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पटना :नाला रोड बनेगा ट्रैफिक फ्री जोन

Updated at : 03 Aug 2019 9:33 AM (IST)
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पटना :नाला रोड बनेगा ट्रैफिक फ्री जोन

पटना :नाला रोड ट्रैफिक फ्री जोन बनेगा. ट्रैफिक एसपी अजय कुमार पांडेय ने बताया कि बेली रोड और अनिसाबाद चितकोहरा रोड के ट्रैफिक परिचालन को सुगम बनाने के बाद ट्रैफिक पुलिस राजधानी के कुछ ऐसे क्षेत्रों को ट्रैफिक फ्री जोन घोषित करेगी, जहां पार्किंग नहीं है. पटना में ऐसी 16 सड़कें और बाजार हैं, जहां […]

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पटना :नाला रोड ट्रैफिक फ्री जोन बनेगा. ट्रैफिक एसपी अजय कुमार पांडेय ने बताया कि बेली रोड और अनिसाबाद चितकोहरा रोड के ट्रैफिक परिचालन को सुगम बनाने के बाद ट्रैफिक पुलिस राजधानी के कुछ ऐसे क्षेत्रों को ट्रैफिक फ्री जोन घोषित करेगी, जहां पार्किंग नहीं है. पटना में ऐसी 16 सड़कें और बाजार हैं, जहां वाहनोंं को पार्क करने की बिल्कुल जगह नहीं है. ऐसे में वहां आने-जाने वाले लोग दुकानों के सामने की सड़क पर वाहन लगाते हैं, जिससे सड़कें संकरी हो जाती हैं और बराबर जाम लगता है. इससे निबटने के लिए ही ट्रैफिक पुलिस ने ऐसे क्षेत्रों को ट्रैफिक फ्री जाेन घोषित करने की योजना बनायी है. हालांकि इसमें दो महीने का समय लग सकता है.
हाइकोर्ट ने भी दिया था सुझाव : पिछले दिनों शहर के जाम की समस्या पर सुनवाई करते समय हाइकोर्ट ने भी ऐसे क्षेत्रों में वाहनों के प्रवेश को रोकने और उन्हें दूर स्थित पार्किंग स्थल पर खड़े करने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया था.
नाला रोड को इसके अंतर्गत सबसे पहले ट्रैफिक फ्री जोन घोषित किया जायेगा, क्योंकि वहां वाहनों की पार्किंग की समस्या सबसे अधिक है. वहां सड़क के दोनों तरफ दुकानों की शृंखला है. सामने के फुटपाथ के एक बड़े हिस्से पर भी दुकानदार अपने सामानों को फैला कर उस पर काबिज हाे चुके हैं. ऐसे में खरीदारी के लिए आने वाले लोगों के पास सड़क पर वाहन खड़ा करने के सिवा कोई चारा नहीं होता है.
ठनके से बचाने को बनेगा सुरक्षा कवच
ठनका गिरने की सटीक सूचना के लिए विशेष सेंसर सिस्टम लगाने की तैयारी
कर्नल संजय कुमार ने दिये सुझाव
– बिहार मैपिंग के जरिये रिस्क जोन बनाने पर जोर दिया. इसके आधार पर भौगोलिक दशाओं के हिसाब से सुरक्षित क्षेत्र बनाये जा सकें.
– स्कूल, अस्पताल आदि सभी जगहों पर जागरूकता बढ़ायी जाये.
– बैक कंट्री लाइटनिंग रिस्क मैनेजमेंट प्रोग्राम शुरू करने के लिए कहा.
लोगों को देना पड़ रहा है भारी मुआवजा
दरअसल ठनका गिरने से होने वाली प्रति मौत पर चार लाख बतौर राहत राशि के रूप में शासन देता है. इसी साल अभी तक हुई 171 मौतों पर सरकार को 6़84 करोड़ से अधिक की राहत राशि उनके परिजनों को देनी पड़ सकती है.
विशेष फैक्ट : बिहार में एक दशक पहले तक बिजली गिरने से 40-50 किलो एंपीयर की विद्युत प्रवाहित होती थी. अब यह बढ़ कर 120 किलो एंपियर हो गयी है. इसी तरह लाइटनिंग के दौरान ताप उत्सर्जन 30 हजार सेंटीग्रेड से बढ़कर 60 हजार सेंटीग्रेड हो गया है.
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