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पटना के प्रतिष्ठित स्कूल के हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में

Updated at : 17 Apr 2016 3:56 PM (IST)
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पटना के प्रतिष्ठित स्कूल के हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में

पटना : पटना के एक प्रतिष्ठित स्कूल में गत वर्ष एक छात्रा को लेकर उत्पन्न हुए विवाद के कारण सीबीएसइ के उस विद्यालय को अपनी ओर से अभी तक फिर से मान्यता नहीं दिये जाने के कारण वहां पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है. केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेंद्र […]

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पटना : पटना के एक प्रतिष्ठित स्कूल में गत वर्ष एक छात्रा को लेकर उत्पन्न हुए विवाद के कारण सीबीएसइ के उस विद्यालय को अपनी ओर से अभी तक फिर से मान्यता नहीं दिये जाने के कारण वहां पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है. केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा से पटना के बीएसईबी कालोनी स्थित उक्त डीएवी स्कूल की मान्यता को सीबीएसइ द्वारा पुनर्स्थापित किये जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे इस मामले को कल स्वयं देखेंगे तथा वहां के छात्र-छात्राओं के हितों को ध्यान में रखकर आवश्यक निर्देश देंगे.

विवादों में रहा है स्कूल

उल्लेखनीय है कि सीबीएसइ ने पिछले साल बीएसईबी कॉलोनी स्थित डीएवी स्कूल की एक छात्रा को लेकर उत्पन्न हुए विवाद की जांच की थी. जिसके बाद सीबीएसइ ने डीएवी स्कूल प्रशासन को नौवीं और दसवीं के छात्र-छात्राओं को निबंधन, जो कि उन्हें बोर्ड और 12वीं की परीक्षा में प्रवेश के लिए पात्रता प्रदान करता, नहीं देने का निर्देश दिया था. बीएसईबी कॉलोनी स्थित डीएवी स्कूल के प्राचार्य वी. एस. ओझा ने बताया कि यह उनके स्कूल के छात्र-छात्राओं, जो कि उनसे अपने भविष्य के बारे में पूछते हैं, के लिए सही मायनों में दुखद स्थिति है.

स्कूल से लापता हुई थी छात्रा

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 28 फरवरी को बीएसईबी कॉलोनी स्थित डीएवी स्कूल की एक छात्रा अचानक लापता हो गयी और वह तीन सप्ताह के बाद 19 मार्च 2015 को सामने आयी और पुलिस को पूछताछ के दौरान बताया कि उसे जान बूझकर 11वीं की परीक्षा में फेल कर दिया गया था. आश्चर्य की बात है कि उक्त छात्रा के स्कूल प्रशासन ने उसकी 12वीं परीक्षा का प्रवेश पत्र प्राप्त कर लिया था और उसके घर वालों को छात्रा के लापता रहने के दौरान सुपुर्द कर दिया था. छात्रा के लापता रहने के दौरान उसके साथ कथित तौर पर दो युवाओं ने सामूहिक दुष्कर्म किया था.

तीन शिक्षक हुए थे गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने उक्त स्कूल के तीन शिक्षकों को गिरफ्तार किया था और डीएवी प्रशासन ने उस स्कूल के तत्कालीन प्रार्चाय रामानुज प्रसाद को भी निलंबित कर दिया था. रामानुज, जो कि इस घटना के बाद भूमिगत हो गये थे, ने बाद में स्थानीय अदालत से इस मामले में जमानत हासिल कर ली थी. इस घटना के बाद सीबीएसइ बोर्ड ने उक्त विद्यालय को पूर्व से जारी संबद्धता को 19 मई 2015 को रद्द कर दिया था.

हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य का प्रश्न

ओझा ने बताया कि सीबीएसइ ने स्कूल प्रशासन से 8वीं की कक्षा के छात्रों को, जोकि वर्तमान वित्तीय वर्ष में नवीं की कक्षा में प्रवेश पाने के साथ वर्ष 2018 में दसवीं बोर्ड की परीक्षा के वास्ते पात्र हो सकें को निबंधित नहीं किये जाने का निर्देश देते हुए छह कर्मियों को लेकर जानकारी उपलब्ध कराने को कहा था, जिसे गत जनवरी में आयी सीबीएसइ की दो सदस्यीय टीम को उसे उपलब्ध कराते हुए उनसे निबंधन बहाल किये जाने का आग्रह किया गया था. उन्होंने बताया कि दो बार याद दिलाए जाने के बाद सीबीएसइ द्वारा उसी तरह की कुछ अन्य जानकारी फिर से उपलब्ध कराये जाने की गत 9 अप्रैल को मांग कर दी है, जोकि चिंता का विषय है.

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