पटना : शराबबंदी लागू होने के बाद 175 लोगों को ही मिली सजा
Updated at : 18 Oct 2019 8:04 AM (IST)
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15 आरोपितों को 10 साल या ज्यादा की सजा मिली है करीब 60 हजार लोगों को मिल चुकी है जमानत पटना : राज्य में 1 अप्रैल 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशासन हर तरह से जुटा है. परंतु इस शराबबंदी कानून के अंतर्गत सजा पाने वालों […]
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15 आरोपितों को 10 साल या ज्यादा की सजा मिली है
करीब 60 हजार लोगों को मिल चुकी है जमानत
पटना : राज्य में 1 अप्रैल 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशासन हर तरह से जुटा है. परंतु इस शराबबंदी कानून के अंतर्गत सजा पाने वालों की संख्या सिर्फ 175 ही है. इसमें 15 आरोपित ही ऐसे हैं, जिन्हें 10 साल या इससे ज्यादा की सजा हुई है.
इस कानून के लागू हुए साढ़े तीन साल की अवधि के दौरान सिर्फ मधुबनी के एक आरोपित को 15 साल की सजा हुई है. इसके अलावा औरंगाबाद के दो आरोपितों को 14 साल और वैशाली के चार आरोपितों को 12 साल की सजा हुई है.
ऐसा नहीं है कि इस कानून के आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हो रही. साढ़े तीन साल में 67 हजार से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें 60 हजार से ज्यादा लोग बेल पर रिहा भी हो गये हैं. समुचित साक्ष्य के अभाव में इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारी के बाद लोगों को बेल मिल रहा है. इसमें शराब पीने के मामले में पकड़े जाने वालों की संख्या भी काफी है.
अब तक 67 हजार लोग हुए गिरफ्तार
कोर्ट में बढ़ रही मुकदमों की संख्या
राज्य के न्यायालयों में शराबबंदी कानून के अंतर्गत लंबित पड़े मामलों की संख्या दो लाख सात हजार है. इसमें इस कानून से जुड़े सभी तरह के मामले शामिल हैं. इस कानून के तहत बड़ी संख्या में पुलिस और उत्पाद विभाग के स्तर से हो रही लगातार कार्रवाई के कारण कोर्ट में मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है.
इसके मामलों में स्पीडी ट्रायल के तहत सुनवाई करके फैसला देने का प्रावधान है. सामान्य न्यायालयों में इस तरह के मामले की सुनवाई होने से इसके निबटारे में देरी हो रही है. कहीं-कहीं इसके लिए अलग कोर्ट गठित तो हैं, लेकिन उनके जज अतिरिक्त प्रभार में हैं. इसी वजह से राज्य सरकार ने शराब निषेध के लंबित मामलों की सुनवाई के लिए 75 स्पेशल कोर्ट के गठन का निर्णय लिया है.
जब्त शराब का निबटारा बड़ी समस्या
राज्य में बड़ी मात्रा में अवैध शराब पकड़ी जा रही है. इन्हें थानों के हाजत या परिसर में सुरक्षित रखना बड़ी समस्या बनी हुई है. हालांकि राज्य सरकार ने इसे नष्ट करने के लिए एक कानून बना रखा है. इसके तहत समय-समय पर जब्त शराब को नष्ट किया जाता है. परंतु इसे अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया लंबी होने के कारण इसमें समय लगता है. अवैध शराब जब्ती से जुड़े सिर्फ उत्पाद विभाग के आंकड़े की बात करें, तो साढ़े तीन साल मेंइसने 17 लाख 82 हजार 637 लीटर शराब जब्त की, जिसमें 16 लाख 53 हजार 675 लीटर नष्ट हो सकी है. शेष एक लाख 28 हजार 962 लीटर शराब अब भी पड़ी हुई है. इन्हें संभाल कर रखना सबसे बड़ी समस्या साबित हो रही है. पुलिस महकमे के लिए भी जब्त शराब को रखना बड़ी समस्या बनी है. लाखों लीटर शराब उनके पास भी पड़ी है.
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