पटना : शिक्षकों के वेतन की राशि कटौती नहीं करे केंद्र, शत-प्रतिशत पैसे दे : नीतीश कुमार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Jun 2019 6:55 AM (IST)
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नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रखी मांग पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नीति आयोग की बैठक में शनिवार को समग्र शिक्षा योजना के तहत केंद्र सरकार से शिक्षकों के वेतन मद में पूर्व से मिल रही राशि में किसी भी प्रकार की कटौती का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि […]
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नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रखी मांग
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नीति आयोग की बैठक में शनिवार को समग्र शिक्षा योजना के तहत केंद्र सरकार से शिक्षकों के वेतन मद में पूर्व से मिल रही राशि में किसी भी प्रकार की कटौती का विरोध किया है.
उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा के अधिकार अधिनियम को शत-प्रतिशत लागू करने की दिशा में शत-प्रतिशत आर्थिक मदद देने की मांग रखी. उन्होंने कहा कि 2018-19 में 85 हजार और 2019-20 में 89 हजार शिक्षकों का वेतन केंद्र सरकार ने मंजूर नहीं किया है. इस कारण राज्य पर सात हजार करोड़ का आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
हाल के दिनों में सरकार ने शिक्षकों की वेतन राशि में बढ़ोतरी की है, जिससे यह बोझ और बढ़ेगा. पहले प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के शिक्षकों के लिए प्रतिमाह साढ़े 22 हजार रुपये प्रति शिक्षकों की दर से केंद्र सरकार राज्य को मुहैया कराती थी. अब इसे घटाकर प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए 15 हजार और मध्य विद्यालय के शिक्षकों के लिए 20 हजार निर्धारित कर दिया है. हाइस्कूल के शिक्षकों के लिए पचीस हजार प्रतिमाह वेतन निर्धारित किया गया है. जबकि, राज्य सरकार इन शिक्षकों को औसत तीस हजार रुपये मासिक वेतन दे रही है.
स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड में हिस्सेदारी निर्धारित
बिहार 4.2%
महाराष्ट्र 13.4%
राजस्थान 10%
मध्य प्रदेश 7.9%
तमिलनाडु 6.1%
यूपी 6.1%
गुजरात 6.4%
बिहार में पहले 1200-1500 मिमी वर्षा प्रतिवर्ष हुआ करती थी. आइएमडी बिहार शाखा के मुताबिक राज्य में पिछले 30 वर्षों का औसत वर्षा 1017 मिमी है. पिछले 11 वर्षों का औसत मात्र 884 मिमी है. पिछले वर्ष का औसत मात्र 771.3 मिमी है.
ज्यादा वर्षा होने पर वाणसागर और रिहंद बांध से अत्यधिक पानी छाेड़ दिया जाता है
पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ बटाईदारों को भी मिले
प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना का लाभ राज्य के बटाईदारों और जोतेदारों को भी मिलना चाहिए. उन्होंने इस योजना का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार में बहुत सारे भू-स्वामी खुद खेती नहीं करते, बल्कि अपनी जमीन को बटाई पर या पट्टे पर दूसरे किसानों को दे देते हैं.
राज्य सरकार डीजल अनुदान, कृषि इनपुट, राज्य फसल सहायता योजनाओं का लाभ रैयत और गैर रैयत किसानों को समान रूप से प्रदान कर रही है. उन्होंने कहा कि इससे वास्तविक रूप से खेती करने वाले किसानों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा.
मध्यप्रदेश और यूपी नहीं पालन कर रहे वाणसागर समझौते का मानक
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोन नदी के मामले में मध्य प्रदेश और यूपी द्वारा कभी भी जल बंटवारे से संबंधित वाणसागर समझौते का पालन नहीं किया जा रहा है. जब भी सोन नदी बेसिन में अधिक वर्षा होती है, तो वाणसागर और रिहंद बांध से अत्यधिक पानी छाेड़ दिया जाता है. जिसके कारण बिहार में बाढ़ आती है और भारी नुकसान होता है.
मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत सभी पेंशनधारियों के लिए राशि केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराने की मांग की. उन्होंने बताया कि राज्य में 45 लाख पेंशनधारी हैं. केंद्र सरकार मात्र 29.90 लाख के लिए ही अंशदान राशि मुहैया करायी है. बाकी के लिए समस्त राशि राज्य सरकार को खुद वहन करना होता है.
रसोइये का मानदेय बढ़े, केंद्र करे वहन
सीएम ने रसोईसा के मानदेय में भी वृद्धि करने तथा इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार को उठाने का अनुरोध किया. मुख्यमंत्री ने किसानों को खेती कार्य के लिए ऋण प्राप्त करने के िलए पूर्व से बीमा कराने की शर्त से मुक्त करने का सुझाव दिया.
उन्होंने कहा कि इससे राज्य के किसानों को अतििरक्त प्रीमियम का आर्थिक भार नहीं उठाना पड़ेगा. साथ ही राज्य सरकार को कृषि बीमा योजनाओं में प्रीमियम की राशि का अंशदेना नहीं देना होगा. उन्होंने राज्य अापदा मोचन कोष के 25 प्रतिशत की सीमा को शिथिल करते हुए 2015 के पूर्व की तरह जरूरत के मुताबिक राज्य को राशि मिलने की वकालत की.
आपदा से हुई क्षति व एसडीआरएफ में बिहार की राशि
2015-16राज्य सरकार का खर्च
एसडीआरएफ में था
1293 करोड़
469 करोड़
2016-17राज्य सरकार का खर्च
1392 करोड़
एसडीआरएफ में था
492 करोड़
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