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पटना : 10 लाख टन तक बढ़ेगा चावल का उत्पादन

Updated at : 02 Dec 2019 6:10 AM (IST)
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पटना : 10 लाख टन तक बढ़ेगा चावल का उत्पादन

राज्य में चावल उत्पादन का जारी हुआ पहला आंकड़ा, 65.50 लाख टन उपज संभावित पटना : राज्य में खरीफ फसलों के उत्पादन का पहला आंकड़ा जारी किया जा चुका है. कही कम और कभी अधिक बारिश के बावजूद इस बार बीते वर्ष के मुकाबले अधिक पैदावार का अनुमान लगाया है. कृषि विभाग की ओर से […]

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राज्य में चावल उत्पादन का जारी हुआ पहला आंकड़ा, 65.50 लाख टन उपज संभावित
पटना : राज्य में खरीफ फसलों के उत्पादन का पहला आंकड़ा जारी किया जा चुका है. कही कम और कभी अधिक बारिश के बावजूद इस बार बीते वर्ष के मुकाबले अधिक पैदावार का अनुमान लगाया है.
कृषि विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 65,50,877 टन चावल की उपज संभावित है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में चावल उत्पादन का आंकड़ा 60,31,016 टन चावल का उत्पादन हुआ था. दिसंबर के अंत में दूसरा, जनवरी में तीसरा और मार्च तक चौथा और फाइनल आंकड़ा जारी किया जायेगा. विभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले साल से इस बार 10 लाख टन अधिक चावल की उपज अधिक होगी, क्योंकि पहले ही आकड़े में 5,19,861 टन की अधिक उपज दर्ज हुई है.
सितंबर की बारिश ने बढ़ायी पैदावार : विभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सितंबर महीने में बारिश ने पूरे राज्य में खरीफ खासकर धान का उत्पादन बेहतर हुआ है.
नवादा को छोड़कर पूरे दक्षिणी बिहार खासकर कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर और चंपारण से लेकर अन्य जिलों में धान की उपज काफी हुई है. इसके अलावा बीते वर्ष की तुलना में डीजल अनुदान के लिए भी अधिक लोगों ने आवेदन किये थे. कुल 11,64,938 को डीजल अनुदान की राशि जारी की गयी है. इसके अलावा आपदा अनुदान के तहत कई प्रखंडों के किसानों को तीन-तीन हजार रुपये भी दिये गये हैं. इस कारण खरीफ की फसल बेहतर हुई है.
सितंबर की बारिश ने बढ़ायी धान की पैदावार
17.60 लाख किसानों को मिलेगा कृषि इनपुट अनुदान
इस बार 17 लाख 60 हजार 71 किसानों को कृषि इनपुट अनुदान किया जायेगा. 30 नवंबर की अंतिम तारीख तक इतने किसानों ने आवेदन किये है.
अनुदान के तहत परती भूमि वाले किसानों को 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर, बाढ़ व अधिक बारिश से असिंचित फसल क्षेत्र में नुकसान के लिए 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित क्षेत्र के लिए 13500 रुपये प्रति हेक्टेयर, शाश्वत (पेरेनियल) फसलों के लिए 18000 रुपये प्रति हेक्टेयर दर तय की गयी है. वहीं, कृषि योग्य भूमि, जहां बालू या सिल्ट का जमाव तीन इंच से अधिक हो गया है, उन जगहों के लिए 12200 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दिया जायेगा. यह अनुदान प्रति किसान अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र के लिए देय होगा. फसल क्षेत्र के लिए न्यूनतम 1000 रुपये और शाश्वत (पेरेनियल) फसल क्षेत्र के लिए न्यूनतम 2000 रुपये अनुदान दिया जाना है.
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