पटना : देहदान कर नश्वर शरीर का करें सर्वोत्तम उपयोग : मोदी
Updated at : 22 Jul 2019 9:23 AM (IST)
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पटना : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि इस नश्वर शरीर का सर्वोत्तम उपयोग नेत्रदान, अंगदान और देहदान है. इसके माध्यम से कोई व्यक्ति मृत्यु के बाद जल और दफन होकर नष्ट होने वाले शरीर से न सिर्फ दूसरों को जिंदगी दे सकते है. बल्कि, खुद भी अमरत्व को प्राप्त कर लेता है. […]
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पटना : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि इस नश्वर शरीर का सर्वोत्तम उपयोग नेत्रदान, अंगदान और देहदान है. इसके माध्यम से कोई व्यक्ति मृत्यु के बाद जल और दफन होकर नष्ट होने वाले शरीर से न सिर्फ दूसरों को जिंदगी दे सकते है.
बल्कि, खुद भी अमरत्व को प्राप्त कर लेता है. उन्होंने रविवार को शहर श्रीकृष्णपुरी पार्क में दधीचि देहदान समिति की तरफ से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया. इस दौरान पार्क में बड़ी संख्या में मॉर्निंग वॉकर्स मौजूद थे. उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि नेत्रदान, अंगदान और देहदान के लिए अधिक से अधिक संख्या में संकल्प पत्र भरने तथा दधीचि देहदान समिति के इस अभियान को आंदोलन बनाने की भी बात कही.
उन्होंने कहा कि नेत्रदान के प्रति जागरूकता के कारण ही पिछले चार साल में आइजीआइएमएस में 397 लोगों ने नेत्रदान किया है और अब तक 367 लोगों को कॉर्निया का प्रत्यारोपण कर उनकी जिंदगी को रौशन किया गया है. मेडिकल साइंस की तमाम तरक्की के बावजूद नेत्र, हृदय, किडनी, लिवर आदि का कृत्रिम तौर पर निर्माण संभव नहीं हो पाया है.
बल्कि, किसी मानव की तरफ से देकर ही किसी की जान बचायी जा सकती है. डिप्टी सीएम ने कहा कि इस देश में देहदान और अंगदान की प्राचीन परंपरा रही है. दानवों के संहार के लिए महर्षि दधीचि ने जहां अपनी अस्थियों का तो एक पक्षी को बचाने के लिए राजा शिबि ने अपने शरीर का मांस काट कर बहेलिया को दे दिया था.
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