पॉक्सो एक्ट मामला : बिहार की 313 पीड़िताओं को मिलेगा मुआवजा, पुलिस ने भेजा प्रस्ताव
Updated at : 30 Dec 2018 7:18 AM (IST)
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पटना : सरकार महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाली वारदातों पर सिर्फ शिकंजा का ही प्रयास नहीं कर रही है, बल्कि पीड़िताओं को राहत देने के लिए मुआवजे का भी प्रावधान किया है. यह मुआवजा जिला विधिक प्राधिकरण के माध्यम से पीड़िताओं को दिया जाता है. एडीजी सीआइडी विनय कुमार ने बताया कि बिहार […]
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पटना : सरकार महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाली वारदातों पर सिर्फ शिकंजा का ही प्रयास नहीं कर रही है, बल्कि पीड़िताओं को राहत देने के लिए मुआवजे का भी प्रावधान किया है.
यह मुआवजा जिला विधिक प्राधिकरण के माध्यम से पीड़िताओं को दिया जाता है. एडीजी सीआइडी विनय कुमार ने बताया कि बिहार में इस साल (अक्तूबर तक) पॉक्सो एक्ट में 313 मामलों में मुआवजे का प्रस्ताव जिला विधिक प्राधिकरणों को भेजा गया है. इस साल (जुलाई तक) 59 पीड़िताओं को मुआवजे के रूप में 81 लाख रुपये दिये जा चुके हैं. पिछले साल पॉक्सो एक्ट के 33 मामलों में 57,26000 रुपये मुआवजे के रूप में दिये गये थे.
वर्ष 2012 में एक विशेष कानून बनाया गया था, जो बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार और कुकर्म जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करता है. अब इसके तहत मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है. 28 दिसंबर को ही केंद्रीय कैबिनेट ने पॉक्सो एक्ट को लेकर यह अहम फैसला दिया था.
कैबिनेट ने 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ दुष्कर्म और हत्या की गंभीर घटनाओं में दोषी को मौत की सजा पर पॉक्सो एक्ट में संशोधन को मंजूरी दे दी. साथ ही, बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में दंड को और भी कठोर बनाने के लिए सख्त उपाय किये हैं.
बिहार पहला राज्य
एडीजी सीआइडी विनय कुमार ने दावा किया कि पॉक्सो एक्ट में सजा दिलाने वाला पहला राज्य बिहार है. उन्होंने बताया कि 19 अक्तूबर, 2013 को जमुई के चंद्रमंडी में दुराचार और हत्या का केस दर्ज कराया गया था. इसमें फांसी की सजा सुनायी गयी थी. इसी तरह कानून बनने के मात्र 22 दिन के भीतर पॉक्सो एक्ट में दानापुर में मुकदमा दर्ज किया गया था. यह बिहार का पहला मामला था. बकौल विनय कुमार, पॉक्सो एक्ट में वर्ष 2017 में 108 मामलों में सजा हुई थी.
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