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उपचुनाव : एनडीए व महागठबंधन के लिए आगाह करने वाला जनादेश

Updated at : 25 Oct 2019 8:02 AM (IST)
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उपचुनाव : एनडीए व महागठबंधन के लिए आगाह करने वाला जनादेश

पांच विधानसभा सीटों व एक लोकसभा सीट के लिए डाले गये थे वोट, परिणाम ने चौंकाया पटना : विधानसभा और लोकसभा उपचुनाव का जनादेश एनडीए के लिए आगाह करने वाला है. अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होनेवाले हैं. इस कारण उपचुनाव को ट्रेलर के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन इसके जो परिणाम […]

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पांच विधानसभा सीटों व एक लोकसभा सीट के लिए डाले गये थे वोट, परिणाम ने चौंकाया
पटना : विधानसभा और लोकसभा उपचुनाव का जनादेश एनडीए के लिए आगाह करने वाला है. अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होनेवाले हैं.
इस कारण उपचुनाव को ट्रेलर के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन इसके जो परिणाम आये हैं, वे चौंकाने वाले हैं. एनडीए पूरी तरह चुनावी गणित को एकतरफा मान कर चल रहा था. मगर, जनता का आदेश इसके विपरीत रहा.दरअसल, आम लोगों की अपेक्षा पर इस बार जदयू और भाजपा खरी नहीं उतर पायी. परिवारवाद समेत जिन मुद्दों का जदयू और भाजपा ने कभी विरोध किया था, उसे तरजीह दी जाने लगी. दरौंदा सीट का परिणाम इसका संकेत है.
बाहुबली छवि वाले अजय सिंह को जदयू ने उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा होने के चलते उम्मीदवार नहीं बनाया था. याद करिए तब उन्हें आनन-फानन में शादी करनी पड़ी थी. विवाह के अगले दिन उनकी पत्नी कविता सिंह को नामांकन करना पड़ा था. लेकिन, इस बार अंदरूनी विरोध के बावजूद कविता सिंह के पति अजय सिंह को उम्मीदवारी दी गयी. इस सीट पर भाजपा की भी नजर थी. 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जितेंद्र स्वामी को अपना उम्मीदवार बनाया था.
इस बार भी वे टिकट चाह रहे थे. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के गृह क्षेत्र सीवान में भाजपा का एक बड़ा तबका अंदर ही अंदर जदयू उम्मीदवार से खफा चल रहा था. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि भाजपा ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की. पार्टी ने कर्णजीत सिंह को निष्कासित भी कर दिया, पर कार्यकर्ताओं के मन से वे बाहर नहीं हुए. यही कारण रहा कि अजय सिंह को जितने वोट मिले, उससे दोगुने से भी अधिक वोट बागी उम्मीदवार को आये.
इसी प्रकार बेलहर में जदयू सांसद गिरिधारी यादव के भाई लालधारी यादव की उम्मीदवारी लोगों को पच नहीं पायी. एक ही परिवार में सांसद और विधायक होने की बजाय जनता ने अलग लीडरशिप पर भरोसा जताया है. यहां बड़ी संख्या में अति पिछड़ी जाति से आने वाली कुम्हार जाति के निर्दलीय उम्मीदवार बिनोद पंडित को वोट मिले.
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