पटना : एक किमी की डीपीआर पर एक लाख खर्च

Updated at : 22 Jan 2020 9:01 AM (IST)
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पटना : एक किमी की डीपीआर पर एक लाख खर्च

कृष्ण कुमार नेशनल हाइवे के निर्माण के लिए तीन लाख प्रति किमी का बजट पटना : राज्य में एक किलोमीटर सड़क निर्माण पर डीपीआर के लिए एक लाख खर्च करना पड़ता है. नेशनल हाइवे के निर्माण के लिए तीन लाख रुपये प्रति किलोमीटर का बजट है. पर, खर्च एक से डेढ़ लाख के करीब है. […]

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कृष्ण कुमार
नेशनल हाइवे के निर्माण के लिए तीन लाख प्रति किमी का बजट
पटना : राज्य में एक किलोमीटर सड़क निर्माण पर डीपीआर के लिए एक लाख खर्च करना पड़ता है. नेशनल हाइवे के निर्माण के लिए तीन लाख रुपये प्रति किलोमीटर का बजट है. पर, खर्च एक से डेढ़ लाख के करीब है. सिर्फ एनच व स्टेट हाइवे ही नहीं, बल्कि सभी बड़े निर्माण के लिए इंजीनियरिंग महकमा डीपीआर पर करोड़ों खर्च कर रहा है.
ऐसा तब हो रहा जब निर्माण से जुड़े सभी विभागों में डिजाइन और तकनीकी अधिकारियों की पूरी टीम नियुक्त है. इन अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन पर सरकार को सालाना लाखों खर्च करने पर रहे हैं. इसके बावजूद डीपीआर का बनना सभी विभागों में जारी है. डीपीआर के बिना कोई निर्माण संभव नहीं हो रहा. डीपीआर बनाने के लिए निजी कंपनियां लालायित रहती है. दूसरी ओर निर्माण कार्य के निर्धारित डीपीआर को विभागीय अधिकारी जरूरी मानते हैं.
अफसरों का कहना है कि इंजीनियरों की संख्या कम होने से दूसरी कंपनियों को डीपीआर की जिम्मेदारी दी जाती है. सूत्रों का कहना है कि डीपीआर बनाने में एनएच की सड़कों पर जीएसटी को छोड़कर तीन लाख प्रति किमी तक मंजूरी की सीमा है. लेकिन, करीब एक से डेढ़ लाख प्रति किमी तक की ही मंजूरी दी जाती है. वहीं पथ निर्माण विभाग की स्टेट हाइवे का डीपीआर तैयार करने में करीब एक लाख प्रति किमी का खर्च आता है. इसी तरह ग्रामीण कार्य विभाग के सड़कों का डीपीआर तैयार करने का खर्च करीब 19 हजार 500 रुपये प्रति किमी व आरसीसी पुल बनाने के डीपीआर पर करीब 3600 से 4800 रुपये प्रति किमी खर्च आता है.
डीपीआर पर करोड़ों खर्च कर रहा है इंजीनियरिंग महकमा
राज्य में पीएम पैकेज में स्वीकृत एनएच की सड़क परियोजनाओं के डीपीआर पर अब तक करीब 75 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. वहीं इंद्रपुरी बराज से सोन नहर प्रणाली को स्थायित्व देने और करीब चार सौ मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए डीपीआर बनाने पर करीब 18.40 करोड़ रुपये खर्च होने हैं.
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि राज्य में सड़क, पुल-पुलिया, भवन, बांध, बराज सहित सरकारी निर्माण कार्यों की शुरुआत के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) पहली आवश्यकता है. डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी मिलने पर एजेंसी परियोजना के लिए निर्माण स्थल का निरीक्षण कर उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार करती है. इसमें परियाेजना के विस्तृत निर्माण का नक्शा, मैटीरियल लगाने की जानकारी सहित उसकी लागत आदि की जानकारी रहती है. सभी संसाधनों के जुटने पर परियोजना के निर्माण की डेडलाइन आदि तय की जाती है.
सक्षम एजेंसी को मिलती है जिम्मेदारी : डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी सक्षम एजेंसी को दी जाती है. इसके पहले एजेंसी के सभी प्रोफाइल की जांच-परख की जाती है. इसमें यह देखा जाता है कि एजेंसी के पास संबंधित परियोजना के कितने एक्सपर्ट मौजूद हैं. पिछले कितने साल का अनुभव है? साथ ही एजेंसी की बैकग्राउंड कैसी है?
डीपीआर की समीक्षा के आधार पर शुरू होता है काम
: परियोजनाओं की डीपीआर बनने और उसकी समीक्षा के आधार पर ही परियोजनाओं को बनाने की राशि स्वीकृत होती है. डीपीआर में परियोजना पर काम करने के बारे में हरेक पहलू की जानकारी रहती है. इसके अनुसार ही काम पूरा होता है.
2016-17 में बनी थी डीपीआर
सूत्रों का कहना है कि राज्य में एनएच की अधिकतम सड़कों की डीपीआर 2016-17 में बनी थी.बड़ी परियोजनाओं का डीपीआर बनाने को कंसल्टेंट की बहाली करनी पड़ती है. इसमें मॉनीटरिंग सहित कई स्तरों पर काम करना होता है. वहीं छोटी परियोजनाओं का डिजाइन व डीपीआर विभाग से ही बन जाता है.
नंद किशोर यादव्, मंत्री, पथ निर्माण विभाग
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