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पटना : बिना रजिस्ट्रेशन के 90% से अधिक कोचिंग

Updated at : 09 Feb 2020 9:03 AM (IST)
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पटना : बिना रजिस्ट्रेशन के 90% से अधिक कोचिंग

प्रहलाद कुमार 10 वर्षों में भी कोचिंग एक्ट का नहीं हुआ पालन, स्टूडेंट हैं असुरक्षित हर बार विधानसभा व विधान परिषद में उठता है निबंधन का मामला पटना : राज्य सरकार ने कोचिंग निबंधन के लिए 2010 में कानून बनाया था. 10 वर्ष बाद भी राज्य भर में लगभग 1500 कोचिंगों ने ही निबंधन कराया […]

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प्रहलाद कुमार
10 वर्षों में भी कोचिंग एक्ट का नहीं हुआ पालन, स्टूडेंट हैं असुरक्षित
हर बार विधानसभा व विधान परिषद में उठता है निबंधन का मामला
पटना : राज्य सरकार ने कोचिंग निबंधन के लिए 2010 में कानून बनाया था. 10 वर्ष बाद भी राज्य भर में लगभग 1500 कोचिंगों ने ही निबंधन कराया है.
यह कुल कोचिंगों की संख्या का मात्र 10 फीसदी हैं. बाकी 90 प्रतिशत कोचिंग बिना रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से चल रही हैं. जिनका निबंधन हो चुका है, वहां भी कमियां ही कमियां हैं. जहां से दुर्घटना के बाद छात्र-छात्राओं का सुरक्षित निकाल जाना मुमकिन नहीं है. कमियों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है. पटना में 10 वर्षों में 287 कोचिंग सेंटरों का निबंधन हुआ है. मई, 2019 में 251 फॉर्म और नवंबर में 81 फॉर्म निबंधन के लिए आये, जिनकी जांच नहीं होने से अभी तक निबंधन नहीं हो पाया है.
बहादुरपुर से महेंद्रू तक हैं हजारों कोचिंग, सुरक्षा की नहीं है व्यवस्था
निबंधन जिला शिक्षा पदाधिकारी को करना है, लेकिन शहर में बहादुरपुर, सैदपुर, संदलपुर, महेंद्रू, राजेंद्र नगर, नाला रोड, रमना रोड, बोरिंग रोड, अशोक राजपथ सहित कई इलाके हैं, जहां बिना एक्ट का पालन किये हजारों संस्थान चल रहे हैं.
आंखों देखा हाल : बाेरिंग रोड स्थित एक नामी कोचिंग संस्थान में 800 से अधिक बच्चे पढ़ाई के लिए आते हैं. काेचिंग भवन में इनके आने-जाने का एक ही रास्ता है. रमना रोड स्थित एक चार मंजिले मकान में तीन कोचिंग संस्थान चल रहे हैं. यहां भी ऐसी ही स्थिति है. फ्रेजर रोड स्थित एक नामचीन कोचिंग में बच्चे लिफ्ट से चौथे तल्ले पर जाते हैं. एक बार में एक ही लिफ्ट है. अग्निशमन की व्यवस्था नहीं है. महेंद्रू में 14 से अधिक ऐसे मकान हैं, जहां दिन भर कोचिंग चलती है. गलीनुमा सीढ़ी है.
जयपुर में हुई घटना के बाद बिहार में प्रशासन हुआ था सख्त : जयपुर के एक कोचिंग संस्थान में आग लगने से कई छात्रों की मौत हो गयी थी.
इस घटना से पूरे देश में कोचिंग की व्यवस्था पर सवाल उठे थे. कई जगहों पर प्रदर्शन हुए. धीरे-धीरे छात्रों की मौत को लोग भूल गये और कोचिंग संस्थान फिर से उसी तरह से चलने लगे.
डीएम को दी गयी है निबंधन की जिम्मेदारी : बिहार विधान परिषद में राधाचरण साह के सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने 2010 में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है. बिहार के सभी कोचिंग का निबंधन कराने की जिम्मेदारी डीएम को दी है और एसडीओ के माध्यम से जांच होनी है.
ये हैं निबंधन के नियम
– आवेदन और पांच हजार का बैंक का डीडी.
– भवन संबंधी पेपर, किरायानामा, लीज की कॉपी
– अग्निशमन विभाग द्वारा एनओसी.
– नोटरी का शपथपत्र, जिसमें लिखा रहना चाहिए कि दिये गये सारे पेपर एक्ट 2010 के प्रावधानों के अनुरूप हैं.
कोचिंग अधिनियम 2010 के तहत प्रावधान
छात्रों की संख्या के अनुसार कमरे होने चाहिए
नामांकन की फीस निर्धारित हो
कमरे में समुचित रोशनी हो
पार्किंग के लिए जगह हो
सीढ़ी से आने-जाने की अच्छी सुविधा हो
पीने का पानी, शौचालय आदि की व्यवस्था हो
छात्राओं के लिए कॉमन रूम हो
छात्रों की संख्या के अनुसार अनुभवी शिक्षक होंअगलगी के बाद फायर बिग्रेड की गाड़ी पहुंच सके.
तंग गलियों में नहीं हो कोचिंग.
कोचिंग संस्थानों की नियमित जांच होती है. बिना निबंधन के चलने वाले कोचिंग संस्थानों को बंद करने का निर्देश डीओ को दिया गया है. जांच के निर्देश दिये गये हैं. जिला शिक्षा पदाधिकारी से रिपोर्ट ली जायेगी. निबंधन की गति धीमी होगी, तो कार्रवाई होगी.
कुमार रवि, डीएम, पटना
अगर निबंधन की रफ्तार कम है, तो बहुत जल्द सभी डीएम से रिपोर्ट ली जायेगी. सभी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जायेगा. बच्चों की सुरक्षा से कहीं कोई कोताही नहीं होगी.
कृष्ण नंदन वर्मा, मंत्री, शिक्षा विभाग
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