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मोकामा : कॉलेज नहीं छोड़ा तो छात्रों को पीटा

Updated at : 12 Apr 2019 8:48 AM (IST)
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मोकामा : कॉलेज नहीं छोड़ा तो छात्रों को पीटा

एनआइटी शिलांग में बिहार-यूपी के छात्रों से मारपीट का मामला मोकामा : एनआइटी शिलांग में पढ़ रहे बिहार-यूपी के छात्रों को वहां के लोगों ने कॉलेज छोड़ने की धमकी दी थी. छात्रों ने इसकी परवाह नहीं की तो दहशत फैलाने के लिए मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया. मारपीट में घायल एनआइटी शिलांग के […]

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एनआइटी शिलांग में बिहार-यूपी के छात्रों से मारपीट का मामला
मोकामा : एनआइटी शिलांग में पढ़ रहे बिहार-यूपी के छात्रों को वहां के लोगों ने कॉलेज छोड़ने की धमकी दी थी. छात्रों ने इसकी परवाह नहीं की तो दहशत फैलाने के लिए मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया.
मारपीट में घायल एनआइटी शिलांग के मोकामा के शिवनार निवासी छात्र प्यारे मोहन ने बताया कि छह अप्रैल को धमकी मिलने पर बिहार-यूपी के कई छात्रों ने आपत्ति की थी. जानकारी के बाद भी प्रशासन ने कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा. वहीं, दूसरे ही दिन साजिश के तहत बड़ी घटना को अंजाम दिया गया. इसमें बिहार-यूपी के अधिकतर छात्र घायल हो गये. वहां के छात्र संगठनों को कॉलेज व स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग मिल रहा है ताकि दूसरे प्रदेशों के छात्रों की संख्या कम हो. इसका फायदा स्थानीय छात्रों को मिल सके. मेघालय के छात्र संगठनों का मकसद दूसरे प्रदेशों के छात्रों का एनआइटी में नामांकन रोकने का है.
मोकामा. शिलांग (मेघालय) में मारपीट में घायल प्यारे मोहन के परिजन बोले कि बिहार के छात्रों के साथ मारपीट की पहले भी घटना घट चुकी है, लेकिन इस पर ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है. इस घटना के बाद एक बार फिर इलाके के लोग खौफजदा हैं, जिनके बच्चे दूसरे प्रदेशों में तकनीकी पढ़ाई कर रहे हैं.
यही हालात रहे हजारों छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को विवश हो जायेंगे. मोकामा के शिवनार निवासी चंद्रचूड़ सिंह के पुत्र प्यारे मोहन को शिलांग में स्थानीय लोगों का कोपभाजन बनना पड़ा था. उसने आपबीती सुनाते हुए कहा कि मारपीट की घटना के बाद किसी तरह अस्पताल पहुंचा, लेकिन थोड़ी ही देर में वहां भी स्थानीय लोग आ धमके. वह जांच रिपोर्ट व अन्य जरूरी कागजात छोड़कर ही जान बचाकर अस्पताल से भागा. शिलांग में अस्पताल के कर्मचारियों ने भी भेदभाव किया. उसकी मां रेखा देवी सदमे में है. कहा कि इस मामले में सरकार को विशेष पहल करनी चाहिए, लेकिन इसके विपरीत केवल मामले को दबाने का प्रयास चल रहा है. प्यारे मोहन का पटना में इलाज चल रहा है. इधर, उसका हाल जानने लोग उसके आवास पर पहुंचते रहे.
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