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पटना :बख्तियारपुर-ताजपुर परियोजना में फंसा पैसे का पेच, अब और लगेंगे दो साल

Updated at : 18 Aug 2019 8:47 AM (IST)
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पटना :बख्तियारपुर-ताजपुर परियोजना में फंसा पैसे का पेच, अब और लगेंगे दो साल

पटना : उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली राज्य की महत्वाकांक्षी बख्तियारपुर-ताजपुर परियोजना में पैसे का पेच फंस गया है. यदि यह पेच सुलझा कर तेजी से काम शुरू किया जाये, तब भी इसे पूरा होने में करीब दो साल लगेंगे. पैसे की व्यवस्था के लिए एक फंड बनाने का प्रस्ताव है. इसे जल्द […]

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पटना : उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली राज्य की महत्वाकांक्षी बख्तियारपुर-ताजपुर परियोजना में पैसे का पेच फंस गया है. यदि यह पेच सुलझा कर तेजी से काम शुरू किया जाये, तब भी इसे पूरा होने में करीब दो साल लगेंगे. पैसे की व्यवस्था के लिए एक फंड बनाने का प्रस्ताव है.

इसे जल्द ही राज्य कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजा जायेगा. इसके बाद पैसे की व्यवस्था होते ही तेजी से काम पूरा होने की संभावना है. फिलहाल इस परियोजना का करीब आधा काम ही हुआ है. इस परियोजना को पूरा करने के लिए 31 जुलाई, 2019 का समय तय किया गया था.

पथ निर्माण विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह परियोजना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर वर्ष 2011 में शुरू हुई थी. वहीं गंगा पर बन रहे बख्तियारपुर-ताजपुर पुल का काम पहले वर्ष 2016 में ही पूरा होना था. इसे बनाने की गति देखते हुए इसका समय बढ़ाकर वर्ष 2019 कर दिया गया. ऐसे में दोबारा समय बढ़ाने पर भी परियोजना का काम अधूरा है.

पैसे की कमी है मुख्य वजह : इस परियोजना की लागत करीब 15 अरब 99 करोड़ 97 लाख रुपये आने की संभावना है. पीपीपी मोड होने के कारण पैसे की व्यवस्था निर्माण एजेंसी को ही करनी थी. बाद में वह एजेंसी टोल टैक्स के माध्यम से अपनी लागत वसूल कर लेती.

एजेंसी ने अपना पैसा लगाया, लेकिन उसे बैंक से आर्थिक मदद नहीं मिली. इस कारण काम रुक गया. बख्तियारपुर-ताजपुर परियोजना में करीब 5.52 किमी लंबा पुल और 45.74 किमी लंबा एप्रोच रोड बनना था. इस पुल की चौड़ाई करीब 28 मीटर होगी.

इसे बनने से उत्तर और दक्षिण बिहार के लोगों को सड़क यातायात की सुविधा में बढ़ोतरी होगी.

क्या कहते हैं अधिकारी

बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड के सीजीएम संजय कुमार ने कहा कि एजेंसी को बैंक से आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है. इसलिए काम की गति धीमी है. ऐसे में एनएचएआइ के फंड इकट्ठा करने वाली एक पॉलिसी के तर्ज पर विचार किया जा रहा है. इससे संंबंधित प्रस्ताव पर राज्य कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इसे लागू किया जायेगा. इस परियोजना को पूरा करने में करीब दो साल लगेंगे.

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