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टॉपर्स बोले, ऐसा क्यों, पैटर्न एनसीइआरटी का, बुक्स बिहार टेक्स्ट का

Updated at : 04 Dec 2015 12:26 PM (IST)
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टॉपर्स  बोले, ऐसा क्यों, पैटर्न एनसीइआरटी का, बुक्स बिहार टेक्स्ट का

पटना : सीबीएसइ के पैटर्न को फॉलो कर रही बिहार बोर्ड के स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक्स नहीं, बल्कि बिहार टेक्स्ट पब्लिकेशन की बुक चलती है. बिहार बोर्ड द्वारा आयोजित मैट्रिक और इंटरमीडिएट के टॉपर्स के सम्मान समारोह में टॉपर ने कहा कि शिक्षा में सुधार तभी होगा जब किताबों को चेंज किया जायेगा. जब […]

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पटना : सीबीएसइ के पैटर्न को फॉलो कर रही बिहार बोर्ड के स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक्स नहीं, बल्कि बिहार टेक्स्ट पब्लिकेशन की बुक चलती है. बिहार बोर्ड द्वारा आयोजित मैट्रिक और इंटरमीडिएट के टॉपर्स के सम्मान समारोह में टॉपर ने कहा कि शिक्षा में सुधार तभी होगा जब किताबों को चेंज किया जायेगा. जब 9वीं और 10वीं में एनसीइआरटी के पैटर्न को बिहार बोर्ड में लागू किया गया है, तो फिर बिहार टेक्स्ट बुक के किताबें कोर्स में क्यों चलायी जा रही है. बिहार टेक्स्ट बुक के किताबों में काफी गलती है. 2005 के बाद किताबों को नयी प्रिंट भी नहीं किया गया है. हमें पुराने किताबों से ही काम चलाना पड़ता है.

प्रभात खबर से बातचीत के दौरान मैट्रिक के टॉपर जहां किताबों में परिवर्तन और इंगलिश को कंपलशरी करने की बातों पर जोर दिया, वहीं इंटरमीडिएट के टॉपर्स ने कहा कि परीक्षा में क्वेशचन का पैटर्न बहुत ही कमजोर होता है. इसमें सुधार होना चाहिए. टॉपर से बातचीत के मुख्य अंश…

किताबों में बदलाव हो (नीरज रंजन, फर्स्ट टॉपर, मैट्रिक)

हमने एक साल तक गलत किताबों से पढ़ाई की है. बिहार टेक्स्ट बुक की किताबाें में काफी गलती है. इसे सही किया जाना चाहिए. बिहार टेक्स्ट बुक से पढ़ाई करें, तो हम मैट्रिक में पास भी नहीं हो पायेंगे. कई स्तर पर किताबों में गलतियां हैं, लेकिन यह कई सालों से चलती आ रही हैं.

इंगलिश में हों किताबें (कुणाल जिज्ञासू, फर्स्ट टॉपर, मैट्रिक)
बिहार टेक्स्ट बुक के हर विषयों की किताब हिंदी में होती है. ऐसे में हम केवल हिंदी में ही कोर्स पढ़ पाते हैं. हमें
इंगलिश में पढ़ने के लिए एनसीइआरटी की बुक की मदद लेनी होती है. मार्केट में बिहार टेक्स्ट बुक की किताबों इंगलिश में मौजूद नहीं होने से दिक्कतें होती हैं.

टीचर्स की बहुत है कमी (अभिनव कुमार, सेकेंड टॉपर, मैट्रिक)
स्कूल की पढ़ाई से लेकर बाहर तक में टीचर्स की काफी कमी है. ऐसे में स्कूलों में टीचर्स की संख्या बढ़ायी जाये. क्योंकि पहले हमें टीचर्स की जरूरत होती है. टीचर्स की गाइड मिलने पर ही हम सेल्फ स्टडी करते हैं. टीचर्स की कमी स्कूल स्तर पर होने से सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है.

एनसीइआरटी बुक ही चले (मुकुल रंजन, सेकेंड टॉपर, मैट्रिक)
जब एनसीइआटी के पैटर्न पर 9वीं और 10वीं का कोर्स चलता है, तो फिर स्कूलों में इसकी बुक क्यों नहीं चलायी जाती है. ऐसे में हमें इंटरमीडिएट लेवल पर बहुत ही प्राब्लम होता है. अचानक से इंगलिश में एनसीइआरटी पढ़ने से हमें समझ में ही नहीं आता है.

रेगूलर नहीं होता है क्लास (विवेश वैभव, थर्ड टॉपर, मैट्रिक)
स्कूल की पढ़ाई पर जोर देना चाहिए. एक तो स्कूल में टीचर्स की कमी है, वहीं स्कूल में रेगूलर क्लासेज नहीं होती हैं. इससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ता है. परीक्षा का समय आ जाता है और हमारे कोर्स पूरे नहीं होते हैं. इस कारण इन कमियों को स्कूल लेवल पर सही करने की जरूरत है.

क्वेश्चन का पैटर्न चेंज हो (विकास कुमार सिंह, सेकेंड टॉपर, इंटर साइंस)
इंटर लेवल पर जो परीक्षा होती है, उसका प्रश्नों का स्तर बहुत ही कमजोर होता है. सीबीएसइ की बात करें तो
प्रश्न काफी स्टैंडर्ड का होता है. इससे तैयारी का स्तर पता चलता है. लेकिन इंटर साइंस में कमजोर प्रश्न पत्र रहता है. प्रश्नों के स्तर में सुधार हो.

टीचर्स होने चाहिए (शादमा खान, फर्स्ट टॉप इंटर आर्ट्स)
स्कूल या कॉलेज में टीचर्स की कमी है. उसे सही किया जाये. क्योंकि टीचर्स होंगे, तभी क्वालिटी एजुकेशन की बातें होंगी. हम सेल्फ स्टडी करके ही अपनी तैयारी की है, लेकिन हर कोई ऐसा नहीं कर पाता है. टीचर्स की कमी को पूरा किया जाना चाहिए.

साइंटिफिक हो प्रश्न पत्र (आर्यन, फर्स्ट टॉपर इंटर कॉमर्स)
इंटर कॉमर्स में जो प्रश्न पूछे जाते है, उसे बहुत ही नार्मल होता है. प्रश्न पत्र को साइंटिफिक बनाना चाहिए. इससे हमें थोड़ा चैलेंज लगे. प्रश्न थोड़ा लेवल का होना चाहिए. क्योंकि इससे हमारा बेस की कमजोर हो रहा है. कैट आदि प्रतियोगी परीक्षा में हमें तैयारी करने में कहीं सफल नहीं हो रहे है.

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