पटना : फ्रैंकिंन मशीन से अब जारी नहीं होगा स्टांप
Author Prabhat khabar digital desk
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इ-स्टांप प्रिंट करने के लिए स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ होगा समझौता पटना : राज्य की सभी कोर्ट-कचहरियों में जल्द ही स्टांप जमा करने की नयी व्यवस्था शुरू होने जा रही है. इसके तहत कोर्ट फीस या वेलफेयर स्टांप या अन्य सभी तरह के स्टांप के लिए अब फ्रैंकिंन मशीन की मदद से स्टांप […]
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इ-स्टांप प्रिंट करने के लिए स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ होगा समझौता
पटना : राज्य की सभी कोर्ट-कचहरियों में जल्द ही स्टांप जमा करने की नयी व्यवस्था शुरू होने जा रही है. इसके तहत कोर्ट फीस या वेलफेयर स्टांप या अन्य सभी तरह के स्टांप के लिए अब फ्रैंकिंन मशीन की मदद से स्टांप प्रिंट या जारी करने की मौजूदा व्यवस्था समाप्त होने जा रही है. इसके स्थान पर नयी इ-स्टांप की प्रणाली शुरू होने जा रही है. इस नयी व्यवस्था के लिए स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ एकरारनामा किया जा रहा है. अब यह कंपनी ही सरकार की सभी इ-स्टांप को जारी करने के साथ ही इसके संग्रह का काम करेगी.
यह कंपनी निबंधन और स्टांप से प्राप्त होने वाले सभी राजस्व का संग्रह करेगी और इसे सरकार को जमा करेगी. इस काम के बदले में संबंधित कंपनी को 0.5 प्रतिशत कमीशन दिया जायेगा. यह नयी व्यवस्था के पूरे राज्य में 1 जनवरी, 2020 से शुरू होने की संभावना जतायी जा रही है. फिलहाल इसे पटना में एक-दो स्थानों पर ट्रायल के आधार पर शुरू किया गया है.
इ-स्टांप की होने जा रही है व्यवस्था
इस नयी प्रणाली के तहत स्टॉक होल्डिंग कंपनी की तरफ से कचहरी या निबंधन कार्यालय में एक तरह की विशेष मशीन स्थापित की जायेगी. इस मशीन के माध्यम से रजिस्ट्री पेपर या स्टांप पेपर या ऐसे अन्य किसी कागज पर काले रंग में टिकट के प्रारूप को प्रिंट कर दिया जायेगा. इसकी प्रिंटिंग या छापने का तरीका बेहद ही खास होगा और इसका स्टाइल भी काफी अलग होगा, जिसकी कोई डुप्लीकेसी नहीं की जा सकती है. इस प्रणाली को इ-स्टांप सिस्टम कहा जाता है.
इस वजह से लागू करनी पड़ी नयी व्यवस्था
मौजूदा फ्रैंकिंग मशीन की व्यवस्था में कई स्तर पर फर्जीवाड़ा की शिकायत भी मिलने लगी है. कुछ स्थानों पर ऐसी मशीन खुद कुछ लोग बैठा लेते हैं और टिकट की फर्जी तरीके से प्रिंटिंग कर देते हैं. इससे आम लोगों से तो पैसे ले लेते हैं, लेकिन सरकार के खजाने में ये रुपये जमा नहीं होते हैं. इससे राजस्व का नुकसान होता है. इस पर लगाम लगाने और फर्जीवाड़ा को रोकने के लिए यह नयी प्रणाली शुरू की जा रही है. इसमें किसी तरह की गड़बड़ी होने पर पूरी जवाबदेही संबंधित कंपनी की होगी.
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