 8 से 10 बजे तक पदाधिकारी और कर्मी काम करते दिखे थे. इस संबंध में जिला अवर निबंधक पदाधिकारी धनंजय कुमार राव ने बताया कि रजिस्ट्री के समय खरीद-बिक्री करने वाले लोगों के आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज की जांच की जा रही है. जमाबंदी नियम को लेकर माननीय न्यायालय व विभागीय आदेश के आलोक में रजिस्ट्री की प्रक्रिया होती है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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