पटना : जहां से बुद्ध गुजरे, उस जेठियन में होगी खुदाई

Updated at : 24 Aug 2019 9:08 AM (IST)
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पटना : जहां से बुद्ध गुजरे, उस जेठियन में होगी खुदाई

पुरातत्व निदेशालय ने मांगा एनओसी नवंबर से होगा काम पटना : भगवान बुद्ध ज्ञान प्राप्त करने के बाद जिस रास्ते से गुजरे जेठियन घाटी में उन इलाकों की खोज और खुदाई होगी. जेठियन में बौद्ध धर्म से जुड़े कई अवशेष पहले भी मिल चुके हैं. बिहार पुरातत्व निदेशालय ने गया-राजगीर के बीच में स्थित इस […]

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पुरातत्व निदेशालय ने मांगा एनओसी नवंबर से होगा काम
पटना : भगवान बुद्ध ज्ञान प्राप्त करने के बाद जिस रास्ते से गुजरे जेठियन घाटी में उन इलाकों की खोज और खुदाई होगी. जेठियन में बौद्ध धर्म से जुड़े कई अवशेष पहले भी मिल चुके हैं. बिहार पुरातत्व निदेशालय ने गया-राजगीर के बीच में स्थित इस महत्वपूर्ण जेठियन वैली और जहानाबाद के पुरातात्विक अवशेषों से आम लोगों को रू-ब-रू कराने के लिये नवंबर से खुदाई का काम शुरू करने का निर्णय लिया है. इसके लिये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से एनओसी का इंतजार है, इसके मिलते ही खुदाई और खोज का काम आरंभ हो जायेगा.
इस कारण से जेठियन में खुदाई व खोज : पुराविदों के मुताबिक जेठियन का आधा हिस्सा गया और आधा राजगीर में पड़ता है. इसी रास्ते से बुद्ध गये थे. जेठियन पहाड़ के समीप काफी दिनों तक बुद्ध रहे थे. जेठियन में बौद्ध धर्म से जुड़े कई अवशेष पहले भी मिल चुके है. इस क्षेत्र में बिहार पुरातत्व निदेशालय के पुराविद काफी समय से काम कर रहे है. इस कारण से पुरातत्व निदेशालय ने यहां अन्वेषण के लिये अनुमति मांगी है.
लाल पहाड़ी का दोबारा होगा उत्खनन
पुरातत्व निदेशालय ने लाल पहाड़ी में दोबारा उत्खनन शुरू करने के लिये भारत सरकार से अनुमति मांगी है. पूर्व में यहां की खुदाई में कई ऐसे पुरातात्विक अवशेष मिले, जिसके बाद वहां और खुदाई के लिये पुराविदों ने साइट का चयन किया है. साथ ही चिरांद में पुरातात्विक खोज के लिये दोबारा से डेक्कन विश्वविद्यालय, पुणे की टीम आयी है.
यह टीम दिसंबर तक साइट पर काम करेगी. लाल पहाड़ी के उत्खनन में मिले अवशेषों को आम लोग देख पायेंगे. इसके लिए कला संस्कृति और पर्यटन दोनों विभाग मिलकर काम करेगा. यहां से मिले अवशेषों को एक गैलरी बनाकर तत्काल में रखा जायेगा. इसलिए वहां शेड का निर्माण किया जायेगा.
यह भी होना है काम
नालंदा, राजगीर, जेठियन एवं कुर्कीहार को एक यूनिट मानकर पुरातात्विक दृष्टिकोण से और विकसित किया जायेगा. इसके लिये विभागीय अधिकारियों को
पुरातत्व से जुड़े नये-नये साइट खोजने का दिशा-निर्देश दिया गया है. जेठियन-वैली के पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण एवं विकास के लिये योजना विकसित करने की योजना बनायी गयी है.
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