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वायु प्रदूषण में पटना और गया ने दिल्ली को भी छोड़ा पीछे, देश में सबसे अधिक दूषित रही पटना की हवा

Updated at : 02 Dec 2018 3:14 AM (IST)
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वायु प्रदूषण में पटना और गया ने दिल्ली को भी छोड़ा पीछे, देश में सबसे अधिक दूषित रही पटना की हवा

राजदेव पांडेयपटना : पिछले करीब 30 दिनों से बिहार के मुख्य शहरों की हवा बेहद दूषित रही है. शनिवार को पटना और गया का एयर क्वालिटी इंडेक्स प्रदूषण के लिए कुख्यात दिल्ली और ग्रेटर नोएडा से अधिक दर्ज हुआ है. इन दोनों शहरों की एयर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू क्रमश: 394 एवं 374 दर्ज की गयी. […]

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राजदेव पांडेय
पटना : पिछले करीब 30 दिनों से बिहार के मुख्य शहरों की हवा बेहद दूषित रही है. शनिवार को पटना और गया का एयर क्वालिटी इंडेक्स प्रदूषण के लिए कुख्यात दिल्ली और ग्रेटर नोएडा से अधिक दर्ज हुआ है. इन दोनों शहरों की एयर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू क्रमश: 394 एवं 374 दर्ज की गयी. जबकि दिल्ली की एयर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू केवल 303 के आसपास ही रही. दरअसल पटना की आबोहवा की खराब हालात स्थायी हो गयी है. इसके चलते समूचा शहर खास तौर पर दोपहर और शाम को घुटन महसूस कर रहा है.
सेंट्रल पॉल्यूशन बोर्ड की तरफ से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक देश के 65 शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स तैयार किया जा रहा है. इनमें शनिवार को 13 शहर ऐसे थे, जिनकी एयर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू 300 से 400 के बीच पायी गयी. वायु गुणवत्ता के इस इंडेक्स को वैरी पूअर कैटेगरी माना जाता है. इंडेक्स वैल्यू 400 के ऊपर खतरनाक कैटेगरी दी जाती है.

वेरी पूअर कैटेगरी वाली राजधानियां
पटना के अलावा खराब हवा वाली राजधानियों में दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 306, कोलकाता का 300 लखनऊ का एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 दर्ज किया गया है. भोपाल के औद्योगिक इलाके पूअर कैटेगरी में दर्ज हैं. जिन राजधानियों की हवा संतोषजनक कैटेगरी की पायी गयी, उनमें चेन्नई, तिरुअनंतपुरम, हैदराबाद, जयपुर, मुंबई, बेंगलुरु हैं.
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक खराब हो रही हवा की सबसे बड़ी वजह पीएम (पार्टिकुलेटेड मैटर ) 2़ 5 है, जो वाहनों के धुएं, सॉलिड कचरा, रेत और धूल कण आदि से बनता है.
वेरी पूअर वैल्यू का असर : इस कैटेगरी में आम आदमी को श्वसन संबंधी बीमारियां और दूसरी दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं. समस्या खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है. सांस लेने में दिक्कत आती है. घुटन महसूस होती है. आंख, गले और फेफड़े पर इसका सर्वाधिक नकारात्मक या घातक असर पड़ता है.
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