बिहार की सांस्कृतिक पहचान है हस्तशिल्प : मंत्री

Updated at : 05 Dec 2018 6:44 PM (IST)
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बिहार की सांस्कृतिक पहचान है हस्तशिल्प : मंत्री

पटना : हस्तशिल्प बिहार की सांस्कृतिक पहचान है. यह प्रदेश के ग्रामीण जनजीवन से बहुत गहराई तक जुड़ा है. यह क्षेत्र श्रम और हुनर पर आधारित कुटीर एवं लघु उद्योग है. इसमें रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं. यह बातें उद्योग विभाग के मंत्री जय कुमार सिंह ने कहीं. वे हस्तशिल्प कलाकारों को राज्य पुरस्कार […]

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पटना : हस्तशिल्प बिहार की सांस्कृतिक पहचान है. यह प्रदेश के ग्रामीण जनजीवन से बहुत गहराई तक जुड़ा है. यह क्षेत्र श्रम और हुनर पर आधारित कुटीर एवं लघु उद्योग है. इसमें रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं. यह बातें उद्योग विभाग के मंत्री जय कुमार सिंह ने कहीं. वे हस्तशिल्प कलाकारों को राज्य पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान बुधवार को बोल रहे थे. इसमें 19 कलाकारों को 22-22 हजार रुपये के चेक दिये गये. साथ ही 15 कलाकारों को दक्षता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया.

मंत्री जय कुमार सिंह ने कहा कि अगले वर्ष से राज्य पुरस्कार की राशि 22 हजार से बढ़ा कर 50 हजार रुपये कर दी जायेगी. उन्होंने कहा कि बिहार में टेराकोटा, मधुबनी पेंटिंग, मंजूषा कला, काष्ठ कला और टिकुली कला जैसे शिल्पों की विविधता है. यह अब देश और दुनिया को आकर्षित करने लगी है. उन्होंने कहा कि भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के आयोजन की जिम्मेदारी उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान को दिये जाने के बाद पिछले पांच वर्ष में चार बार बिहार को गोल्ड मिल चुका है. अब पुरस्कृत कलाकार मास्टर ट्रेनर बनकर अन्य को सिखाएं. उपेंद्र महारथी संस्थान के जीर्णोद्धार के लिए करीब 30 करोड़ रुपये दिया है.

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