आयुर्वेद व यूनानी डाॅक्टरों की जांच शुरू
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :30 May 2019 3:55 AM (IST)
विज्ञापन

शशिभूषण कुंवर, पटना : पहली बार राज्य की बिहार राज्य आयुर्वेदिक यूनानी परिषद को कसौटी पर चढ़ाया जा रहा है. आजादी के बाद से इस संस्था में आयुर्वेदिक और यूनानी डाॅक्टरों का पंजीकरण होता है. यह पहला अवसर है, जब वास्तविक रूप से सेवा देने वाले आयुर्वेदिक और यूनानी डाॅक्टरों की पहचान होगी. काउंसिल में […]
विज्ञापन
शशिभूषण कुंवर, पटना : पहली बार राज्य की बिहार राज्य आयुर्वेदिक यूनानी परिषद को कसौटी पर चढ़ाया जा रहा है. आजादी के बाद से इस संस्था में आयुर्वेदिक और यूनानी डाॅक्टरों का पंजीकरण होता है. यह पहला अवसर है, जब वास्तविक रूप से सेवा देने वाले आयुर्वेदिक और यूनानी डाॅक्टरों की पहचान होगी. काउंसिल में पहली बार रजिस्ट्रेशन कराने वाले डाॅक्टरों के पंजीकरण को नवीकरण करने की पहल की जा रही है. फिलहाल इसमें 40 हजार आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सक रजिस्टर्ड हैं.
इसके पूर्व 2016 में बड़ी संख्या में वैसे डॉक्टरों की पहचान की गयी थी, जिनका फर्जी निबंधन पाया गया था. इसके चलते केंद्रीय चिकित्सा परिषद के चुनाव को भी रोक दिया गया था. इनके पते पर भेजे गये पत्रों से इस बात का खुलासा हुआ था. इसकी स्थिति यह है कि यहां पर एक ही पते पर 1500 डाॅक्टरों ने अपना नामांकन करा लिया है.
बिहार राज्य आयुर्वेदिक यूनानी परिषद में अब तक आयुर्वेदिक डिग्री धारण करने वाले 36 हजार डॉक्टरों का निबंधन हुआ है. यूनानी डिग्री लेने वाले पांच हजार हकीमों का भी यहां पंजीकरण किया गया है.
औसतन हर साल यहां पर बीएएचएम की डिग्री लेने वाले 150-200 डाॅक्टरों का निबंधन होता है. जबकि, यूनानी डिग्री पाने वाले 100-150 हकीम भी यहां निबंधन कराते हैं. आयुष की डिग्री लेने वाला कोई भी डॉक्टर कहीं भी मरीजों का इलाज नहीं कर सकता है.
स्थिति यह है कि एक बार पंजीकरण कराने के बाद हजारों ऐसे चिकित्सक हैं जो या तो मर चुके हैं नहीं तो वह सेवा देने के काबिल नहीं रह गये हैं. ऐसे चिकित्सकों की संख्या भी अधिक है, जो पंजीकरण कराने के बाद राज्य छोड़कर दूसरे राज्यों में चले गये हैं.
यहां पर 1993 के पहले आयुर्वेद रत्न और आयुर्वेद विशारद की डिग्री वाले चिकित्सक भी अपना पंजीकरण करा चुके हैं. राज्य सरकार 1993 के बाद उनकी डिग्री को ही अमान्य कर दी है. परिषद के पास अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि वास्तव में राज्य में वैध रूप से कितने आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सक सेवा दे रहे हैं.
रिन्युअल के लिए दिया गया तीन माह का वक्त : आयुर्वेदिक व यूनानी डाॅक्टरों को अपने निबंधन को रिन्युअल कराने के लिए तीन माह का वक्त दिया गया है. जो चिकित्सक अपने निबंधन का नवीकरण करा लेंगे उनका निबंधन रह जायेगा.
बिना निबंधन वाले डाॅक्टरों का निबंधन लिस्ट से नाम हटा दिया जायेगा. पहली बार निबंधन कराने के लिए डाॅक्टरों को चार हजार का शुल्क लगता है, जबकि नवीकरण के लिए एक हजार का शुल्क देना पड़ता है.
पांच साल से कर्मियों को नहीं मिला वेतन
बिहार राज्य आयुर्वेदिक यूनानी चिकित्सा परिषद में काम करने वाले कर्मचारियों को पांच साल से वेतन नहीं मिला है. परिषद को अपना खर्च खुद उठाना पड़ता है और आय का साधन समाप्त हो चुका है. यहां पर रजिस्ट्रार के अलावा सात कर्मचारी काम करते हैं. निबंधन व रिन्युअल से मिलने वाली राशि से ही उनका वेतनभत्ता दिया जायेगा.
सरकार के आदेश पर नवीकरण का शुरू हुआ काम
बिहार राज्य आयुर्वेदिक यूनानी चिकित्सा परिषद के रजिस्ट्रार डाॅ अरुण कुमार सिंह ने बताया कि सरकार के आदेश के बाद पहली बार निबंधन के रिन्युअल किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से वास्तविक संख्या सामने आ जायेगी. उन्होंने बताया कि रिन्युअल नहीं कराने वाले डाॅक्टरों को एक मौका और मिलेगा. समय सीमा समाप्त होने के बाद अगर वह निबंधन के नवीकरण के लिए आते हैं , तो वैध दस्तावेज दिखाने के बाद उनको फिर से निबंधन शुल्क के साथ उनके निबंधन का नवीकरण किया जायेगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




