पटना : समानता मानवाधिकार की पहली सीढ़ी

Updated at : 11 Dec 2018 8:24 AM (IST)
विज्ञापन
पटना : समानता मानवाधिकार की पहली सीढ़ी

राज्य मानवाधिकार आयोग के 10वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा पटना : राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि मानवाधिकार की पहली सीढ़ी समानता है. हमारे धर्म और संस्कृति में इसका विशेष तौर पर ध्यान रखा गया है. हमारी संस्कृति में वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा आत्मसात है. राज्यपाल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के […]

विज्ञापन
राज्य मानवाधिकार आयोग के 10वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा
पटना : राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि मानवाधिकार की पहली सीढ़ी समानता है. हमारे धर्म और संस्कृति में इसका विशेष तौर पर ध्यान रखा गया है. हमारी संस्कृति में वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा आत्मसात है.
राज्यपाल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के गठन के 10 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.
मानवाधिकार के संरक्षण को न्याय व्यवस्था हो सरल : राज्यपाल ने कहा कि हमारे यहां गरीब और फटेहाल व्यक्ति को भी दरिद्र नारायण की संज्ञा दी गयी है. कोई कितना भी गरीब हो, लेकिन उसका पहला अधिकार है कि वह मानव है.
हमारी संस्कृति में इसकी व्यापकता मिलती है, लेकिन हकीकत में इसका पालन नहीं हो पाता है. आज अधिकार पाने में काफी समस्या आती है. एक व्यक्ति को छोटे से जमीन के टुकड़े के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि न्याय की व्यवस्था सरल होनी चाहिए. इससे भी मानवाधिकार हनन काफी हद तक रुकेगा. मानवाधिकार के संरक्षण के लिए इसके क्रियान्वयन को बेहतर तरीके से करना जरूरी है. इसके लिए कानून का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से करने के अलावा समाज में चेतना लाने और बुद्धिजीवियों को सामने आने की जरूरत है.
गांधीवादी सोच से ही मानवाधिकार सुरक्षित : उन्होंने कहा कि मानव सम्मान में सबसे ज्यादा व्यावहारिकता इस्लाम धर्म में दिखता है.एक पंक्ति में खड़े होकर सब नमाज पढ़ते हैं. हालांकि इसमें भी कई समुदाय ऐसे हैं, जो इसका सही से पालन नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया में क्रांति के नाम पर कई रक्तपात हुए है, यहां इस तरह के रक्तपात नहीं हुए. इसका मुख्य कारण आज भी मूल्यों का जीवित रहना है. गांधीजी के 150वीं वर्षगांठ के मौके पर फिर से उनकी प्रासंगिकता लौट रही है. आज देश और दुनिया में उनकी विचारधारा को अपनाया जा रहा है. गांधीवादी सोच से ही मानवाधिकार को संरक्षित और सुरक्षित रखा जा सकता है.
इस अवसर पर न्यायाधीश मानधाता सिंह ने कहा कि गांधी और मानवाधिकार एक दूसरे के परिचायक हैं. 78 फीसदी लोग इसमें विश्वास करते हैं.
न्यायाधीश राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि मानवाधिकार को समझने की जरूरत है. पूरे समाज में जागरूकता पैदा करना होगा. जरूरत और अधिकार के अंतर को समझना होगा. मंगल ग्रह पर पहुंचने में एक महीना लगता है, लेकिन एक केसका फैसला आने में कई वर्ष लग जाते हैं. यह बड़ी विडंबना है. इसे दूरकरने की जरूरत है. इस तरह की स्थिति को दूर करके ही मानवाधिकार की बात की जा सकती है. इस मौके पर गृह सचिव आमीर सुबहानी, डीजीपी केएस द्विवेदी, सचिव वंदना किन्नी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन