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संकट की घड़ी में भावनात्मक रूप से जाना चाहते थे नेपाल : नीतीश

Updated at : 06 May 2015 6:49 AM (IST)
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संकट की घड़ी में भावनात्मक रूप से जाना चाहते थे नेपाल : नीतीश

पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नेपाल जाने की अनुमति नहीं मिलने पर मंगलवार को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि हम जनकपुर जाकर भूकंप में क्षतिग्रस्त जनकपुर मंदिर को देखना चाहते थे. मुख्यमंत्री सचिवालय संवाद कक्ष में गांधी सेतु पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने कहा कि अगर हम जनकपुर जाते तो हमसे […]

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पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नेपाल जाने की अनुमति नहीं मिलने पर मंगलवार को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि हम जनकपुर जाकर भूकंप में क्षतिग्रस्त जनकपुर मंदिर को देखना चाहते थे. मुख्यमंत्री सचिवालय संवाद कक्ष में गांधी सेतु पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने कहा कि अगर हम जनकपुर जाते तो हमसे जहां तक संभव होता, भूकंप पीड़ितों की मदद करते. उन्होंने कहा कि जनकपुर जाना पूरे बिहार की भावना नहीं बल्कि पूरे भारत की भावना थी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वह नेपाल पर्यटन के लिहाज से नहीं बल्किआपदा प्रबंधन के लिये जाना चाहते थे. उन्होंने कहा कि वह भूकंप में पीड़ित नेपाल के नागरिकों को अधिक से अधिक बढ़-चढ़ कर मदद करने के उद्देश्य से वहां जाना चाहते थे. विदेश मंत्रलय का यह फरमान आया कि अभी मत जाइये, तो हम नहीं गये. मुख्यमंत्री ने कहा कि भूकंप जैसी त्रसदी एवं संकट की घड़ी में हम जनकपुर भावनात्मक रूप से जाना चाहते थे.

उन्होंने बताया कि पहले जनकपुर जाने की अनुमति मंत्री स्तर से मिल गयी थी. लेकिन, अगले दिन ही विदेश सचिव ने मुख्य सचिव को कहा कि अभी जनकपुर नहीं जाने के लिये मुख्यमंत्री को कहा जाये. नीतीश कुमार ने कहा कि हम जब भी जायेंगे तो भारत सरकार एवं विदेश मंत्रलय की अनुमति के बाद ही नेपाल जायेंगे. उन्होंने कहा कि अगर हमें लगता है कि हम नेपाल जाते तो भारत की प्रतिष्ठा बढ़ती, गिरती नहीं. चूंकि हम आम नागरिक नहीं हैं कि कभी भी नेपाल जा सकते हैं. बिहार के मुख्यमंत्री हैं, बिना विदेश मंत्रलय की अनुमति से हम नेपाल नहीं जा सकते.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे लिये यह पहली बार नहीं है जब नेपाल जाने की अनुमति नहीं दी गयी. 2008 में जब कुशहा बांध टूटा था, तब भी हमें 18 अगस्त, 2008 को नेपाल जाने की अनुमति नहीं मिली थी. 20 अगस्त, 2008 को हम बिहार सरकार के हेलीकॉप्टर से अपने लोगों का हाल-चाल लेने के लिए कुशहा गये थे. इस दौरान ऊपर से ही निरीक्षण कर बाढ़ से बचाव एवं राहत कार्यो को प्रारंभ किया था. दूसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री गिरजिा प्रसाद कोइराला के निधन के बाद उनकी पुत्री के आमंत्रण पर हम नेपाल जाना चाहते थे. लेकिन, हमें अनुमति नहीं मिली. हम यहीं से बैठ कर जो बन पड़ेगा, नेपाल के भूकंप पीड़ितों के लिए करेंगे. भूकंप पीड़ितों के प्रति मेरी पूरी संवेदना है. बिहार के लोग भूकंप पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में उदारतापूर्वक दान दे रहे हैं. हम इन दान की राशि को प्रधानमंत्नी के माध्यम से नेपाल के भूकंप पीड़ितों के सहायतार्थ भेजेंगे.

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