पटना : घर के मुखिया का तनाव घातक, परिचित पर रखें नजर
Updated at : 12 Jun 2019 9:08 AM (IST)
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पटना : भाग-दौड़ भरी जिंदगी में खून के रिश्ते भी खूनी हो जा रहे हैं. ऐसे कई मामले हाल के दिनों में सामने आये. मनोचिकित्सक डॉ बिंदा सिंह बताती हैं कि जिनके पास सुख-सुविधाओं की कमी नहीं होती, उनके लिए छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े बन जाते हैं. कंफर्ट लेवल बाधित होने पर ही इमोशनली इतना […]
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पटना : भाग-दौड़ भरी जिंदगी में खून के रिश्ते भी खूनी हो जा रहे हैं. ऐसे कई मामले हाल के दिनों में सामने आये. मनोचिकित्सक डॉ बिंदा सिंह बताती हैं कि जिनके पास सुख-सुविधाओं की कमी नहीं होती, उनके लिए छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े बन जाते हैं.
कंफर्ट लेवल बाधित होने पर ही इमोशनली इतना अधिक प्रभावित होते हैं कि कोई बड़ा कदम उठाने से भी नहीं हिचकते. आम तौर पर ऐसे कदम प्री-प्लांड नहीं होते, बल्कि उत्तेजना व आक्रोश में उठाये जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार परिवार के मुखिया का तनाव में आ जाना काफी घातक है. ज्यादा डिप्रेशन में आने पर वह मान बैठता है कि इस समस्या का समाधान हो ही नहीं सकता. ऐसे में कई बार वह परिवार के अन्य सदस्यों के साथ आत्महत्या जैसे कदम उठा लेता है. इम्पल्सिव सुसाइड में व्यक्ति त्वरित निर्णय लेता है जबकि दूसरे डिप्रैसिव सुसाइड में धीरे-धीरे गहरी निराशा जकड़ लेती है. डिप्रेसिव सुसाइड के आर्थिक, मानसिक, अकादमिक, प्रोफेशनल, रिलेशनशिप, पारिवारिक झगड़े या विवाहेत्तर संबंध आदि कारण हो सकते हैं.
डिप्रेशन को दूर करने के लिए जरूरी है कि हम परिवार, दोस्त, रिश्तेदारों के साथ लगातार बात करें. बड़े-बुजुर्गों का परामर्श लें. अपने परिवार में या फिर दोस्तों-यारों के साथ मिल-बैठकर कुछ देर बातचीत में बिताये. इससे डिप्रेशन का स्तर तेजी से गिरेगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में प्रतिवर्ष लगभग आठ लाख लोग आत्महत्या करते हैं, यानी प्रति 40 सेकेंड में एक व्यक्ति खुद की जान ले लेता है.
डिप्रेशन के लक्षण व बचाव के तरीके
नींद और भूख का कम या ज्यादा होना
मन अमूमन उदास या चिड़चिड़ाहट भरा होना
काम में मन नहीं लगना, नकारात्मकता बढ़ना
जिन कामों में रुचि थी, उनमें भी मन न लगना
आत्मवश्विास में कमी, आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने का ख्याल आना ऐसे रखें अपने परिवार का ख्याल परिवार के बीच नहीं होने दें कम्युनिकेशन गैप ये लक्षण दिखे तो उससे सहजता से बात कर उचित समाधान पर फोकस करना चाहिए चिकित्सकीय सलाह और विशेष विशेषज्ञ की मदद से समस्या समाधान तक पहुंचना चाहिए
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