पटना : खेती में बदलाव की जरूरत : सीएम

Updated at : 21 Nov 2019 9:24 AM (IST)
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पटना : खेती में बदलाव की जरूरत : सीएम

जल-जीवन-हरियाली अभियान. जलवायु अनुकूल कृषि का शुभारंभ आठ जिलों के पांच-पांच गांव चयनित, बनेंगे मॉडल मधुबनी, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, नवादा, गया और नालंदा पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है. इसके अनुकूल खेती करने की जरूरत है. सिर्फ धान-गेहूं से काम नहीं चलेगा, बल्कि […]

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जल-जीवन-हरियाली अभियान. जलवायु अनुकूल कृषि का शुभारंभ
आठ जिलों के पांच-पांच गांव चयनित, बनेंगे मॉडल
मधुबनी, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, नवादा, गया और नालंदा
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है. इसके अनुकूल खेती करने की जरूरत है. सिर्फ धान-गेहूं से काम नहीं चलेगा, बल्कि फसल चक्र में बदलाव की आवश्यकता है.
सीएम बुधवार को मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद कक्ष में जल-जीवन-हरियाली अभियान के अहम हिस्से ‘जलवायु अनुकूल कृषि’ का शुभारंभ कर रहे थे. कहा कि इसके लिए राज्य के आठ जिलों में पांच-पांच गांवों का चयन किया गया है. इन 40 गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जायेगा. फिर इस मॉडल को पूरे राज्य में लागू किया जायेगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि अभियान के शुरू पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि अब मैं कॉन्फिडेंट हो गया हूं, यह शुरू हो गया, तो लोग इसकी तरफ आकर्षित होंगे ही. चुने गये आठ जिलों मधुबनी, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, नवादा, गया और नालंदा के पांच-पांच गांवों का चयन किया गया है. इस तरह 40 गांवों को मॉडल के रूप में तैयार किया जायेगा. इसके लिए 60 करोड़ जारी किये गये हैं.
इन गांवों में परिवर्तित जलवायु के अनुकूल खेती करने के तौर-तरीके किसानों को सिखाये जायेंगे. जलवायु के अनुकूल अलग-अलग तरह की फसलों और इसकी किस्मों को उगाने और खेतीबारी में आधुनिक मशीनों का उपयोग करने समेत ऐसी तमाम बातों से किसानों को अवगत कराया जायेगा.
इसमें कृषि वैज्ञानिक भी हर तरह से मदद करेंगे. फसल के अलावा अवशेष से भी आमदनी होगी, यह बात किसानों को बताने की जरूरत है. पराली जलाने से खेतों को नुकसान होता है. जल-जीवन-हरियाली अभियान में आठ करोड़ पौधे लगाये जायेंगे.
जलवायु परिवर्तन से भयावह हो रही स्थिति
जलवायु परिवर्तन के कारण स्थिति धीरे-धीरे भयावह होती जा रही है. वर्ष 2007 में बाढ़ से 22 जिलों के ढाई करोड़ लोग पीड़ित हुए थे, जबकि 2008 में कोसी त्रासदी आयी. 2016 में गंगा का जल स्तर इतना ऊंचा उठा कि दोनों तरफ पानी फैल गया. उनका जन्म गंगा किनारे मौजूद बख्तियारपुर शहर में हुआ था. यहां भी 2016 में गंगा का पानी घुस गया था.
2017 में फ्लैश फ्लड आया. 2018 में 280 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ा था. इस वर्ष 12 जिलों में मूसलधार बारिश हो गयी. पहले 15 जून से मॉनसून आता था, अब पता ही नहीं चलता कि कब आया. दरभंगा जिले में भू-जल काफी नीचे चला गया है. ये सब जलवायु परिवर्तन के उदाहरण हैं.
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