बिहार में अब भिखारियों को भी मिलेगा रोजगार, समाज कल्याण विभाग में दी जाएगी नौकरी

बिहार में मुख्यमंत्री भिक्षा वृति निवारण योजना के तहत भिखारियों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है. अब तक 207 भिखारियों को स्वरोजगार से जोड़ा गया है. जिन्हें रोजगार के लिए 10 हजार रुपये की सहायता राशि भी दी गयी है.
पटना. राज्यभर में मुख्यमंत्री भिक्षावृति निवारण योजना के तहत भिखारियों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है. अब तक 207 भिखारियों को स्वरोजगार से जोड़ा गया है. जिन्हें रोजगार के लिए 10 हजार रुपये की सहायता राशि भी दी गयी है. जिससे इन लोगों ने भीख मांगना छोड़कर सब्जी, अंडा सहित अन्य तरह का दुकान चला रहे है. लेकिन इनमें से कुछ ऐसी भिखारी भी है. जो स्वरोजगार नहीं नौकरी करना चाहते है. वैसे लोगों को एजेंसी के माध्यम से सरकारी दफ्तरों में सफाई कर्मी सहित अन्य कामों पर रखा जा रहा है.
राज्य में रेस्क्यू के बाद बहुत से भिखारियों ने नौकरी करने की इच्छा जाहिर की थी. जिसके बाद इनमें से 12 को एजेंसी के माध्यम से समाज कल्याण विभाग में रखा गया है. इनके लिए समाज कल्याण विभाग ने सभी विभागों को भी आग्रह किया है कि इन सभी को अपने-अपने विभाग में काम करने का मौका दें.
जिलों में भिखारियों का एक ग्रुप तैयार किया जा रहा है. जिसके अंतर्गत सभी भिखारियों का कल्याण हो सकें. उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी नहीं हो. इन सभी ग्रुप से जुड़े लोगों का आधार, पैन, बैंक अकाउंट बनाया जा रहा है. अबतक कुछ 14 हजार से अधिक भिखारियों का आधार बनाया गया है और इनका बैंक अकाउंट भी खोला गया है.
सभी डीएम अपने जिलों में भिक्षावृति निवारण योजना का प्रचार-प्रसार करेंगे. वहीं, इसमें छोटे बच्चों की भागीदारी पर पूर्ण अंकुश लगाया जायेगा. विभाग के स्तर पर योजना के लिए बने गाइडलाइन का पालन अधिकारियों को करना होगा. साथ ही, भिखारियों को नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भी भीख मांगना छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे.
राज्यभर में मुख्यमंत्री भिक्षावृति निवारण योजना के तहत भिखारियों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है. अबतक 207 भिखारियों को स्वरोजगार से जोड़ा गया है. जिन्हें रोजगार के लिए 10 हजार रुपये की सहायता राशि भी दी गयी है. जिससे इन लोगों ने भीख मांगना छोड़कर सब्जी, अंडा सहित अन्य तरह का दुकान चला रहे है. लेकिन इनमें से कुछ ऐसी भिखारी भी है. जो स्वरोजगार नहीं नौकरी करना चाहते है. वैसे लोगों को एजेंसी के माध्यम से सरकारी दफ्तारों में सफाई कर्मी सहित अन्य कामों पर रखा जा रहा है.
राज्य में रेस्क्यू के बाद बहुत से भिखारियों ने नौकरी करने की इच्छा जाहिर की थी. जिसके बाद इनमें से 12 को एजेंसी के माध्यम से समाज कल्याण विभाग में रखा गया है. इनके लिए समाज कल्याण विभाग ने सभी विभागों को भी आग्रह किया है कि इन सभी को अपने-अपने विभाग में काम करने का मौका दें.
जिलों में भिखारियों का एक ग्रुप तैयार किया जा रहा है.जिसके अंतर्गत सभी भिखारियों का कल्याण हो सकें. उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी नहीं हो. इन सभी ग्रुप से जुड़े लोगों का आधार, पैन, बैंक अकाउंट बनाया जा रहा है. अबतक कुछ 14 हजार से अधिक भिखारियों का आधार बनाया गया है और इनका बैंक अकाउंट भी खोला गया है.
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सभी डीएम अपने जिलों में भिक्षावृति निवारण योजना का प्रचार-प्रसार करेंगे. वहीं, इसमें छोटे बच्चों की भागीदारी पर पूर्ण अंकुश लगाया जायेगा. विभाग के स्तर पर योजना के लिए बने गाइडलाइन का पालन अधिकारियों को करना होगा. साथ ही, भिखारियों को नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भी भीख मांगना छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे.
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