पटना : स्कूलों में इलाज की उचित व्यवस्था नहीं
Updated at : 03 Dec 2018 9:16 AM (IST)
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अधिकतर स्कूलों में नहीं है स्थायी नर्स की व्यवस्था सुरक्षा के जरूरी बिंदुओं पर बोर्ड ने अपनी क्वालिटी बुलेटिन में प्रकाशित किया था पटना : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने मौजूदा सत्र से शारीरिक शिक्षा की कक्षाएं अनिवार्य कर दी है, वहीं स्कूलों में स्थायी रूप से कम-से-कम एक नर्स की बहाली व एक […]
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अधिकतर स्कूलों में नहीं है स्थायी नर्स की व्यवस्था
सुरक्षा के जरूरी बिंदुओं पर बोर्ड ने अपनी क्वालिटी बुलेटिन में प्रकाशित किया था
पटना : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने मौजूदा सत्र से शारीरिक शिक्षा की कक्षाएं अनिवार्य कर दी है, वहीं स्कूलों में स्थायी रूप से कम-से-कम एक नर्स की बहाली व एक मेडिकल कक्ष होना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ी, तो किसी बच्चे का अच्छी तरह प्राथमिक उपचार किया जा सके. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर अविलंब इलाज के लिए किसी अस्पताल या नर्सिंग होम के साथ टाइ-अप होना जरूरी है.
हालात ये हैं कि अधिकांश स्कूलों में बच्चों के लिए शारीरिक सुरक्षा की ये समुचित व्यवस्थाएं नहीं हैं. बच्चों की सुरक्षा को पांच भागों में बांटा गया है. इसमें शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक, आपातकालीन, आपदा से निबटना व साइबर सुरक्षा शामिल है. इन पांचों को बोर्ड ने अपनी क्वालिटी बुलेटिन सेनबोसेक के वोल्यूम 48 में प्रकाशित किया था.
नाम न छापने की शर्त पर एक अभिभावक ने बताया कि हाल ही में स्कूलमें उनके बच्चे की तबीयत बिगड़ गयी. उसे इलाज के लिए पास के किसी अस्पताल में भेजने के बजाय उन्हें फोन करके स्कूल बुलाया गया. तब तक बच्चा पेट दर्द से परेशान रहा. उनके पहुंचने पर बच्चे को स्कूल से छोड़ा गया. उसके बाद डॉक्टर के पास ले जा कर जांच करायी.
शारीरिक सुरक्षा के लिए क्या है जरूरी
बोर्ड के निर्देशानुसार बच्चों की शारीरिक सुरक्षा के लिए विभिन्न बिंदुओं पर ध्यान देना जरूरी है. इसके तहत बच्चों का हेल्थ कार्ड मेंटेन करना जरूरी है. इसे लेकर बोर्ड काफी गंभीर है और स्कूलों को निर्देश भी दिया है.
इसके अलावा बच्चे को कोई बीमारी हो तो स्कूल उसकी मेडिकल रिपोर्ट रखे, अभिभावक स्कूल को बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएं, स्कूल के पास कम-से-कम एक योग्य नर्स हो जो फुलटाइम हो, स्कूल से दो किलोमीटर की परिधि में किसी अस्पताल या नर्सिंग होम के साथ टाइअप हो, स्कूल में मेडिकल कक्ष व फर्स्ट एड बॉक्स तथा शिक्षकों को फर्स्ट एड का प्रशिक्षण हो. स्कूल में प्रमुख स्थानों पर फर्स्ट एड प्रोटोकॉल लिखा होना चाहिए.
पटना. हर वर्ष की तरह इस बार भी प्राइवेट स्कूलों में नामांकन की प्रक्रिया आरंभ हो रही. कुछ स्कूलों में एडमिशन फार्म बिक्री शुरू कर दी गयी है, कुछ स्कूलों में आगामी दिनों में यह प्रक्रिया पूरी की जायेगी.
इस बीच जिला शिक्षा विभाग ने भी शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत प्राइवेट स्कूलों में कोटे की सीटों पर एडमिशन की तैयारी शुरू कर दी है. जानकारी के अनुसार पिछले सत्रों की तुलना में नये सत्र में एडमिशन की प्रक्रिया जल्द पूरी की जायेगी. इसके लिए जिला शिक्षा विभाग पांच दिसंबर तक क्षेत्रवार स्कूलों की सूची तैयार करेगा. जो क्षेत्र जिस स्कूल से संबद्ध होगा, वहां रहनेवाले कमजोर एवं अभिवंचित परिवारों के बच्चे उसी स्कूल में एडमिशन के लिए आवेदन करेंगे.
जनवरी में पूरी कर ली जायेगी प्रक्रिया : बताया जाता है कि यह सूची तैयार किये जाने के बाद लाभुक परिवारों के बच्चों के एडमिशन के लिए स्कूलों में आवेदन की प्रक्रिया आरंभ होगी.
इस बीच विभाग द्वारा स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों की भी सूची तैयार की जायेगी. आवेदन की प्रक्रिया जनवरी में पूरी कर ली जायेगी. क्योंकि पिछले ही दिनों शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने आगामी 26 जनवरी को लॉटरी के माध्यम से कोटे की सीटों पर प्रथम चरण का नामांकन आरंभ करने का निर्देश दिया है. उसके बाद जरूरत पड़ी तो द्वितीय व तृतीय चरण में भी एडमिशन संभव है.
क्षेत्रवार स्कूलों की सूची बनेगी : उल्लेखनीय है कि मौजूदा वर्ष में सत्र शुरू होने के चार महीने बाद तक कोटे की सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया चली, बावजूद शत-प्रतिशत एडमिशन नहीं हो सका. वहीं प्रथम चरण की लॉटरी में ही कुछ अभिभावकों ने घर से स्कूल की दूर होने का हवाला देते हुए एडमिशन नहीं कराया.
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