फर्जी लाइसेंस पर हो रही हथियारों की खरीद- बिक्री, राज्य में सैकड़ों मामले उजागर

Updated at : 07 Oct 2019 2:38 AM (IST)
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फर्जी लाइसेंस पर हो रही हथियारों की खरीद- बिक्री, राज्य में सैकड़ों मामले उजागर

अनुज शर्मा, पटना : बिहार में फर्जी लाइसेंस पर हथियारों की खरीद हो रही है. हथियार संगठित अपराधियों को बेचे जा रहे हैं. शस्त्र विक्रेताओं ने दूसरे राज्य (विशेषकर पूर्वोत्तर- जम्मू कश्मीर) एक – एक फर्जी लाइसेंस पर कई- कई हथियारों की बिक्री की है. एडीजी विधि- व्यवस्था अमित कुमार की रिपोर्ट में इसका खुलासा […]

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अनुज शर्मा, पटना : बिहार में फर्जी लाइसेंस पर हथियारों की खरीद हो रही है. हथियार संगठित अपराधियों को बेचे जा रहे हैं. शस्त्र विक्रेताओं ने दूसरे राज्य (विशेषकर पूर्वोत्तर- जम्मू कश्मीर) एक – एक फर्जी लाइसेंस पर कई- कई हथियारों की बिक्री की है. एडीजी विधि- व्यवस्था अमित कुमार की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है.

पुलिस ने 560 हथियारों के लाइसेंस की जांच की, तो उसमें 288 लाइसेंस का यूआइएन नंबर नहीं मिला. आशंका है कि करीब पांच हजार फर्जी लाइसेंस पर हथियार खरीदे गये. यह अपराधियों तक पहुंच गये हैं. एडीजी विधि-व्यवस्था ने 17 सितंबर, 2019 को फर्जी शस्त्र लाइसेंस और उनकी आड़ में अपराधियों को की जा रही हथियारों की बिक्री को लेकर विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है.
राज्य में शस्त्र लाइसेंस के लिए सत्यापन तक नहीं किया जा रहा है. बड़ी संख्या में अस्थायी पता वालों को लाइसेंस जारी है. स्थायी पता और आपराधिक रिकॉर्ड तक नहीं देखा जा रहा है. अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर कर शस्त्र लाइसेंस बनवाने वाला गिरोह सक्रिय है. जाली यूआइएन नंबर अंकित किया जा रहा है.
फर्जी शस्त्र लाइसेंस और उनकी आड़ में अपराधियों को बेचे जा रहे हथियारों को लेकर एडीजी विधि- व्यवस्था सौंप चुके हैं रिपोर्ट
शस्त्र लाइसेंस के लिए सत्यापन तक नहीं किया जा रहा है
जाली हस्ताक्षर पर बेचने वाला गिरोह सक्रिय
अध्ययन में निकला शस्त्र विक्रेताओं और अपराधियों का गठजोड़
पुलिस ने 560 शस्त्र लाइसेंस की जांच और अध्ययन किया था. इसमें उत्तर-पूर्व के राज्यों विशेषकर नगालैंड से जारी लाइसेंस पर विशेष फोकस किया. इनमें मात्र 174 पर यूआइएन नंबर था. 98 लाइसेंसधारियों ने इसके लिए आवेदन किया हुआ था. जांच में शस्त्र विक्रेता-अपराधियों में गठजोड़ पाया गया है. लाइसेंस की ओडी रजिस्टर तक में एंट्री नहीं मिली.
एडीजी की रिपोर्ट पर ही हुआ था सत्यापन का आदेश
गृह विभाग के अपर सचिव गिरीश मोहन ठाकुर ने चार अक्तूबर को राज्य के सभी डीएम को शस्त्र लाइसेंस के सत्यापन के निर्देश दिये थे. यह एडीजी अमित कुमार की रिपोर्ट के आधार पर ही दिये गये हैं. सभी डीएम काे स्पष्ट निर्देश है कि वह शस्त्र लाइसेंस के सत्यापन में पुलिस मुख्यालय द्वारा बतायी गयी एसओपी के तहत यह कार्रवाई पूरी करें.
गुंजन खेमका के हत्यारोपित मस्तु का बन गया लाइसेंस
हाजीपुर औद्योगिक थाना क्षेत्र में 21 दिसंबर, 2018 को पटना के व्यवसायी गुंजन खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इस हत्या में कुख्यात अपराधी अभिषेक कुमार उर्फ मस्तु पर कई मामले दर्ज हैं. इसके बाद भी नगालैंड से उसने शस्त्र लाइसेंस जारी करा कर पिस्टल खरीद ली. एडीजी ने इसका अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है.
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