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पटना : 40% घरों में अब भी सप्लाइ पानी नहीं

Updated at : 22 Dec 2019 10:01 AM (IST)
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पटना : 40% घरों में अब भी सप्लाइ पानी नहीं

420 करोड़ से 2200 करोड़ हो गयी जलापूर्ति योजनाओं की लागत निजी बोरिंग के सहारे प्यास बुझा रहे निगम क्षेत्र में रहने वाले लोग पटना : नगर निगम में वार्डों की संख्या 37 से बढ़ कर 75 हो गया. क्षेत्र विस्तार के साथ साथ नये-नये कॉलोनियां बसती गयी. लेकिन, इन कॉलोनियों में निगम की ओर […]

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420 करोड़ से 2200 करोड़ हो गयी जलापूर्ति योजनाओं की लागत
निजी बोरिंग के सहारे प्यास बुझा रहे निगम क्षेत्र में रहने वाले लोग
पटना : नगर निगम में वार्डों की संख्या 37 से बढ़ कर 75 हो गया. क्षेत्र विस्तार के साथ साथ नये-नये कॉलोनियां बसती गयी. लेकिन, इन कॉलोनियों में निगम की ओर से पीने के पानी नहीं पहुंचाया जा सका है. ऐसा नहीं है कि निगम क्षेत्र में 24 घंटे व सातों दिन शुद्ध पीने के पानी पहुंचने की योजना नहीं बनायी गयी. इसके लिए बनी योजना की लागत अब 420 करोड़ से बढ़ कर 2200 करोड़ हो गयी, लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है. स्थिति यह है कि शहर के 40 फीसदी घर सप्लाइ पानी से वंचित है, जो निजी बोरिंग से प्यास बुझा रहे हैं.
हर घर नल का जल योजना पर भी नहीं हुआ काम
पिछले चार वर्षों से मुख्यमंत्री हर घर नल का जल योजना चल रही है. इस योजना के तहत निगम क्षेत्र के हर घर को पीने का पानी पहुंचाना है. इसको लेकर करीब 189 से अधिक योजनाएं वार्ड स्तर पर बनायी गयी, जो बोरिंग लगाने व पाइप लाइन विस्तार करने से संबंधित है. इन योजनाओं को मार्च 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य भी निर्धारित की गयी है.
लेकिन, योजना प्रशासनिक व टेंडर प्रक्रिया में लटकी हुई है. नगर विकास विभाग के निर्देश पर बुडको प्रशासन ने वर्ष 2012 में 537 करोड़ की जलापूर्ति योजना बनायी. लेकिन, वर्ष 2014 तक सिर्फ 18 वार्डों में ही आधा-अधूरा काम किया गया. इससे एजेंसी को टर्मिनेट कर दिया गया. इस योजना पर अब काम शुरू किया गया है. इसमें बुडको को पांच योजना पूरा करने की जिम्मेदारी दी गयी है, जिस पर काम शुरू हो गया है. वहीं, निगम को 129 करोड़ की लागत से 13 योजना पूरी करनी है. इसमें चार योजनाओं के लिए एजेंसी चयन की गयी है और चयनित एजेंसियां काम भी शुरू कर दी है. वहीं, नौ योजनाओं में कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
57 वार्डों में शुरू करनी है नयी योजना
नगर निगम क्षेत्र में 112 पंप हाउसों के माध्यम से 60 प्रतिशत घरों में पीने के पानी पहुंचाया जाता है. लेकिन, पाइप लाइन जर्जर होने की वजह से घरों में गंदा पानी पहुंचता है, जो पीने लायक नहीं होता है. वहीं, सप्लाइ पानी 24 घंटा में सिर्फ छह घंटा ही पहुंचता है. हालांकि, 57 वार्डों में नयी जलापूर्ति योजना को लेकर डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू की गयी है, जिस पर दो हजार करोड़ संभावित खर्च आंकी गयी है.
जलापूर्ति के 13 बड़े योजनाओं पर तेजी सेकाम किया जा रहा है. वहीं, पाइप लाइन विस्तार व बोरिंग लगाने की योजना भी चल रही है, जिसे समय सीमा में पूरा किया जायेगा.
शैलेश कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी,जलापूर्ति शाखा
प्रशासन अब कर रहा अध्ययन
खासमहाल. प्रशासन का होमवर्क ठीक नहीं, आना पड़ा बैकफुट पर
लीज की जमीन का हो रहा काॅर्मिशयल इस्तेमाल
ज्यादातर लीज धारकों पर आरोप है कि वह खासमहाल की जमीन को आवासीय रूप में लिये हैं और उसका इस्तेमाल कॉर्मिशयल के रूप में कर रहे हैं. निर्माण में लीज का उल्लंघन किया गया है. कुछ लोगों का टैक्स बाकी है. हालांकि, लोगों का कहना है कि वह टैक्स देने को तैयार हैं. लेकिन, उनसे खाली नहीं कराया जाये.
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