चुनाव पेज के लिए, हर साल राज्य का 27% इलाका बाढ़ का करता है सामना

Published at :13 Apr 2024 1:02 PM (IST)
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चुनाव पेज के लिए, हर साल राज्य का 27% इलाका बाढ़ का करता है सामना

हर साल राज्य का 27% इलाका बाढ़ का करता है सामना

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चुनावी मुद्दा, बिहार के कुल 94 हजार किलोमीटर एरिया में 26 हजार किमी बाढ़ प्रभावित – बाढ़ का 75% क्षेत्र उत्तरी बिहार में, सैलाब से उजड़ जाते हैं सैकड़ों गांव-घर मनोज कुमार, पटनाबिहार में बाढ़ बड़ी त्रासदी है. ये बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ देती है. मनुष्य से लेकर जानवरों और खेती को बर्बाद कर देती है. सियासी पार्टियों व सरकारों ने इस पर बड़े-बड़े दावे और वादे किये. हर चुनाव में इसकी गूंज सुनायी गयी. मगर, बाढ़ से निजात की अब तक मुकम्मल इंतजाम नहीं हो पाये. अभी स्थिति ये है कि राज्य का लगभग 27 फीसदी हिस्सा हर साल बाढ़ का सामना कर रहा है. इससे पांच जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं. बाढ़ के कारण धान की खेती बड़े पैमाने पर प्रभावित होती है. 804 किलोमीटर के दायरे में अति तीव्र गति से बाढ़ आती है. इस सैलाब में गांव-गांव के उजड़ जाते हैं. आइसीएआर की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में कुल 94 हजार 163 स्कवायर किलोमीटर एरिया है. इसमें 26 हजार 73 स्कवायर किलोमीटर क्षेत्र में बाढ़ आती है. दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण और खगड़िया सर्वाधिक बाढ़ग्रस्त इलाके हैं. राज्य का लगभग 27.5 फीसदी इलाका बाढ़ से प्रभावित होता है. बाढ़ का 75 फीसदी इलाका उत्तरी बिहार में है. 525 किलोमीटर क्षेत्र में हर साल आती है बाढ़ 525 स्कवायर किलोमीटर क्षेत्र में हर साल बाढ़ आती है. इस एरिया में अति तीव्र गति से बाढ़ आती है. 804 किलोमीटर क्षेत्र में तीव्र, 2461 में मध्यम तीव्र, 5738 में निम्न तीव्र तथा 16544 स्कवायर किलोमीटर क्षेत्र में अति निम्न तीव्रता की बाढ़ आती है. अति तीव्र और तीव्र गति वाले एरिया में बाढ़ की गहराई 1.50 मीटर से अधिक होती है. अति तीव्रता के कारण इन क्षेत्रों में धान की खेती न के बराबर होती है. 2461 किलोमीटर में धान की खेती बर्बाद करती है बाढ़ बिहार में 2461 स्कवायर किलोमीटर क्षेत्र मध्यम गति के बाढ़ जोन में है. इस इलाके में 14 से 53 फीसदी धान की खेती बर्बाद हो जाती है. निम्न तीव्र के 5738 तथा अति निम्न के 16544 स्कवायर किलोमीटर वाले बाढ़ क्षेत्र में चिंताजनक स्थिति नहीं होती है. इन दोनों एरिया में धान की खेती को नुकसान नहीं होता है.

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