बिहार बोर्ड ने रचा इतिहास, देश-विदेश से हो रहा कार्यप्रणाली का अध्ययन
Updated at : 31 Dec 2019 8:01 AM (IST)
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पटना : बिहार विद्या लय परीक्षा समिति ने कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए पूरे देश में नाम रोशन किया है. समिति के बेहतर कार्य के लिए 14वें एजुकेशनल समिट 2019 में समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर को पुरस्कृत किया गया. साल 2019 समिति के लिए उपलब्धियों भरा रहा. समिति की पूरी कार्यप्रणाली एवं संपूर्ण परीक्षा […]
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पटना : बिहार विद्या लय परीक्षा समिति ने कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए पूरे देश में नाम रोशन किया है. समिति के बेहतर कार्य के लिए 14वें एजुकेशनल समिट 2019 में समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर को पुरस्कृत किया गया. साल 2019 समिति के लिए उपलब्धियों भरा रहा.
समिति की पूरी कार्यप्रणाली एवं संपूर्ण परीक्षा व्यवस्था में बदलाव करते हुए इसे तकनीक से जोड़ गया. पूरी प्रक्रिया कंप्यूटरीकृत की गयी. कंप्यूटरीकृत परीक्षा व्यवस्था के तहत परीक्षा से संबंधित सभी कार्यों को प्री-एग्जाम सॉफ्टवेयर तथा पोस्ट-एग्जाम सॉफ्टवेयर के माध्यम से कराया जा रहा है.
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए बिहार बोर्ड ने नया इतिहास रचते हुए पूरे देश में सबसे पहले बोर्ड का रिजल्ट जारी करने का कीर्तिमान हासिल किया. इस वर्ष इंटर वार्षिक परीक्षा का परिणाम बिहार बोर्ड ने मार्च माह में घोषित कर दिया वहीं मैट्रिक का रिजल्ट भी छह अप्रैल को जारी कर दिया था. कंपार्टमेंटल परीक्षा का रिजल्ट भी मई में जारी कर दिया गया था.
कॉपियों पर अंकित किये गये रोल नंबर :
वर्ष 2019 की इंटरमीडिएट एवं मैट्रिक वार्षिक परीक्षा के साथ-साथ कंपार्टमेंटल परीक्षाओं में पहली बार विद्यार्थियों के नाम, रोल नंबर, रोल कोड, विषय इत्यादि को उत्तरपुस्तिकाओं एवं ओएमआर पर अंकित करते हुए सभी विद्यार्थियों के सभी विषयों की अलग-अलग कॉपियां छपवायी गयी थीं.
विभिन्न प्रकार के नये कंप्यूटराइज्ड फॉर्मेट देश में पहली बार तैयार किये गये और उन मल्टीपल कंप्यूटराइज्ड प्रपत्रों की स्कैनिंग करा कर डाटा तैयार कराया गया एवं बारकोडेड कॉपियों के अंकों की प्रविष्टि सीधे मूल्यांकन केंद्रों से कंप्यूटर के माध्यम से की गयी.
विद्यार्थियों के उत्तीर्णता प्रतिशत में हुई वृद्धि : देश में पहली बार किसी भी बोर्ड में सभी विषयों में प्रश्नपत्रों के 10 सेट तैयार कराये गये. इसके साथ सभी विषयों में 50 ऑब्जेक्टिव प्रश्न भी रखे गये. इसके अलावा, इंटरमीडिएट एवं मैट्रिक वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित हुए विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए इस परीक्षा में पूछे जाने वाले शॉर्ट क्वेश्चन में 75 प्रतिशत प्रश्न अतिरिक्त दिये गये.
लॉन्ग प्रश्न में विकल्प को समाप्त करते हुए प्रश्नों की संख्या बढ़ा दी गयी. इस कारण विद्यार्थियों के उत्तीर्णता प्रतिशत में वृद्धि हुई है. समिति ने अपनी व्यवस्था में सुधार की मिसाल कायम की है. इससे अन्य राज्यों के परीक्षा बोर्ड भी बिहार आकर यहां की परीक्षा व्यवस्था का अध्ययन करना चाहते हैं. छत्तीसगढ़ बोर्ड और नेपाल की टीम ने यहां आकर नयी व्यवस्थाओं का अध्ययन किया.
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