NMC बिल के विरोध में राजधानी समेत कई बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों ने की हड़ताल, OPD ठप, मरीज बेहाल

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना : राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) बिल के विरोध में आज चौथे दिन भी डॉक्टर हड़ताल पर हैं. राजधानी के बड़े अस्पतालों पीएमसीएच, आइजीआइएमएस, एनएमसीएच, एम्स समेत गया के एएनएमसीएच में भी डॉक्टरों ने ओपीडी सेवा ठप रखी. हालांकि, इमरजेंसी और आईसीयू सेवा को हड़ताल से अलग रखा.

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के समर्थन में डॉक्टर हड़ताल पर हैं. हालांकि, पीएमसीएच के अधीक्षक ने कहा है कि जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल की सूचना शुक्रवार को ही दे दी थी. इसके बाद जिला प्रशासन और सिविल सर्जन को पत्र भेज कर 50 चिकित्सकों की मांग की गयी है. अस्पताल में मरीजों के इलाज पर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ेगा. वहीं, डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से मरीज परेशान दिखें. कई जगह डॉक्टर हड़ताल में शामिल नहीं होकर मरीजों का इलाज करने की कोशिश की. लेकिन, उन्हें काम करने से रोका गया. शनिवार की सुबह आठ बजे से ओपीडी में मरीजों को देखने का काम शुरू हुआ. करीब नौ बजे तक पीएमसीएच में लगभग हजार मरीजों को देखने के बाद हड़ताल का समर्थन कर रहे चिकित्सकों के दबाव के कारण इलाज रोक देना पड़ा. अस्पताल के अधीक्षक का कहना है कि मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों की सेवा बाधित करनेवालों पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी.

NMC बिल के विरोध में राजधानी समेत कई बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों ने की हड़ताल, OPD ठप, मरीज बेहाल

मालूम हो कि नेशनल मेडिकल कमीशन के बिल के विरोध में पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी. जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने इस संबंध में अधीक्षक को लिखित पत्र शुक्रवार को ही सौंप दिया था. मेडिकल छात्रों ने बिल की कॉपी जला कर विरोध प्रदर्शन किया था. संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुके नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) बिल के खिलाफ हड़ताल कर रहे डॉक्टरों का सबसे अधिक विरोध बिल में मौजूद धारा 32 और एग्जिट टेस्ट को लेकर है. डॉक्टरों कहना है कि इस बिल की मौजूदा धारा-32 के तहत छह माह का ब्रिज कोर्स कर चिकित्सा की पढ़ाई नहीं करनेवाले करीब 3.5 लाख लोगों को भी लाइसेंस दे दिया जायेगा. इससे वे भी एलोपैथ चिकित्सा से मरीजों का इलाज शुरू कर देंगे. ऐसे में मरीजों की जान खतरे में पड़ेगी. आइएमए के वरीय उपाध्यक्ष डॉ अजय कुमार का कहना है कि बिल के मुताबिक अब आयुर्वेद, यूनानी डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और पारा मेडिकल कर्मियों को भी एलोपैथ दवाओं के साथ प्रैक्टिस करने का सर्टिफिकेट मिल जायेगा.

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