ePaper

बारिश से सब बेहाल : पहली बार पटना आ कर पढ़ने वाले स्टूडेंट्स का रो-रो कर बुरा हाल

Updated at : 01 Oct 2019 12:38 PM (IST)
विज्ञापन
बारिश से सब बेहाल : पहली बार पटना आ कर पढ़ने वाले स्टूडेंट्स का रो-रो कर बुरा हाल

राजेंद्र नगर और कंकड़बाग की गलियों तक नहीं पहुंच पा रही राहत सामग्री पटना : कई छात्रावासों और लॉजों में पानी घुस जाने के कारण पटना में रहने वाले स्टूडेंट्स को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है. स्टूडेंट्स अब पलायन करने लगे हैं. इस बीच, कई इलाकों में अब तक राहत के लिए […]

विज्ञापन

राजेंद्र नगर और कंकड़बाग की गलियों तक नहीं पहुंच पा रही राहत सामग्री

पटना : कई छात्रावासों और लॉजों में पानी घुस जाने के कारण पटना में रहने वाले स्टूडेंट्स को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है. स्टूडेंट्स अब पलायन करने लगे हैं. इस बीच, कई इलाकों में अब तक राहत के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है. अब भी दस हजार स्टूडेंट्स फंसे हुए हैं. क्योंकि राहत कार्य गलियों में नहीं पहुंच रहा है. जबकि राजेंद्र नगर के कई गलियों में काफी हॉस्टल और लॉज हैं. राजेंद्र नगर, कंकड़बाग के कई इलाकों में स्टूडेंट्स रहते हैं. इन इलाकों में पानी काफी अधिक है. जहां पानी अधिक जमा है वहां के लोग परेशान है. कुछ स्टूडेंट्स को कई निजी हॉस्टलों से पीयू के विभिन्न छात्र संगठनों ने रेस्क्यू करके हॉस्टलों और लॉज से निकाला. सोमवार को पीयू के आसपास के कई इलाकों के छोटी-छोटी गलियों में स्थिति हॉस्टल से छात्र-छात्राओं को बाहर निकाला गया. निकलने के साथ लोगों के चेहरे पर खुशी थी. उन सभी को ट्रैक्टर से मुख्य सड़क तक छोड़ा गया. रेस्क्यू किये गये कई लोग लॉज, हॉस्टल और अपने रूम छोड़कर अपने गांव लौट रहे हैं. घर लौटने वालों में छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक है.
पहली बार पटना आ कर पढ़ने वाले स्टूडेंट्स का रो-रो कर बुरा हाल
बाजार समिति के पीछे एक लॉज में रहने वाले इंद्रजीत का रो-रो कर बुरा हाल है. इसी वर्ष पटना आये हैं. घर से पहली बार दूर हुए हैं. इस स्थिति में उनको समझ में नहीं आ रहा है. तीन दिन से कुछ खाना तक नहीं मिला है. ज्यादा जान-पहचान नहीं होने के कारण अब तक कोई मदद नहीं मिली थी. सोमवार को पीयू के कुछ छात्रों द्वारा उन्हें मदद मिली. उनका मोबाइल तक चार्ज नहीं हो रहा था. दो दिन के बाद सोमवार को दस रुपये देकर मोबाइल चार्ज करवाया, तब जाकर उनके पास राहत पहुंची. उनका कहना है कि अंदर के गली में कोई मदद नहीं पहुंच रही है.
किसी तरह तीन दिनों के बाद हॉस्टल से निकला हूं. किसी तरह तीन दिनों के बाद हॉस्टल से निकला हूं. पीयू के कुछ छात्रों से मदद मिली, तब जा कर बाहर निकल पाया.
अभिषेक कुमार, राजेंद्र नगर
हॉस्टल में डर लग रहा था. तीन दिनों से कुछ भी खाने तक नसीब नहीं हुआ है. गलियों तक मदद के लिए कोई नहीं आ रहा है.
लिपिका प्रकाश, राजेंद्र नगर
10 रुपये देकर मोबाइल रिचार्ज करवाया, तब जाकर मदद मिली. तीन दिन तक कोई पूछने तक नहीं आया.
इंद्रजीत कुमार, बाजार समिति
काफी परेशानी से गुजर रही हूं. बारिश समाप्त होने के बाद राहत कार्य हॉस्टल और लॉज तक पहुंची है. मेरे आसपास कई लोगों को खाना तक नसीब नहीं हुआ है.
अवगिण खान, भिखना पहाड़ी
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन