बोले नीतीश कुमार - बिजली पहुंची तो भूत का भय भागा और लालटेन ढिबरी भी खत्म

Updated at : 18 Jan 2019 7:18 AM (IST)
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बोले नीतीश कुमार - बिजली पहुंची तो भूत का भय भागा और लालटेन ढिबरी भी खत्म

सीतामढ़ी में पावर सब स्टेशन का शिलान्यास सीतामढ़ी : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार ने बिजली के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है. पहले लोग ढिबरी और लालटेन से ही काम चलाते थे. अंधेरे में बच्चा घर से बाहर नहीं निकले, इसलिए भूत का भय दिखाकर परिवार के लोग बच्चों को घर के […]

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सीतामढ़ी में पावर सब स्टेशन का शिलान्यास

सीतामढ़ी : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार ने बिजली के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है. पहले लोग ढिबरी और लालटेन से ही काम चलाते थे. अंधेरे में बच्चा घर से बाहर नहीं निकले, इसलिए भूत का भय दिखाकर परिवार के लोग बच्चों को घर के अंदर रखते थे. लेकिन, अब बिहार के हर घर बिजली पहुंच गयी और बिजली की रोशनी में भूत भी भाग गया और ढिबरी-लालटेन भी खत्म हो गया. बच्चे रात में पढ़ने लगे. मुख्यमंत्री गुरुवार को डुमरा प्रखंड के परमानंदपुर में 620 करोड़ से बननेवाले पावर सब स्टेशन के शिलान्यास के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे. इसका निर्माण पावर ग्रिड करा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 में राज्य में सिर्फ 700 मेगावाट बिजली की आपूर्ति होती थी. गांव तो छोड़ दीजिए, राजधानी पटना को भी जरूरत के हिसाब से बिजली नहीं मिलती थी.

5 अगस्त, 2012 को गांधी मैदान में हमने संकल्प लिया था कि बिजली की स्थिति में सुधार नहीं लायेंगे तो 2015 के चुनाव में वोट मांगने नहीं जायेंगे. बिजली को सात निश्चय कार्यक्रम से जोड़ा गया. गांव-गांव एवं टोले तक बिजली पहुंचाने के बाद 31 अक्तूबर, 2018 तक हर घर तक बिजली की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे 25 अक्तूबर, 2018 को पूरा कर लिया गया. लोग कल्पना भी नही करते थे कि उनके घरों तक बिजली पहुंच जायेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार में तीन बड़े पावर ग्रिड स्थापित करने का निर्णय लिया है. दो दिन बाद सहरसा में भी पावर ग्रिड का शिलान्यास होगा.

अब टोला को जोड़ा जा रहा सड़क से
सीएम ने कहा, हर गांव को सड़क से जोड़ने का काम पूरा हो चुका है. अब टोलों को सड़क से जोड़ा जा रहा है. बहुत से गांवों में जेठ के महीने में भी सड़क पर कीचड़ लगा रहता है. इसके निदान के लिए हर घर जल नल एवं पक्की नाली योजना चलाया जा रहा है. पहले सरकार का बजट 25 हजार करोड़ का होता था और वह भी खर्च नही होता था. इस साल का बजट 1.80 लाख करोड़ का है. मौके पर पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, सांसद रामकुमार शर्मा, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पावर ग्रिड के सीएमडी आइएस झा, ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अरूण कुमार वर्मा, पथ निर्माण के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, एमडी एसकेआर पुडलकट्टी व सीएम के ओएसडी गोपाल सिंह समेत अन्य मौजूद थे.
रसोईयों की मांग पर बोले: किसी के बहकावे में न आएं, अन्यथा नुकसान उठाइएगा
कार्यक्रम के दौरान मिड डे मिल बनाने वाली रसोईयाें की ओर से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठी तो मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने अंदाज में नसीहत दी. कहा कि हमें आपसे पूरी सहानुभूति है. लेकिन, यह केंद्र की योजना है और राज्य सरकार इसमें 40% से ज्यादा हिस्सेदारी दे रही है. आप किसी के बहकावे में न आएं. पूरी प्रतिबद्धता से बच्चों को स्वादिष्ट भोजन परोसें. संवेदनशील बनिए, अन्यथा नुकसान उठाइयेगा. हमें चुनाव के नतीजों की कोई परवाह नहीं है. किसी कार्यक्रम में व्यवधान और हंगामा ठीक नहीं है. महिला रसोईयाें का नेता पुरुष कैसे हो सकता है. उन्होंने महिला सशक्तीकरण के लिए उठाये गये कदमों की चर्चा करते हुए कहा कि हमने ही सबसे पहले पंचायतों व नगर निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया.
इस बार हम साथ, 2019 में फिर होगी मोदी सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2019 में केंद्र में फिर नरेंद्र मोदी की सरकार बनेगी और उनके ही प्रधानमंत्रित्व काल में परमानंदपुर पावर सब स्टेशन का उद्घाटन भी होगा. भाषण के दौरान ही उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री आरके सिंह की ओर इंगित करते हुए कहा- राजकुमार जी, चिंता मत कीजिए. इस पावर ग्रिड के उद्घाटन का मौका भी मिलेगा. 2019 के चुनाव के बाद केंद्र में फिर नरेंद्र मोदी की सरकार बनेगी. 2014 में जब हम साथ में नहीं थे तो भाजपा की सरकार बनी. अब तो हम भी साथ में हैं. इसके पहले आरके सिंह ने कहा कि 2021 तक यह ग्रिड तैयार हो जायेगा. जनता का साथ मिला तो, इसका उद्घाटन करने भी आयेंगे.
अब खेतों तक बिजली पहुंचाना है लक्ष्य : आरके
केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री आरके सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार दो योजनाएं शुरू करने वाली है. पहली घरों के बाद खेतों तक बिजली पहुंचाने की है. इसके लिए 15 हजार करोड़ मंजूर किये जा चुके हैं. दूसरी सोलर पंप की है. इससे बिजली का उत्पादन कर किसान पटवन करने के साथ ही शेष बिजली को ग्रिड से बेच सकेंगे.
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