सैमसंग को 12000 रूपये के फोन के बदले देने पड़े 32000 रूपये
Updated at : 10 Dec 2019 7:59 AM (IST)
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पटना : सर्विस सेंटर की तरफ से मोबाइल सुधारने में की गयी आनाकानी और सुधारने के बदले मांगा गया मनमाना शुल्क सैमसंग कंपनी को महंगा पड़ गया. कंपनी को मोबाइल उपभोक्ता को 12 हजार के मोबाइल के बदले 32 हजार रुपये हर्जाना चुकाने के लिए बाध्य होना पड़ा. यह तब हुआ जब उपभोक्ता प्रभात कुमार […]
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पटना : सर्विस सेंटर की तरफ से मोबाइल सुधारने में की गयी आनाकानी और सुधारने के बदले मांगा गया मनमाना शुल्क सैमसंग कंपनी को महंगा पड़ गया. कंपनी को मोबाइल उपभोक्ता को 12 हजार के मोबाइल के बदले 32 हजार रुपये हर्जाना चुकाने के लिए बाध्य होना पड़ा. यह तब हुआ जब उपभोक्ता प्रभात कुमार दूबे ने जिला फोरम में शिकायत दर्ज करायी.
करीब चार साल की कानूनी सुनवाई के बाद प्रभात कुमार दूबे बनाम सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स प्रा लि सैमसंग कस्टमर सटिस्फेक्शन गुडगांव और न्यू राजा टेलीकॉम अशोक राजपथ एवं 2 अन्य के केस में जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष सुबोध कुमार श्रीवास्तव एवं सदस्य अनिल कुमार की संयुक्त बेंच ने मोबाइल उपभोक्ता दूबे के पक्ष में अहम फैसला सुनाया.
फैसले में सैमसंग कंपनी को आदेश दिया कि माेबाइल फोन सेट के उसी मॉडल या उसी मूल्य के अन्य मॉडल में बदले अथवा मोबाइल फोन के मूल्य 12 हजार रुपये का भुगतान 9 फीसदी ब्याज के साथ किया जाये. यह भुगतान वादी को 31 जुलाई 2014 की तिथि से दिया जाये.इसी तिथि को वादी कस्टमर सेंटर पहुंचा था.
इसके अलावा आदेश में कहा गया कि वादी को हुए मानसिक संताप और शारीरिक परेशानी के लिए बतौर क्षतिपूर्ति राशि दस हजार रुपये एवं वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये भी चुकाये जाएं. अगर उपरोक्त आदेश का पालन 60 दिन के अंदर नहीं किया गया तो मोबाइल फोन के मूल्य पर 12 फीसदी वार्षिक ब्याज दर देय होगा.
हालांकि दो माह पहले फैसला आने के कुछ दिनों के अंदर ही कंपनी ने वादी दूबे को 32 हजार रुपये का भुगतान कर दिया. उल्लेखनीय है कि प्रभात कुमार दूबे ने 27 मई 2013 को मोबाइल शॉप न्यू राजा से खरीदा था. 31 जुलाई 2014 को मोबाइल खराब होने पर दूबे सर्विस सेंटर पहुंचे.
सर्विस सेंटर ने कहा कि मोबाइल गलत तरीके से चलाने की वजह से खराब हुआ है. सर्विस सेंटर ने यह भी व्यवस्था दी कि वारंटी अवधि में भी शुल्क लेकर ही मोबाइल सुधार जा सकेगा. बतौर शुल्क सात हजार रुपये मांगे गये. इस मनमानी के खिलाफ वादी दूबे ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करायी थी. इस केस में वादी की तरफ से अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार दूबे और विपक्षी अधिवक्ता अंजनी कुमार झा थे.
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