पर्यावरण संरक्षण को जीवन शैली का हिस्सा बनाना होगा

Updated at : 08 Sep 2019 3:20 AM (IST)
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पर्यावरण संरक्षण को जीवन शैली का हिस्सा बनाना होगा

पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती का मुकाबला करने के लिए पर्यावरण संरक्षण को जीवन शैली का हिस्सा बनाना पड़ेगा. मंगोलिया की राजधानी उलानबाटर में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन पर्यावरण जागरूकता विषय पर डिप्टी सीएम ने अपनी चिंता व सुझाव से विभिन्न देशों के […]

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पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती का मुकाबला करने के लिए पर्यावरण संरक्षण को जीवन शैली का हिस्सा बनाना पड़ेगा. मंगोलिया की राजधानी उलानबाटर में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन पर्यावरण जागरूकता विषय पर डिप्टी सीएम ने अपनी चिंता व सुझाव से विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को अवगत कराया.

सुशील मोदी ने भारतीय संस्कृति में ही पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देते हुए कहा कि हिंदू और बौद्ध परंपरा में लोग वृक्ष, जीव-जंतु, पहाड़, नदी की पूजा करते हैं. यही कारण है कि भारत व बौद्ध देशों ने पर्यावरण को अन्य संस्कृतियों की तुलना में सबसे कम प्रदूषित किया है. केंद्र सरकार के जलशक्ति अभियान के साथ ही बिहार सरकार भी दो अक्तूबर से ‘ जल जीवन हरियाली’ अभियान प्रारंभ करने जा रही है.
बिहार के सभी पोखर, तालाब, आहर-पाइन को अतिक्रमणमुक्त कर तीन वर्षों में पुनर्जीवित किया जायेगा. राज्य में जल संचय व जल संरक्षण के साथ-साथ नदी, नहर, सड़क के किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जायेगा. पर्यावरण संरक्षण को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाया जायेगा.
छात्रों को नालंदा आने का दिया न्योता
डिप्टी सीएम ने मंगोलिया सरकार से आग्रह किया कि जिस तरह तीसरी- चौथी शताब्दी में मंगोलिया के छात्र प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए आते थे, उसी प्रकार भारत एवं बिहार सरकार द्वारा पुनर्स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय में मंगोलिया के छात्रों को अध्ययन हेतु भेजें. मंगोलिया सरकार के प्रतिनिधि ने डिप्टी सीएम से आग्रह किया कि बोधगया में मंगोलिया द्वारा स्थापित बुद्ध मंदिर को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण किया जाये. इस पर मोदी ने गया के डीएम को फोन किया. मोदी ने मंगोलिया के राष्ट्रपति को इस माह भारत यात्रा के दौरान बोधगया आने का भी अनुरोध किया.
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